Places of Worship Act पर सुप्रीम कोर्ट में टली सुनवाई, केंद्र ने जवाब के लिए मांगा और समय
Places of Worship Act ज्ञानवापी से जुड़े 'प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट' पर सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को होने वाली सुनवाई को फिलहाल टाल दिया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने प्लेसेस ऑफ वर्शिप एक्ट,1991 की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं का जवाब देने के लिए केंद्र को और समय दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में जवाब दाखिल करने के लिए केंद्र सरकार को 12 दिसंबर तक का समय दिया है। जवाब दाखिल होने के बाद जनवरी में इस मामले की अगली सुनवाई निर्धारित की गई है।

'प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट' को लेकर 2020 में दाखिल याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने 12 मार्च 2021 को नोटिस जारी किया था। जिसके बाद इस साल 9 सितंबर को कोर्ट ने केंद्र से 2 हफ्ते में जवाब दाखिल करने को कहा था। इस मामले पर सोमवार को सरकार की तरफ से पेश सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने एक बार फिर समय देने का अनुरोध कर दिया।
जिस पर चीफ जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली बेंच ने उन्हें और समय देने का फैसला किया। सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को जवाब दाखिल करने के लिए 12 दिसंबर तक का वक्त दिया है। अब इस मामले में जनवरी के पहले हफ्ते में सुनवाई होगी। इस धार्मिक स्थल कानून को सुप्रीम कोर्ट में वकील अश्विनी उपाध्याय के अलावा बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी, विश्व भद्र पुजारी पुरोहित महासंघ जैसे कई याचिकाकर्ताओं ने कानून को चुनौती दी है।
उनका पक्ष रखते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश द्विवेदी ने पीठ को बताया कि धार्मिक स्थलों की यथास्थिति बरकरार रखने संबंधी 1991 के अधिनियम पर संसद में अपर्याप्त चर्चा के बाद पारित कर दिया गया था। इसमें मामले में राष्ट्रीय महत्व से संबंधित महत्वपूर्ण सवालों से जुड़े मुद्दे शामिल हैं तथा अदालत द्वारा इसका फैसला किया जाना चाहिए।
1991 का प्लेसेस ऑफ वर्शिप एक्ट सभी धार्मिक स्थलों की स्थिति 15 अगस्त 1947 वाली बनाए रखने की बात कहता है। इसे चुनौती देने वाली कई याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हुई हैं। इन याचिकाओं में इस कानून को मौलिक और संवैधानिक अधिकारों के विरुद्ध बताया गया है। याचिकाओं में कहा गया है कि ये कानून हिंदू, जैन, सिख और बौद्ध समुदाय को अपना अधिकार मांगने से वंचित करता है।












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