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Vizhinjam Seaport: देश को मिला नया 'समुद्री गेटवे', आखिर क्यों खास है 8,900 करोड़ की लागत से बना विझिंजम पोर्ट

Vizhinjam International Deepwater Port: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार, 2 अप्रैल को देश के पहले अंतरराष्ट्रीय गहरे समुद्र ट्रांसशिपमेंट बंदरगाह 'विझिंजम इंटरनेशनल सीपोर्ट' का उद्घाटन किया। यह भारत के समुद्री क्षेत्र में ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है।

यह न केवल समुद्री क्षेत्र में एक मील का पत्थर साबित होगा, बल्कि यह देश को वैश्विक समुद्री मानचित्र पर मजबूती से स्थापित करने की दिशा में एक निर्णायक कदम है। यह देश का पहला कंटेनर ट्रांसशिपमेंट पोर्ट है।

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आखिर भारत के लिए क्यों खास है विझिंजम सीपोर्ट? क्या है इसकी भौगोलिक स्थिति और कैसे बनेगा व्यापारिक रुट के लिए गेम चेंजर? आईए विस्तार से जनाते हैं....

Vizhinjam International Port: विझिंजम पोर्ट चर्चा में क्यों हैं?

पीएम मोदी ने जब करीब ₹8,900 करोड़ रुपये की लागत वाले इस मेगा प्रोजेक्ट को शुरू किया तब भारत के लिए समुद्र शक्ति में ये एक नए युग की शुरुआत है। इस परियोजना को अदाणी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन (SEZ) प्राइवेट लिमिटेड द्वारा तैयार किया जा रहा है। अदाणी समूह इस परियोजना में लगभग 9,000 करोड़ रुपये का निवेश कर रहा है।

विझिंजम एंटरनेशनल सीपोर्ट प्रोजेक्ट भारत का पहला डीपवॉटर ट्रांसशिपमेंट पोर्ट है। सरल शब्दों में कहें तो यह भारत का पहला गहरे पानी वाला बंदरगाह है जिसका प्रयोग आसानी से सामान को लाने ले जाने के लिए किया जाता है। भारत के दक्षिण भाग में इसकी उपस्थिति इसे और खास बनाती है जो अंतर्राष्ट्रीय शिपिंग मार्ग तक पहुंच को आसान बनाती है।

गौरतलब है कि इस बंदरगाह के शुरू हो जाने से कोलंबो, सिंगापुर और दुबई जैसे बड़े ट्रांसशिपमेंट पर अपनी निर्भरता को कम करेगा और बड़े जहाज की आवाजाही में लागत को कम करने में बड़ा योगदान देगा।

Vizhinjam International Port: विझिंजम पोर्ट की खासियत?

दरअसल भारत के पास अंतरराष्ट्रीय शिपिंग मार्ग पर गहरे पानी के बंदरगाह नहीं है यह पोर्ट इस जरूरत को पूरा कर सकता है। विझिंजम बंदरगाह शुरू हो जाने पर यहां होने वाला ट्रांसशिपमेंट जहाज और लागत में बचत करेगा इसका सीधा असर वस्तुओं पर कीमत कम होगी।

  • विझिंजम सीपोर्ट की लोकेशन इसे खास बनाती है। ये एक गहरे पानी वाला बंदरगाह है जो समुद्र तक के 18 से 20 मीटर की गहराई तक है।
  • यह सीपोर्ट हर मौसम में काम कर सकता है जो लगभग 24,000 टीईयू क्षमता के भारी जहाजों को खड़ा कर सकता है।
  • विझिंजम इंटरनेशनल सीपोर्ट का ट्रायल जुलाई 2024 में शुरू हुआ था और तब से अब तक इस बंदरगाह ने ट्रांसशिपमेंट कंटेनर हैंडलिंग के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां दर्ज की हैं।
  • अब तक 285 से अधिक जहाज इस बंदरगाह पर डॉक कर चुके हैं, जिनमें कुछ विश्व के सबसे बड़े कंटेनर जहाज भी शामिल हैं।

पिछले महीने ही, दुनिया के सबसे बड़े कंटेनर कैरियर में से एक एमएससी तुर्किए ने विझिंजम बंदरगाह पर डॉक किया, जो इस बंदरगाह की बढ़ती वैश्विक पहचान का स्पष्ट प्रमाण है।

Vizhinjam International Deepwater Port: भारत का समुद्री हब में पॉवर

विझिंजम इंटरनेशनल सीपोर्ट की शुरुआत सिर्फ केरल ही नहीं बल्कि पूरे भारत के लिए लाभदायक है। यह बंदरगाह भारत को लॉजिस्टिक और ट्रांसशिपमेंट के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक क्रांतिकारी पहल है। यह बंदरगाह भारतीय व्यापार को वैश्विक बाजारों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा और आने वाले समय में यह दक्षिण एशिया का प्रमुख समुद्री केंद्र बन सकता है।

एशिया-यूरोप शिपिंग रूट में महत्वपूर्ण केंद्र की भूमिका विझिंजम बंदरगाह को भूमध्यसागरीय शिपिंग कंपनी MSC ने अपने 'जेड सेवा मार्ग' (Jade Service) में शामिल कर लिया है। इस कदम ने विझिंजम को एशिया और यूरोप के बीच एक प्रमुख ट्रांसशिपमेंट हब के रूप में स्थापित कर दिया है। इससे भारत को न केवल व्यापारिक दृष्टिकोण से लाभ होगा, बल्कि वैश्विक समुद्री संपर्क और आर्थिक वृद्धि के नए द्वार भी खुलेंगे।

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