पठानकोट आतंकी हमला: खुश रहना देश के प्यारों... हम तो सफर करते हैं
नयी दिल्ली (ब्यूरो)। कर चलें हम फिदा जान-ओ-तन साथियों... अब तुम्हारे हवाले, वतन साथियों। आज उन सात हिंदुस्तानियों के लिए सवा सौ करोड़ हिदुस्तानियों की आखें नम हैं। जी हां पठानकोट आतंकी हमले में शहीद हुए 'वो 7 हिंदुस्तानी' आज पंच तत्व में मिल गए। देश के गृह मंत्री कह रहे हैं कि इससे भी बड़ा नुकसान हो सकता था लेकिन हमारे सैनिकों ने इसे विफल कर दिया। अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या हमला विफल रहा?
क्या ये राग अलाप कर गृह मंत्री अपनी सरकार की नाकामी नहीं छुपा रहे हैं? नाकामी का मतलब उस सिस्टम से है जिसकी वजह से जवान शहीद हो रहे है और वो गर्व से कह रहे हैं कि ज्यादा नुकासान नहीं हुआ है। खैर छोडि़ए ये वक्त राजनीतिक विश्लेषण का नहीं है। ये वक्त है पठानकोट के शहीदों को नमन करने का। कभी ना खत्म होने वाले इस दुख की घड़ी में उनके परिजनों के साथ खड़े होने का। क्योंकि जिस बेटे को कभी 'कंधे' पर बैठाया हो उसको 'कंधा' देना किसी प्रलय से कम नहीं होता।
शहीद हुए जवान
- एनएसजी कमांडो लेफ्टिनेंट कर्नल निरंजन कुमार
- सूबेदार मेजर (सेवानिवृत्त) फतेह सिंह
- हवलदार संजीवन सिंह राणा
- हवलदार जगदीश चंद्रह
- गरुड़ कमांडो गुरुसेवक सिंह
- हवलदार कुलवंत सिंह
- वलदार मोहित चंद
नोट: तस्वीरों पर लिखे नंबर उपर लिखें नंबरों के आगे शहीद का नाम समान है। आईए तस्वीरों में देखते हैं इन वीर सपूतों की एक झलकियां और देते हुए उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि:

एनएसजी कमांडो लेफ्टिनेंट कर्नल निरंजन कुमार
उम्र 35 साल, बैंगलोर में जन्म और केरल में घर। आतंकवादी की लाश पर लगे बम को डिफ्यूज करने के प्रयास में बम फटने से हुए शहीद। कुछ माह पहले ही बने लेफ्टिनेंट कर्नल। अपने पीछे 18 माह की बच्ची और पत्नी छोड़ गए।

सूबेदार मेजर (सेवानिवृत्त) फतेह सिंह
उम्र 51 साल। आतंकियों के साथ मुठभेड़ में शहीद। 2009 में डोगरा रेजिमेंट से रिटायर। 2 साल पहले ही पठानकोट में हुई थी तैनाती। 1995 में शूटिंग के लिए जीता था गोल्ड मेडल

गरुड़ कमांडो गुरुसेवक सिंह
उम्र 24 साल। आतंकियों ने गोली मार दी। अंतिम सांस तक संभाला मोर्चा। डेढ़ माह पहले हुई थी शादी। 6 माह पहले ही ज्वाइन की थी आर्मी।

हवलदार मोहित चंद
पठानकोट हमले के शहीदों में हवलदार मोहित चंद का नाम भी आता है। जिन्होंने बहादुरी के साथ लड़ते हुए खुद को वतन पर कुर्बान कर दिया।

हवलदार कुलवंत सिंह
उम्र 49 साल। 2004 में आर्मी से रिटायर होने के बाद 2006 में डीएससी ज्वाइन की। 30 साल की सर्विस में पहली बार होम स्टेट में हुई थी पोस्टिंग।

हवलदार जगदीश चंद्र
उम्र 48 साल। बिना अश्लहे पठानकोट एयरबेस में आतंकियों का पीछा किया। फिर उसी की AK47 छीन कर उन्हें ही मारा। हमले से एक दिन पहले ही छुट्टी बिता कर वापस लौटे थे।

हवलदार संजीवन सिंह राणा
उम्र 50 साल। 2009 में डोगरा रेजिमेंट से रिटायर होने के बाद डीएससी ज्वाइन की। हमले में हए शहीद। सीने पर खाई पांच गोलियां। 2 साल पहले ही जम्मू से पठानकोट लिया था ट्रासंफर। पिता भी आर्मी में












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