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VIDEO: किस तरह बीहड़ की बैंडिट क्वीन फूलन देवी ने शेर सिंह राणा की गोली पर दम तोड़ा

नयी दिल्‍ली (ब्‍यूरो)। फूलन देवी... चंबल की रानी बोले तो बैंडिट क्‍वीन। कभी चंबल उसके नाम से जाना जाता था। बीहड़ में उसकी दहशत थी। गांव में जब बच्‍चा रोता था तो मां कहती थी सो जा वरना फूलन आ जाएगी। फिर किस्मत ने ऐसी पलटी खाई कि चंबल से निकल कर वह जेल पहुंची और जेल से सीधे संसद भवन। एक डाकू अब सांसद थी। मगर किस्मत ने फिर पलटी खाई और 25 जुलाई 2001 को संसद भवन से घर लौटते हुए ठीक उसके सरकारी घर के बाहर उसकी गोली मारकर हत्‍या कर दी गई। 13 साल बाद दिल्‍ली की एक अदालत ने इस मामले में अपना फैसला सुनाया है और हत्या के लिए दोषी ठहराए गए शेर सिंह राणा को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।

Phoolan Devi
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश भरत पराशर ने राणा को आजीवन कारावास की सजा सुनाने के अतिरिक्त उस पर एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया। इसके पहले आठ अगस्त को न्यायालय ने राणा को दोषी ठहराया था। राणा ने 1981 के बेहमई नरसंहार का बदला लेने के लिए फूलन को उनके सरकारी आवास गोली मार दी थी। उल्‍लेखनीय है कि बेहमई नरसंहार को फूलन ने ही अंजाम दिया था, जिसमें उसने ठाकुर जाति के 17 लोगों को मौत के घाट उतार दिया था। अदालत ने राणा को आम इरादे के साथ हत्या और हत्या की कोशिश करने के आरोपों पर दोषी ठहराया। लेकिन उसे आपराधिक साजिश और हथियार अधिनियम से संबंधित आरोपों से बरी कर दिया गया।

जिस वक्‍त फूलन देवी की हत्या हुई थी उस वक्‍त वो उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर संसदीय क्षेत्र से समाजवादी पार्टी की सांसद थीं। पुलिस के अनुसार, राणा और उसके साथियों ने अशोक रोड स्थित फूलन के आवास के बाहर 25 जुलाई, 2001 को उनकी गोली मारकर हत्या कर दी थी। राणा के अलावा मामले में 11 अन्य आरोपी भी थे। उनमें से एक प्रदीप की नवंबर 2013 में तिहाड़ जेल में हृदयाघात के बाद निधन हो गया और अन्य आरोपी बरी हो गए।

माथे पर लगी थी फूलन देवी को गोली

25 जुलाई 2001 को संसद का सत्र चल रहा था। दोपहर के भोजन के लिए संसद से फूलन 44 अशोका रोड के अपने सरकारी बंगले पर लौटीं। बंगले के बाहर सीआईपी 907 नंबर की हरे रंग की एक मारुति कार पहले से खड़ी थी। जैसे ही फूलन अपने घर की दहलीज पर पहुंची, पहले से उनका इंतजार कर रहे तीन नकाबपोश अचानक कार से बाहर आए और फूलन पर ताबड़तोड़ पांच गोलियां दाग दी। एक गोली फूलन के माथे पर जा लगी। गोलीबारी में फूलन देवी का एक गार्ड भी घायल हो गया। इसके बाद हत्यारे उसी कार में बैठकर फरार हो गए।

प्रेस कांफ्रेंस कर शेर सिंह राणा ने खुद कबूली थी हत्‍या

फूलन देवी की हत्‍या एक राजनीतिक हत्या थी या कुछ और पुलिस के हाथ कोई सुराग नहीं लग पा रहा था। पुलिस फूलन के कातिल की तलाश में मारी मारी फिर रही थी कि तभी 27 जुलाई 2001 को शेर सिंह राणा ने बाकायदा प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सबको सकते में डाल दिया। उसने कबूल किया कि उसी ने फूलन को गोलियों से उड़ाया है। एक सनसनीखेज वारदात को अंजाम देने के बाद राणा के इस सरेआम इकबालिया बयान ने पुलिस को भी हैरत में डाल दिया था।

पहले सरेंडर किया फिर तिहाड़ से भाग गया शेर सिंह राणा

गिरफ्तारी के बाद करीब ढाई साल राणा ने तिहाड़ जेल में गुजारे। इसी दौरान एक बार उसने बयान दिया कि तिहाड़ की सलाखें उसे ज्यादा देर तक नहीं रोक पाएंगी। और हुआ भी ठीक वैसा ही। सुबह 6.55 मिनट का वक्त था। तिहाड़ की जेल नंबर एक के बाहर एक ऑटो आकर रुका। तमाम सुरक्षाकर्मियों की मौजूदगी में पुलिस की वर्दी में एक आदमी ऑटो से उतरकर जेल के अंदर पहुंचा। अपना नाम अरविंद बताते हुए उसने शेर सिंह राणा को हरिद्वार कोर्ट में पेशी के लिए ले जाने की इजाजत मांगी। जरूरी कागजात को ध्यान से देखे बिना ड्यूटी पर तैनात तिहाड़ के सुरक्षाकर्मियों ने राणा को नकली पुलिस के हवाले कर दिया। इस तरह 7.05 मिनट पर फूलन देवी की हत्या का मुख्य आरोपी राणा तिहाड़ की कैद से फरार हो गया।

फरार होते ही अफगानिस्‍तान पहुंच गया था शेर सिंह राणा

शेर सिंह राणा के फरार होने के बाद पुलिस हरिद्वार, रुड़की और मुजफ्फरनगर इलाके में जबरदस्त छापामारी कर थी। आनन-फानन में राणा का सुराग देने वाले को 50 हजार रुपये इनाम देने की भी घोषणा कर दी गई। लेकिन पुलिस नाकामयाब रही। फिर तभी अचानक एक वीडियो सामना आया। इधर पुलिस शेर सिंह राणा को हिन्दुस्तान में ढूंढ़ रही थी और उधर राणा सबको चकमा देकर अफगानिस्तान पहुंच गया था। शेर सिंह राणा ने दावा कि वह अफगानिस्तान में पृथ्वीराज चौहान की असली समाधि पर गया और समाधि की मिट्टी लेकर वापस आ गया। राणा ने अफगानिस्तान में गजनी शहर तक के अपने सफर की बाकायदा वीसीडी तैयार की थी। तिहाड़ जेल से भागने के पूरे दो साल बाद शेर सिंह राणा 2006 में कोलकाता में पकड़ा गया था।

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