LAC पर चीन कर रहा दूसरे ब्रिज का निर्माण, आर्मी चीफ एक्शन में, बढ़ाई सैनिकों की तैनाती
नई दिल्ली, 26 मई। पूर्वी लद्दाख में चीनी सैनिकों की बढ़ती गतिविधि और निर्माण कार्य की भारतीय सेना के प्रमुख जनरल मनोज पांडे ने इस मीहने की शुरुआत में समीक्षा की थी। यहा भारतीय सेना की काउंटर फोर्स को तैनात किया गया है, इसका भी सेना प्रमुख ने जायजा लिया था। दरअसल चीनी सेना एलएसी से 16 किलोमीटर दूर एक डबल स्पैन ब्रिज का निर्माण पैंगोंग त्सो के उत्तर किनारे पर कर रहा है, जिसको लेकर काफी चर्चा हो रही है। यहां पीपुल्स लिबरेशन आर्मी की गतिविधियों की सेना प्रमुख ने 1 मई को कार्यभार संभालने के बाद भारतीय सेना की तैनाती का ऑडिट किया था।

सेना के चीफ सैनिकों की तैनाती से संतुष्ट
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार जनरल पांडे भारतीय सेना की तैनाती और चौकसी से काफी संतुष्ट थे। एलएसी पर 1597 किलोमीटर के दायरे में ईस्ट लद्दाख में भारतीय सेना तैनात है। लेकिन चीनी सेना द्वारा अक्साई चिन इलाके में कब्जे के बाद भारतीय सेना यहां सतर्क हो गई हैं। दोनों देशों की सेना यहां एक दूसरे के सामने हैं। चीनी सेना ने एलएसी पर रॉकेट रेजिमेंट को स्थापितकिया है। इसके अलावा चीनी वायुसेना का भी लड़ाकू विमान, बॉम्बर आदि गार गुंसा के पास डेमचोक व होटन एयरबेस पर तैनात किया गया है।

भारतीय सेना मुस्तैद
चीनी चुनौती के मद्देनजर भारतीय सेना ने भी यहां पर अपनी सेना की पूरी तैनाती की है। जिन सड़क और ब्रिज के जरिए टैंक या युद्ध सामग्री आ सकती है वहां पर भारतीय सैनिक तैनात हैं। यह तैनाती सभी सात ब्रिज पर है, जोकि गलवान नदी के पास हैं। ऐसे में किसी भी सैन्य आपात स्थिति में भारतीय सेना यहां पर जवाबी कार्रवाई के लिए तैयार है। हाल ही में जो सैटेलाइट तस्वीर सामने आई थी उसमे देखा जा सकता है कि पैगोंग सो के पास एक ब्रिज पहले बनाया गया था जोकि 6 मीटर चौड़ा था, इसपर से जीप आदि को पार ले जाया जा सकता है।

भारी चीनी टैंक गुजर सकते हैं नए ब्रिज से
लेकिन चीनी सेना ने खुर्नाक फोर्ट के पास जहां पर पैंगोंग झील 354 मीटर चौड़ा है, वहां पर भी ब्रिज बनाने का फैसला लिया, जिससे की चीनी सेना का तेजी से यहां आवागमन हो सके। भारतीय सेना ने इस बात को संज्ञान में लिया है कि 11 दूसरा ब्रिज जो बन रहा है वह पहले ब्रिज के बगल में ही बन रहा है और यह 11 मीटर चौड़ा है, इस ब्रिज पर 70 टन का सामान ढोया जा सकता है, जोकि किसी भी चीनी टैंक को इसपर से दूसरी तरफ ले जाने में मदद करेगा।

डरे चीन ने शुरू किया निर्माण कार्य
चीन जो दूसरा ब्रिज बना रहा है वह ना सिर्फ उत्तर और दक्षिण नदी के किनारे को जोड़ेगा बल्कि चीनी सैनिक ब्रिज से एक सड़क का निर्माण कर रहे हैं, जोकि मोल्डो गैरिस को चुसुल और चीनी सेना के बेस कैंप से जोड़ेगा। यह बेस कैंप स्पंगूर सो के पीछे स्थित है। सेना का आंकलन है कि ये दोनों ब्रिज ना सिर्फ भारत की ओर तेजी से चीनी सैनिकों की गतिविधि को बढ़ाएंगे बल्कि भारत के लिए 2020 जैसी मुश्किल खड़ी कर सकते हैं। जिस तरह से उस वक्त भारती सैनिकों ने जवाबी कार्रवाई की थी उससे चीन सकते में था, यही वजह है कि चीन ने यहां पर बफर जोन बनाया और सीधे टकराव से बच रहा है।

क्या कहना है विशेषज्ञों का
इस पूरी घटना पर पैनी नजर रखने वाले विशेषज्ञों का कहना है कि दोनो ब्रिज खुर्नाक फोर्ट के पास एलएसी के पास हैं, लेकिन तकनीकी तौर पर यह ब्रिज चीनी सेना के नियंत्रण में 1959 के बाद से है। चीनी सेना यहां 15 प्वाइंट पर तबसे पेट्रोलिंग कर रही है। अभी तक के हालात की बात करें तो गलवान घाटी में दोनों देशों के बीच सैन्य समझौता हुआ है और दोनों देशों की सेनाएं यहां से एक निश्चित दूरी पर हैं। भारतीय सना चाहती है कि पहले पीएलए अप्रैल 2020 की स्थित को यहां पर बरकरार करे, इसके बाद पेट्रोलिंग के मुद्दे का हल निकाले। जबतक यह मसला सुलझ नहीं जाता है भारत सरकार चीन के साथ समझौते को सामान्य करने के कतई मूड में नहीं दिख रही है।












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