PM Modi Lok Sabha Poll तमिलनाडु की सीट से लड़ेंगे! संसद में Sengol स्थापना से मिले संकेत
PM Modi Lok Sabha चुनाव गत दो वर्षों से उत्तर प्रदेश के वाराणसी संसदीय सीट से लड़ रहे हैं। 2014 में पहली बार लोक सभा चुनाव लड़ने वाले नरेंद्र मोदी ने वडोदरा सीट से भी चुनावी ताल ठोकी थी। इस बार प्रधानमंत्री दक्षिण भारतीय सीट से चुनाव लड़ने पर विचार कर रहे हैं।
दरअसल, संसद भवन की नई इमारत के उद्घाटन के दौरान जिस तरह प्रधानमंत्री ने सेंगोल की स्थापना की, इसे दक्षिण भारत की राजनीति से जोड़ा जा रहा है। टेलीग्राफ की रिपोर्ट के अनुसार पीएम मोदी ने संकेत दिया है कि वे तमिलनाडु की सीट से चुनाव लड़ेंगे।

इस खबर में सत्तारूढ़ दल के सूत्रों के हवाले से कहा गया कि मोदी अगले साल लोकसभा चुनाव 2024 तमिलनाडु के निर्वाचन क्षेत्र से लड़ने पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं। इसे भाजपा और पीएम मोदी के हिंदुत्व की राजनीति से भी जोड़ा जा रहा है।
दरअसल, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले महीने नए संसद भवन में चोल-शैली के राजदंड "पवित्र" सेंगोल की स्थापना कर रहे थे, उससे पहले उन्होंने तमिलनाडु के हिंदू पुजारियों के समूह का नेतृत्व किया।
उन्होंने सेंगोल को लेटकर साष्टांग दंडवत प्रणाम भी किया। इसे हिंदुत्व को आगे बढ़ाने के तौर पर देखा जा रहा है। संसद से पहले भी प्रधानमंत्री अयोध्या और काशी दौरों पर धार्मिक आयोजनों में बढ़ चढ़कर भाग ले चुके हैं।
सूत्रों के अनुसार, तमिलनाडु से इलेक्शन लड़ने के पीछे का विचार यह साबित करना है कि मोदी विंध्य के दक्षिण में उत्तर की तरह ही लोकप्रिय हैं। इससे भाजपा की किस्मत भी चमकने के आसार हैं। तमिलनाडु में उत्तर और पश्चिम में की तरह भाजपा का जनाधार नहीं है। 2019 में उन्होंने केवल वाराणसी सीट से ताल ठोकी थी।
सूत्रों ने कहा, अगर मोदी चुनाव लड़ने के लिए दक्षिणी सीट चुनते हैं, तो यह उनके लिए दूसरी सीट होगी, क्योंकि वह वाराणसी के अपने मौजूदा निर्वाचन क्षेत्र से भी चुनाव लड़ेंगे।
तमिलनाडु में एक निर्वाचन क्षेत्र, जिसके बारे में भाजपा मोदी के लिए अस्थायी रूप से विचार कर रही है, वह रामनाथपुरम है। इसमें रामेश्वरम का हिंदू तीर्थ स्थल भी पड़ता है। मोदी ने पिछले साल खुद काशी (वाराणसी) और रामेश्वरम के बीच धार्मिक संबंध पर जोर दिया था।
प्रधानमंत्री का ये कहना कि वाराणसी और रामेश्वरम दोनों भगवान शिव के निवास हैं और "तमिलनाडु दक्षिण की काशी है" इस बात का संकेत माना जा रहा है कि वे तमिलनाडु से ताल ठोकने का मन बना चुके हैं।
बता दें कि रामेश्वरम एडम ब्रिज (रामसेतु) के भी करीब है, जो भारत और श्रीलंका के बीच चूना पत्थर की एक श्रृंखला है। जिसे कुछ हिंदू राम की सेना द्वारा लंका तक बनाया गया पुल मानते हैं। ऐसे में हिंदू आस्था का बड़ा केंद्र ये क्षेत्र प्रधानमंत्री की राजनीतिक के मुफीद भी साबित होगा, इसकी संभावना है।
तमिलनाडु में विचाराधीन दूसरा निर्वाचन क्षेत्र कन्याकुमारी है। ये इकलौती सीट है जिसे भाजपा ने 2014 में जीता था, लेकिन 2019 में हार का मुंह देखना पड़ा था। पार्टी का मानना है कि यहां मोदी की जीत प्रधानमंत्री द्वारा कश्मीर से कन्याकुमारी तक देश को एकजुट करने के बारे में उसके कथन को पुष्ट करेगी।
