नई शिक्षा नीति के जरिए नए भविष्य का होगा निर्माण: पीएम मोदी
नई दिल्ली, जुलाई 29: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के एक साल पूरे होने पर आयोजित कार्यक्रम में हिस्सा ले रहे हैं। इस कार्यक्रम में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान भी शामिल हुए। प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने शिक्षा के क्षेत्र में अकादमिक बैंक ऑफ क्रेडिट और राष्ट्रीय डिजिटल शिक्षा वास्तुकला सहित कई महत्वपूर्ण पहल की शुरुआत की। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि, नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति को एक साल पूरा होने पर सभी देशवासियों और सभी विद्यार्थियों को बहुत-बहुत शुभकामनाएं। बीते एक वर्ष में देश के आप सभी महानुभावों, शिक्षको, प्रधानाचार्यों, नीतिकारों ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति को धरातल पर उतारने में बहुत मेहनत की है।
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पीएम मोदी ने आगे कहा कि, राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लागू करना आज़ादी के अमृत महोत्सव का प्रमुख हिस्सा बन गया है। इतने बड़े महापर्व के बीच राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत आज शुरू हुईं योजनाएं नए भारत के निर्माण में बहुत बड़ी भूमिका निभाएंगी। भविष्य में हम कितना आगे जाएंगे, कितनी ऊंचाई प्राप्त करेंगे, ये इस बात पर निर्भर करेगा कि हम अपने युवाओं को वर्तमान में यानि आज कैसी शिक्षा दे रहे है, कैसी दिशा दे रहे हैं। मैं मानता हूं कि भारत की नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति राष्ट्र निर्माण के महायज्ञ में बड़े फैक्टर्स में से है।
पीएम ने कहा कि, नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति युवाओं को ये विश्वास दिलाती है कि देश अब पूरी तरह से उनके और उनके हौसलों के साथ है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति को किसी भी तरह के दबाव से मुक्त रखा गया है। 21वीं सदी का आज का युवा अपनी व्यवस्थाएं, अपनी दुनिया खुद अपने हिसाब से बनाना चाहता है। इसलिए, उसे एक्सपोजर चाहिए, उसे पुराने बंधनों, पिंजरों से मुक्ति चाहिए। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति युवाओं को विश्वास दिलाती है कि देश पूरी तरह से उनके साथ है, उनके हौसले के साथ है।
उन्होंने कहा कि, जिस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के प्रोग्राम को अभी लॉन्च किया गया है, वो भी हमारे युवाओं को फ्यूचर के लिए तैयार करेगा, AI driven इकॉनमी के रास्ते खोलेगा। हमने-आपने दशकों से ये माहौल देखा है जब समझा जाता था कि अच्छी पढ़ाई करने के लिए विदेश ही जाना होगा। लेकिन अच्छी पढ़ाई के लिए विदेशों से स्टूडेंट्स भारत आयें, बेस्ट संस्थान भारत आयें, ये अब हम देखने जा रहे हैं।
पीएम ने आगे कहा कि, आज बन रही संभावनाओं को साकार करने के लिए हमारे युवाओं को दुनिया से एक कदम आगे होना पड़ेगा, एक कदम आगे का सोचना होगा। हेल्थ हो, डिफेंस हो, इंफ्रास्ट्रक्चर हो, टेक्नालजी हो, देश को हर दिशा में समर्थ और आत्मनिर्भर होना होगा। मुझे खुशी है कि 8 राज्यों के 14 इंजीनियरिंग कॉलेज, 5 भारतीय भाषाओं- हिंदी-तमिल, तेलुगू, मराठी और बांग्ला में इंजीनियरिंग की पढ़ाई शुरू करने जा रहे हैं। इंजीनिरिंग के कोर्स का 11 भारतीय भाषाओं में ट्रांसलेशन के लिए एक टूल भी डिवेलप किया जा चुका है। भारतीय साइन लैंग्वेज को पहली बार एक भाषा विषय यानि एक विषय का दर्जा प्रदान किया गया है। अब छात्र इसे एक भाषा के तौर पर भी पढ़ पाएंगे। इससे भारतीय साइन लैंग्वेज को बहुत बढ़ावा मिलेगा, हमारे दिव्यांग साथियों को बहुत मदद मिलेगी।












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