'यह राष्ट्रपति नहीं, संविधान का अपमान, घमंड टूटेगा'–प्रोटोकॉल विवाद पर PM मोदी का ममता पर तीखा हमला
PM Modi on Mamata Banerjee: अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम बंगाल की तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सरकार पर जोरदार हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार ने देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के प्रोटोकॉल का उल्लंघन किया है, जो केवल एक व्यक्ति नहीं बल्कि संविधान और लोकतांत्रिक परंपराओं का अपमान है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यह घटना बेहद चिंताजनक है और देश की जनता इसे कभी भूलने वाली नहीं है।
दिल्ली में लगभग 33,500 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं के उद्घाटन और शिलान्यास के बाद जनसभा को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि जब पूरा देश अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मना रहा है, उसी समय पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति का अपमान किया गया।

उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू संथाल आदिवासी समुदाय की एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक परंपरा से जुड़े कार्यक्रम में शामिल होने के लिए बंगाल गई थीं। लेकिन टीएमसी सरकार ने उस कार्यक्रम का बहिष्कार कर दिया, जो न केवल राष्ट्रपति बल्कि आदिवासी समाज के सम्मान को ठेस पहुंचाने वाला कदम है।
PM मोदी बोले- "राष्ट्रपति का नहीं, संविधान का अपमान"
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने भाषण में कहा कि टीएमसी सरकार का यह व्यवहार सिर्फ राष्ट्रपति के प्रति अनादर नहीं है, बल्कि यह देश के संविधान और लोकतंत्र की गरिमा के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि देश की जनता, विशेषकर आदिवासी समाज और महिलाएं, इस अपमान को कभी स्वीकार नहीं करेंगी। उनके मुताबिक बंगाल की जागरूक जनता भी इस घटना को याद रखेगी और इसका जवाब देगी।
पीएम मोदी ने कहा,
''आज देश अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मना रहा है, और कल पश्चिम बंगाल में टीएमसी सरकार ने देश की राष्ट्रपति आदरणीय श्रीमती द्रौपदी मुर्मू जी का घोर अपमान किया है। द्रौपदी मुर्मू जी संथाल आदिवासी परंपरा के एक बड़े उत्सव में शामिल होने के लिए बंगाल गई थीं, लेकिन राष्ट्रपति जी और आदिवासी समाज के उस पवित्र और महत्वपूर्ण कार्यक्रम का टीएमसी ने बहिष्कार किया। पश्चिम बंगाल की प्रबुद्ध जनता टीएमसी को एक नारी के अपमान के लिए, एक आदिवासी के अपमान के लिए और देश के महामहिम राष्ट्रपति के अपमान के लिए कभी माफ नहीं करेगी। देश भी माफ नहीं करेगा, देश का आदिवासी समाज भी कभी माफ नहीं करेगा, देश की नारी शक्ति भी कभी माफ नहीं करेगी।''
अहंकार सत्ता को चकनाचूर कर देता है: PM मोदी
पीएम मोदी ने अपने भाषण में सत्ता के अहंकार पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि भारत की परंपरा में कहा जाता है कि चाहे कोई व्यक्ति कितना भी शक्तिशाली क्यों न हो, उसका अहंकार ही अंततः उसके पतन का कारण बनता है।
उन्होंने कहा कि टीएमसी की राजनीति और सत्ता का घमंड जल्द ही टूट जाएगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि जिसने देश की आदिवासी महिला राष्ट्रपति की गरिमा का अपमान किया है, उसे जनता कभी माफ नहीं करेगी।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू बंगाल दौरा: क्या है पूरा विवाद
दरअसल यह विवाद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के उत्तर बंगाल दौरे से जुड़ा है। वह दार्जिलिंग जिले में आयोजित नौवें अंतरराष्ट्रीय संथाल सम्मेलन में मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल होने पहुंची थीं। मूल रूप से यह कार्यक्रम बिधाननगर के फांसीदेवा ब्लॉक में आयोजित होना था, जहां बड़ी संख्या में संथाल समुदाय के लोग आसानी से पहुंच सकते थे। लेकिन राज्य प्रशासन ने सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन का हवाला देते हुए कार्यक्रम का स्थान बदलकर बागडोगरा एयरपोर्ट के पास स्थित गोसाईंपुर कर दिया।
बताया गया कि नया स्थान अपेक्षाकृत छोटा था, जिससे कई लोग कार्यक्रम में शामिल नहीं हो सके। इस बदलाव को लेकर खुद राष्ट्रपति मुर्मू ने भी नाराजगी जताई थी।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने जताई नाराजगी
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कार्यक्रम के दौरान कहा कि स्थान बदलने के कारण कई लोग इस आयोजन में शामिल नहीं हो पाए। उन्होंने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को अपनी छोटी बहन बताते हुए यह भी पूछा कि क्या वह उनसे नाराज हैं।
राष्ट्रपति ने इस बात पर भी आश्चर्य जताया कि न तो मुख्यमंत्री और न ही राज्य सरकार का कोई मंत्री उन्हें रिसीव करने पहुंचा। आम तौर पर राष्ट्रपति के दौरे के दौरान प्रोटोकॉल के तहत राज्य सरकार के वरिष्ठ प्रतिनिधि मौजूद रहते हैं।
बीजेपी का हमला, ममता का जवाब
इस पूरे मामले को लेकर भारतीय जनता पार्टी लगातार ममता बनर्जी और उनकी सरकार पर हमलावर है। बीजेपी का आरोप है कि राज्य सरकार ने जानबूझकर राष्ट्रपति के कार्यक्रम को महत्व नहीं दिया।
हालांकि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम के बारे में राज्य सरकार को पहले से कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई थी।
इस विवाद के बाद बंगाल की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। जहां केंद्र सरकार और बीजेपी इसे राष्ट्रपति के अपमान का मामला बता रही है, वहीं टीएमसी इसे राजनीतिक आरोप करार दे रही है। लेकिन इतना तय है कि इस मुद्दे ने एक बार फिर केंद्र और पश्चिम बंगाल सरकार के बीच राजनीतिक टकराव को और तीखा बना दिया है।












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