कबूतरों के पास रहने से किन बीमारियों का बढ़ा खतरा, जानें कहां दाना डालने पर लगेगा 500 रुपए जुर्माना ?
महाराष्ट्र के कई शहरों में हाइपरसेंजिटिव निमोनिया के मामले बढ़ गए हैं। इसके लिए कबूतरों को बहुत बड़ा कारण माना जा रहा है। इसके मल और पंखों की वजह से इस बीमारी का खतरा है। ठाणें में कबूतरों को दाना डालने पर रोक लगा दी गई

कबूतरों की वजह से फेफड़े के इंफेक्शन में बढ़ोतरी हो गई है। लोग हाइपरसेंजिटिव निमोनिया से पीड़ित होने लगे हैं। इसलिए डॉक्टर सलाह दे रहे हैं कि जहां भी कबूतर या बाकी पक्षियां बड़ी तादाद में हैं, उनसे दूर रहने में ही भलाई है। महाराष्ट्र के मुंबई-पुणे जैसे शहरों में कबूतर की वजह से होने वाले इंफेक्शन के मामले बढ़ गए हैं। डॉक्टरों का कहना है कि इनकी वजह से कुछ इस तरह का संक्रमण भी हो सकता है, जिनकी वजह से जान तक जा सकती है। इसलिए, कबूतर वाले जालों का इस्तेमाल करने और उनकी गंदगी की नियमित सफाई की सलाह दी जा रही है।

महाराष्ट्र के कुछ शहरों में हाइपरसेंजिटिव निमोनिया के मामले बढ़े
मुंबई से सटे ठाणे नगर निगम ने हाल ही में कबूतरों को दाना डालने वाले लोगों के खिलाफ में पोस्टर चिपकाए हैं। इनमें लोगों को कबूतरों को खाना खिलाने को लेकर चेतावनी दी गई है। यह पोस्टर अभियान कबूतरों की वजह से होने वाली हाइपरसेंजिटिव निमोनिया के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए चलाया गया है। ये फेफड़े से संबंधित रोग है, जो कि कबूतरों के संपर्क में आने से होता है। इंडियन एक्सप्रेस की एक खबर के मुताबिक महाराष्ट्र के कुछ शहरों जैसे कि मुंबई, ठाणे और पुणे में इन दिनों कबूतरों से जुड़ी हाइपरसेंजिटिव निमोनिया के मामले बढ़ गए हैं।

कई बार स्वास्थ्य के लिए हो सकता है बहुत खतरनाक
यहां यह बताना जरूरी है कि रिपोर्ट के मुताबिक जिन लोगों में पहले से फेफड़े से जुड़ी समस्या है, उन लोगों में हाइपरसेंजिटिव निमोनिया होने का खतरा बाकी लोगों की तुलना में 60-65 अधिक है। मुंबई के माहिम स्थित एसएल रहेजा अस्पताल के पल्मोनोलॉजिस्ट कंसल्टेंट डॉक्टर सार्थक रस्तोगी ने बताया है कि किस तरह से कबूतर अपने मल से परोक्ष रूप से इस बीमारी को फैला सकते हैं, जो कि कई बार स्वास्थ्य के लिए बहुत ही जोखिम भरा साबित हो सकता है।

कबूतरों के पास रहने से किन बीमारियों का है खतरा ?
कबूतरों की वजह कई प्रकार के फेफड़ा रोग हो सकते है। इन बीमारियों में रेसपिरेटरी ऐलर्जी से गंभीर इंफेक्शन तक शामिल हैं। बाद में इसकी वजह से निमोनिया-सिटकोसिस हो सकता है, जो कि एक बैक्टिरीअल-इंफेक्शन है। अगर सही समय पर आवश्यक इलाज नहीं हुआ तो इससे पीड़ित 15 फीसदी लोगों की मौत तक होने का खतरा है। कबूतरों के संपर्क में आने पर हिस्टोप्लैज्मोसिस का भी खतरा है। यह एक फंगल-इंफेक्शन है, जिसमें मृत्यु दर काफी अधिक है। कुछ लोग जिनकी इम्यून कमजोर है, उनमें क्रिप्टोकॉकल इंफेक्शन के चलते पल्मनेरी या मेनिन्जीअल इंफेक्शन भी हो सकता है।

कबूतरों के नजदीक रहने से बीमारी कैसे होती है?
कबूतर या अन्य पक्षियां अगर आसपास हों और उनकी संख्या बहुत हो तो उनके मल और पंख की वजह से बीमारियां होने का खतरा रहता है। सांस लेने से पक्षियों या कबूतरों के मल और पंखों से एंटीजन फेफड़े तक पहुंचता है और इसके चलते इम्यूनोलॉजिकल रिएक्शन होता है, जो फेफड़े को नुकसान पहुंचाता है। डॉक्टर रस्तोगी ने बताया कि उन्होंने हाइपरसेंजिटिविटी न्यूमोनिटिस (Hypersensitivity Pneumonitis) के कुछ मरीजों को देखे हैं, जो कि या तो कबूतर ब्रीडर थे, या पक्षियों के साथ रहते थे या फिर ऐसी जगह पर रहते हैं, जहां बड़ी संख्या में कबूतर मौजूद होते हैं।

दुनिया में इसको लेकर हुए वैज्ञानिक रिसर्च में क्या पता चला है ?
यह तो पूरी दुनिया में स्थापित हो चुका है कि कबूतों की वजह से ऐलर्जी और इंफेक्शन होते हैं। पिजिन ब्रीडर रोग हाइपरसेंजिटिविटी न्यूमोनिटिस का सामान्य कारण है। इसलिए कबूतरों से जितनी हो सके दूरी बनाकर रहने में ही भलाई है। नहीं तो इसके कारण फेफड़े क्षतिग्रस्त हो सकते हैं।

कबूतरों से होने वाले रोगों का क्या बचाव है ?
विशेष तौर पर ज्यादा उम्र के लोगों के लिए यह ज्यादा गंभीर खतरा पैदा कर सकता है। इसकी रोकथाम के लिए जरूरी है कि पिजिन नेट लगवाएं और कबूतरों के मल और गंदगियों को निरंतर साफ करें। गंदगी साफ करने में भी खास सावधानी रखने की जरूरत है। जो भी व्यक्ति कबूतरों की गंदगी साफ करता है, उसे मास्क और ग्लोव्स का इस्तेमाल जरूर करना चाहिए।
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ठाणे नगर निगम ने रखा है जुर्माना
मुंबई से सटे ठाणे नगर निगम ने पोस्ट लगाकर चेतावनी दी है कि जो भी लोग कबूतरों को दाना डालते हुए पकड़े जाएंगे, उनसे 500 रुपए बतौर जुर्माना वसूला जाएगा। हालांकि, कबूतरों की वजह से हो रहे निमोनिया के मामले बढ़ने के बावजूद अभी तक मुंबई में इस तरह का कोई कदम नहीं उठाया गया है। लेकिन, लोगों के लिए कबूतरों से दूर रहने में ही भलाई है।
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