कॉन्क्लेव ऑन नेचुरल फार्मिंग में बोले पीएम मोदी, कहा- खेती को कैमिस्ट्री की लैब से निकालना होगा
नई दिल्ली, 16 दिसंबर: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए 'कॉन्क्लेव ऑन नेचुरल फार्मिंग' सम्मेलन को संबोधित किया। इस दौरान पीएम मोदी ने कहा कि ये कॉन्क्लेव गुजरात में जरूर हो रहा है, लेकिन इसका दायरा, इसका प्रभाव पूरे भारत के लिए है और देश के हर किसान के लिए है। पीएम मोदी ने बताया कि उर्वरकों ने उपज बढ़ाने में मदद की और हरित क्रांति का नेतृत्व किया, लेकिन विकल्पों की तलाश जारी रखने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती बिना किसी दुष्प्रभाव के बेहतर उत्पादन देती है।

गुजरात के आणंद में आयोजित कॉन्क्लेव ऑन नेचुरल फार्मिंग में पीएम मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए से में हिस्सा लेते हुए कहा कि पिछले 6-7 साल में बीज से लेकर बाजार तक, किसान की आय को बढ़ाने के लिए एक के बाद एक कई कदम उठाए गए हैं। मिट्टी की जांच से लेकर सैकड़ों नए बीज तक, पीएम किसान सम्मान निधि से लेकर लागत का डेढ़ गुणा एमएसपी तक, सिंचाई के सशक्त नेटवर्क से लेकर किसान रेल तक, सरकार ने कई कदम उठाए हैं।
'अब प्रकृति की प्रयोगशाला में आना होगा'
वहीं देश में किसान के लिए होने वाले कामों का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि खेती के अलग अलग आयाम हों, फूड प्रोसेसिंग हो, प्राकृतिक खेती हो ये विषय 21वीं सदी में भारतीय कृषि का कायाकल्प करने में बहुत मदद करेंगे। इस कॉन्क्लेव के दौरान यहां हजारों करोड़ रुपये के समझौते पर भी चर्चा हुई है। उन्होंने आगे कहा कि केमिकल और फर्टिलाइजर ने हरित क्रांति में अहम रोल निभाया, लेकिन हमें इसके विकल्पों पर भी साथ ही साथ काम करते रहना होगा। हमें अपनी खेती को कैमिस्ट्री की लैब से निकालकर प्रकृति की प्रयोगशाला से जोड़ना ही होगा। प्रकृति की प्रयोगशाला तो पूरी तरह से विज्ञान आधारित ही है।
'पुराने ज्ञान के साथ आधुनिक कदम उठाने की जरूरत'
सम्मेलन को संबोधित करते हुए पीएम ने कहा कि कृषि से जुड़े हमारे इस प्राचीन ज्ञान को हमें ना सिर्फ फिर से सीखने की जरूरत है, बल्कि उसे आधुनिक समय के हिसाब से तराशने की भी आवश्यकता है। इस दिशा में हमें नए सिरे से शोध करने होंगे, प्राचीन ज्ञान को आधुनिक वैज्ञानिक फ्रेम में ढालना होगा। प्राकृतिक खेती से जिन्हें सबसे अधिक फायदा होगा, वो हैं देश के 80% किसान। वो छोटे किसान, जिनके पास 2 हेक्टेयर से कम भूमि है। इनमें से अधिकांश किसानों का काफी खर्च, केमिकल फर्टिलाइजर पर होता है। अगर वो प्राकृतिक खेती की तरफ मुड़ेंगे तो उनकी स्थिति और बेहतर होगी।
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प्राकृतिक खेती के लिए पीएम की अपील
वहीं उन्होंने अपील करते हुए कहा कि मैं आज देश के हर राज्य से, हर राज्य सरकार से, ये आग्रह करुंगा कि वो प्राकृतिक खेती को जन आंदोलन बनाने के लिए आगे आएं। इस अमृत महोत्सव में हर पंचायत का कम से कम एक गांव जरूर प्राकृतिक खेती से जुड़े, ये प्रयास हम कर सकते हैं।












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