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PM Modi Shapath Samaroh: किस बात की शपथ ली जाती है? उल्लंघन पर क्या प्रावधान है? कब शुरू हुई परंपरा ?

PM Modi Shapath Samaroh: नरेंद्र मोदी ने रविवार (9 जून) को लगातार तीसरी बार भारत के प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। देश की राष्‍ट्रीय राजधानी दिल्‍ली स्थित राष्ट्रपति भवन में शपथ ग्रहण समारोह का आयोजन किया गया। साथ ही 71 सांसदों ने भी केंद्र के मंत्री पद की शपथ ली। इस ऐतिहासिक पल के 7 देशों से आमंत्रित अतिथि गवाह बने।

ऐसे में सभी के जहन में यह सवाल उठना लाजमी है क‍ि क्या होता है शपथ समारोह? क्यों होता है? किस बात की शपथ ली जाती है? शपथ तोड़ने या उल्लंघन पर क्या प्रावधान है? शपथ लेने की परंपरा का उदय कब हुआ? आइए जानते हैं प्रत्येक सवालों के जवाब....

PM Modi Shapath Samaroh

प्रधानमंत्री व मंत्री क्यों लेते हैं शपथ?
प्रधानमंत्री और मंत्री शपथ इसलिए लेते हैं क्योंकि यह सुनिश्चित करता है कि वे अपने कर्तव्यों का पालन पूरी ईमानदारी और निष्ठा के साथ करेंगे, और उनके कार्य गोपनीय रहेंगे। यह शपथ उनके द्वारा उठाए जाने वाले कदमों और फैसलों में जिम्मेदारी और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण होती है।

किस बात की शपथ लेते हैं?

  • पद की शपथ: वे ईश्वर के नाम पर या सत्यनिष्ठा से प्रतिज्ञा करते हैं कि वे अपने कर्तव्यों का पालन पूरी निष्ठा और ईमानदारी से करेंगे।
  • गोपनीयता की शपथ: वे यह भी शपथ लेते हैं कि किसी भी मामले को, जो उनके मंत्रालय से संबंधित हो, किसी भी अनधिकृत व्यक्ति को प्रकट नहीं करेंगे।

भारत के संविधान में शपथ ग्रहण को लेकर नियम?

  • अनुच्छेद 75(4): प्रधानमंत्री और अन्य मंत्रियों को राष्ट्रपति द्वारा पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई जाती है।
  • अनुच्छेद 99: संसद के सभी सदस्यों के शपथ ग्रहण के नियम।
  • अनुच्छेद 124 (6): सुप्रीम कोर्ट के जजों की शपथ ग्रहण के नियम।

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शपथ तोड़ने या उल्लंघन पर सजा का प्रावधान?

संविधान में शपथ तोड़ने या उल्लंघन के लिए कोई विशेष सजा का प्रावधान नहीं है, लेकिन अगर कोई मंत्री अपने कर्तव्यों का पालन नहीं करता या गोपनीयता का उल्लंघन करता है, तो उसे प्रधानमंत्री के अनुशंसा पर राष्ट्रपति द्वारा पद से हटा दिया जा सकता है, इसे महाभियोग कहा जाता है। इसके अलावा, यदि कोई गंभीर आपराधिक कृत्य करता है, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

शपथ लेने की परंपरा कब शुरू हुई?
भारत में शपथ लेने की परंपरा संविधान लागू होने के साथ 26 जनवरी 1950 से शुरू हुई। स्वतंत्र भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने इस दिन शपथ ली थी। इसके बाद से यह परंपरा सभी संवैधानिक पदों के लिए लागू होती आई है। शपथ ग्रहण समारोह देश की संवैधानिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो नवनिर्वाचित नेताओं के कर्तव्यों और उत्तरदायित्वों को स्पष्ट रूप से फोकस करता है।

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