मणिपुर को लेकर PM मोदी खुलकर बोले हैं, पूरा लेखा-जोखा रख दिया, 11 हजार FIR-500 अरेस्ट

PM Modi on Manipur: लोकसभा में विपक्ष ने मणिपुर को लेकर सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। जिस वक्त पीएम मोदी लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा के बाद जवाब दे रहे थे, उस दौरान विपक्ष लगातार मणिपुर को न्याय दो का नारा लगा रहा था।

हालांकि लोकसभा में पीएम मोदी ने इस मुद्दे पर कुछ खास नहीं कहा, लेकिन राज्यसभा में पीएम मोदी ने मणिपुर सहित पूर्वोत्तर भारत के राज्यों को लेकर खुलकर बात की। इस दौरान पीएम ने कहा जो भी तत्व मणिपुर की आग में घी डालने की कोशिश कर रहा है, मैं उनसे आगाह करना चाहता हूं कि ऐसा करना बंद करें। एक समय आएगा जो मणिपुर के लोग इन्हें रिजेक्ट कर देंगे।

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विपक्ष को आड़े हाथ लेते हुए पीएम ने कहा जो नॉर्थईस्ट को लेकर सवाल खड़ा करते हैं, उन्होंने उसे नजरअंदाज कर दिया था। उन्होंने उसे उसके नसीब पर छोड़ दिया था। वहां कितनी ही सीटें है, इसे देखते हुए इन लोगों ने उसपर ध्यान नहीं दिया।

हमने जो 5 साल में किया, उन्हें 20 साल लगते

लेकिन हमने इसके लिए विशेष काम किया। ट्रेड-टूरिज्म का एक नेटवर्क यहां हमने विकसित किया। हमने नॉर्थ ईस्ट में गत पांच वर्षों में जो काम किया है, अगर पुराने कांग्रेस के काम से तुलना करें तो इन लोगों को इतना काम करने में 20 साल लग जाते। हमने इतना तेजी से काम किया है। आज नॉर्थ ईस्ट की कनेक्टिविटी को हमने प्राथमिकता दी है।

नॉर्थईस्ट में शांति के प्रयास

नॉर्थ ईस्ट की स्थायी शांति के लिए 10 वर्षों में अनेक प्रयास किए गए, निरंतर प्रयास किए गए, बिना रुके, बिना थके प्रयास किए गए। राज्यों के बीच हमने सीमा विवाद को खत्म करने की कोशिश की है। हमने सारे काम सहमति के साथ किए हैं।

हिंसा से जुड़े संगठन जो हथियारबंद गिरोह थे, जो वहां लड़ाई लड़ते थे, हर व्यवस्था को चुनौती दी थी, हर काउंटर ग्रुप को चुनौती देते थे, आज उनको साथ लेकर स्थायी समझौते हो रहे हैं। जो गंभीर गुनाहगार हैं वो जेल जाने के लिए तैयार हो रहे हैं।

मणिपुर में 11 हजार FIR

मणिपुर की स्थिति सामान्य करने के लिए सरकार निरंतर प्रयासरत है। वहां जो कुछ भी घटनाएं घटी, 11 हजार से ज्यादा एफआईआर दर्ज की गई। 500 से ज्यादा लोग अरेस्ट हुए। इस बात को हमें स्वीकार करना होगा कि मणिपुर में लगातार हिंसा की घटनाएं कम होती जा रही हैं।

इसका मतलब शांति की आशा रखना, शांति पर भरोसा रखना संभव हो रहा है। आज मणिपुर के अधिकांश हिस्सों में आम दिनों की तरह स्कूल-कॉलेज चल रहे हैं। दफ्तर और दूसरे संस्थान खुले हैं।

स्थिति सामान्य की ओर

मणिपुर में भी देश के अन्य हिस्सों की तरह परीक्षाएं हुई हैं। केंद्र और राज्य सरकार सभी से बातचीत करते हैं। शांति-सौहार्द के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। शांतिपूर्ण तरीके से यह काम हो रहा है।

बीते समय में पहली की सकार में ऐसा नहीं हुआ है, गृहमंत्री यहां हफ्तों तक रहे, बार-बार वहां जाकर संबंधित लोगों को जोड़ने का काम किया। सरकार के सभी वरिष्ठ अधिकारी लगातार वहां जा रहे हैं, समस्या के समाधान के लिए हर प्रकार के प्रयासों को बल दिया जा रहा है।

मणिपुर में बाढ़ का संकट

इस समय मणिपुर में बाढ़ का संकट चल रहा है। राज्य के साथ मिलकर केंद्र की सरकार काम कर रही है। एनडीआरएफ की टीम आज ही वहां पहुंची है। हम सभी को राजनीति से ऊपर उठकर वहां की स्थिति को सामान्य बनाने में सहयोग करना चाहिए, यह हम सबका कर्तव्य है।

कांग्रेस ने 10 बार राष्ट्रपति शासन लगाया

जो लोग मणिपुर के इतिहास को जानते हैं, उन्हें पता है कि सामाजिक संघर्ष का लंबा इतिहास रहा है। कांग्रेस के लोग यह ना भूलें कि मणिपुर में इन्ही कारणों से 10 बार राष्ट्रपति शासन लगाना पड़ा है।

यह हमारे कार्यकाल में नहीं हुआ है। फिर भी राजनीतिक फायदा उठाने के लिए, वहां पर जिस प्रकार की हरकतें हो रही हैं वह शर्मनाक है।

1993 में मणिपुर में ऐसी ही घटनाओं का क्रम चला था, इतना तीव्र और व्यापक चला था कि पांच साल लगातार चला था। हमें इस इतिहास को समझकर स्थितियों को सही करने का प्रयास करना है। जो भी सहयोग करना चाहता है, हम उसका सहयोग लेना चाहते हैं।

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