गुजरात हाईकोर्ट में पड़ी याचिका, मांगा गया प्राइवेट में शराब पीने का हक
अहमदाबाद। गुजरात ड्राई स्टेट (यहां शराब बेचने और पीने पर पांबदी) है। इसी शराबबंदी को निजता का उल्लंघन और समानता के अधिकार के खिलाफ बताते हुए हाई कोर्ट में एक याचिका दाखिल हुई है। इस याचिका में कहा गया है कि निजी रूप से शराब पीने को अपराध नहीं माना जाना चाहिए। हालांकि कोर्ट का कहना है कि इस याचिका पर वह पहले राज्य सरकार की शराब बैन पॉलिसी के पक्ष को सुनेगी।

याचिकाकर्ता राजीव पटेल ने गुजरात निषेध अधिनियम और बॉम्बे निषेध नियमों के कई धाराओं की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी जिसके अनुसार, किसी शख्स को व्यक्तिगत स्थान में भी शराब पीने और ले जाने पर रोक है। उन्होंने जॉन स्टुअर्ट मिल का हवाला देते हुए कहा कि व्यक्तिगत स्थान पर शराब पीना खुद से जुड़ा हुआ कार्य है जिससे न ही किसी और को कोई हानि पहुंच सकती है और न ही यह सामाजिक सुरक्षा को खतरे में डालने जैसा है।
गौरतलब है कि कि गुजरात के वर्ष 1960 में अस्तित्व के आने के साथ ही राज्य में नशाबंदी लागू है। जरात नशाबंदी अधिनियम, 1949 के तहत शराब खरीदने, बिक्री, पीने, उपयोग करने, रखने, निर्यात करने, लाने-ले जाने को लेकर प्रतिबंध लगाया गया है। राज्य के भीतर शराब पीकर प्रवेश करना भी अपराध की श्रेणी में आता है। कुछ धाराओं के तहत कुछ चयनित लोगों को शराब की बिक्री, रखने व पीने की मंजूरी दी गई है। पर्यटन व निवेश के उद्देश्य से शराब को लेकर कुछ ढिलाई बरती गई है। विशेष आर्थिक क्षेत्र (एसईजेड) में रहने वाले लोगों को कार्ड जारी किया जाता है जिससे वे शराब खरीद और पी सकते हैं। अधिनियम की इन धाराओं को रद्द करना चाहिए क्योंकि यह पूरी तरह से असंवैधानिक व अनुचित है। पूरे देश में सिर्फ गुजरात में शराब बेचने व बिक्री करने के आरोप का दोषी पाए जाने पर फांसी का प्रावधान है।












Click it and Unblock the Notifications