ये भी रोचक है कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पिछले हफ्ते चेन्नई में पार्टी पदाधिकारियों के साथ बंद कमरे में बैठक की थी। पार्टी सूत्रों के अनुसार, उन्होंने यह संकेत दिया था कि भाजपा भविष्य में किसी तमिलियन को प्रधानमंत्री के रूप में देखना चाहती है।
बाद में वेल्लोर में एक रैली में, शाह ने संसद में मोदी और सेंगोल की स्थापना के तमिल प्रतीकवाद का भी जिक्र किया था। उन्होंने राज्य के लोगों से अगले साल के आम चुनाव में एनडीए को 25 सीटें सौंपने की अपील करते हुए इसे सेंगोल के लिए मोदी को धन्यवाद के रूप में देखने को कहा गया था।
पीएम की राजनीति को लेकर टेलीग्राफ की रिपोर्ट के अनुसार, पार्टी के एक नेता ने तर्क दिया, 'एक बार जब मोदीजी तमिलनाडु से निर्वाचित हो जाते हैं, तो उनकी इमेज एक तमिल शख्स की बन जाएगी। वाराणसी से सांसद के रूप में, फिलहाल प्रधानमंत्री एक 'काशीवाला' और 'यूपीवाला' हैं।
दिल्ली में भाजपा नेताओं ने कहा कि मोदी 2019 से ही तमिलनाडु में चुनाव लड़ने की जमीन तैयार कर रहे थे। ऐसा इसलिए क्योंकि उन्होंने चीनी राष्ट्रपति शी जिंगपिंग को तमिलनाडु के ही ममल्लापुरम में एक शिखर बैठक के लिए आमंत्रित किया था।
पिछले साल के अंत में, मोदी ने "तमिलनाडु और काशी (वाराणसी) के बीच सदियों पुराने संबंधों का जश्न मनाने" के लिए अपने निर्वाचन क्षेत्र में एक महीने के "तमिल काशी संगमम" का आयोजन किया था।
वाराणसी के कार्यक्रम में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था, 'काशी और तमिलनाडु संस्कृति और सभ्यता के कालातीत केंद्र हैं। काशी भगवान विश्वनाथ की है और तमिलनाडु पर भगवान रामेश्वरम की कृपा है...तमिलनाडु दक्षिण की काशी है।'
बता दें कि मोदी के गृह राज्य गुजरात में भी इस साल की शुरुआत में बनारस जैसा कार्यक्रम आयोजित किया गया था। सौराष्ट्र में आयोजन का मकसद था कि दोनों राज्यों के बीच "पुराने लिंक" पर फिर से जोर दिया जा सके।
मोदी ने 2010 में गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में गुजरात और तमिलनाडु के बीच सांस्कृतिक संबंधों का जश्न मनाने के लिए मदुरै में भी एक कार्यक्रम का आयोजन कराया था।
पार्टी के अंदरूनी सूत्रों ने कहा कि काशी तमिल संगमम के बाद, भाजपा मशीनरी ने सावधानी से मोदी के तमिलनाडु से चुनाव लड़ने की योजना के बारे में एक "अफवाह" फैलाई। इसका मकसद जनता को तैयार करना था।
दक्षिण के एक भाजपा नेता ने गोपनीयता की शर्त पर बताया, 'तमिलनाडु में मोदी के राज्य से चुनाव लड़ने को लेकर काफी चर्चा है। हमें जो प्रतिक्रिया मिल रही है वह उत्साहजनक है। हमें विश्वास है कि मोदी न केवल जीतेंगे बल्कि राज्य में भाजपा को कुछ सीटें जीतने में मदद करेंगे।'
सियासी पंडितों का मानना है कि मोदी का स्पष्ट मत है कि तमिलनाडु में भाजपा के एक सफल राजनीतिक आक्रमण से "सांस्कृतिक राष्ट्रवाद" की भाजपा की विचारधारा को बल मिलेगा। साथ ही "एक भारत श्रेष्ठ भारत" का उनका नारा और आगे बढ़ाया जा सकेगा। इससे उन्हें गांधी-नेहरू की लोकप्रियता की बराबरी या उससे भी आगे निकलने में मदद मिलेगी।












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