राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस समारोह में पीएम मोदी ने की शिरकत, कई परियोजनाओं की रखी आधारशिला
National Technology Day हर साल एक नई और अलग थीम के साथ मनाया जाता है। इस साल की थीम है 'स्कूल टू स्टार्टअप्स- इग्नाइटिंग यंग माइंड्स टू इनोवेट'।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज यानि गुरुवार को दिल्ली के प्रगति मैदान में राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस 2023 को चिह्नित करने वाले एक कार्यक्रम का उद्घाटन किया। इस कार्यक्रम के जरिए राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस के 25वें वर्ष के उत्सव की शुरुआत भी की गई जो आज से 14 मई तक आयोजित किया जाएगा। इस दौरान पीएम मोदी के साथ रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह भी मौजूद थे।
पीएम मोदी ने छात्र-छात्राओं से की बात
कार्यक्रम में पहुंचने के बाद पीएम मोदी ने छात्र-छात्राओं से बात भी की। पीएम मोदी ने छात्रों और छात्राओं द्वारा बनाए गए तकनीक का भी जायजा लिया। उन्होंने सभी छात्र-छात्राओं की सराहना की। पीएम मोदी की बातचीत करते वीडियो भी सामने आया है।
पीएम मोदी ने कई परियोजनाओं की आधारशिला रखी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश में वैज्ञानिक और तकनीकी उन्नति से संबंधित 5800 करोड़ रुपये से अधिक की कई परियोजनाओं की आधारशिला रखी और राष्ट्र को समर्पित किया। जिन परियोजनाओं की आधारशिला रखी गई उनमें लेजर इंटरफेरोमीटर ग्रेविटेशनल-वेव ऑब्जर्वेटरी-इंडिया (एलआईजीओ-इंडिया), हिंगोली; होमी भाभा कैंसर हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर, जटनी, ओडिशा; और टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल, मुंबई का प्लेटिनम जुबली ब्लॉक।
राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस क्यों मनाया जाता है?
राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस देश में वैज्ञानिक और तकनीकी उपलब्धियों और भारत में संबंधित औद्योगिक विकास का जश्न मनाता है। यह आयोजन हर साल 11 मई को विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा आयोजित किया जाता है और इसकी अध्यक्षता केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी और पृथ्वी विज्ञान मंत्री करते हैं। विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में व्यक्तिगत वैज्ञानिक, नवप्रवर्तक और उद्यमी इस दिन राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त करते हैं। चलिए इस दिन के इतिहास और महत्व को जानते हैं।
पोखरण परमाणु परीक्षण से जुड़ा है इतिहास
11 मई, 1998 को आयोजित पोखरण-द्वितीय कार्यक्रम के तहत पांच परमाणु परीक्षणों में से पहले को मनाने के लिए भारत सरकार द्वारा 11 मई को राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस के रूप में घोषित किया गया था। तत्कालीन प्रधान मंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने इस दिन का नामकरण किया था। उसी दिन, पहले स्वदेशी विमान 'हंसा-3' की परीक्षण उड़ान बेंगलुरु में आयोजित की गई थी।











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