UAPA ट्रिब्यूनल के लिए न्यायमूर्ति दिनेश शर्मा पीठासीन अधिकारी नियुक्त, PFI से जुड़े मामलों की करेंगे सुनवाई
नई दिल्ली, 6 अक्टूबर, PFI Ban Latest News: हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्रालय ने पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) पर बैन लगा दिया था। साथ ही एनआईए की छापेमारी में उसके सैकड़ों नेता गिरफ्तार भी हुए। अब इस केस को लेकर केंद्र ने एक बड़ा फैसला लिया है, जिसके तहत दिल्ली हाईकोर्ट के जस्टिस दिनेश कुमार शर्मा (Justice Dinesh Sharma) को गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) ट्रिब्यूनल का पीठासीन अधिकारी (Presiding Officer) नियुक्त किया गया है। वो ये तय करेंगे कि PFI और उसके सहयोगी संगठनों पर लगा बैन सही है या नहीं।

इस संबंध में कानून और न्याय मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना में कहा गया कि दिल्ली हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने जस्टिस दिनेश कुमार शर्मा को गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) ट्रिब्यूनल का पीठासीन अधिकारी नियुक्त किया है। वो पीएफआई और उसके सहयोगी संगठन के मामले देखेंगे। जिसमें रिहैब इंडिया फाउंडेशन (RIF), कैंपस फ्रंट ऑफ इंडिया (CFI), ऑल इंडिया इमाम काउंसिल (AIC), नेशनल कॉन्फेडरेशन ऑफ ह्यूमन राइट्स ऑर्गनाइजेशन (NCHRO), नेशनल वुमन फ्रंट, शामिल हैं। पीठासीन अधिकारी ये देखेंगे कि ये संगठन बैन करने लायक हैं या नहीं।
बंद करवाए जा रहे PFI के दफ्तर
एनआईए ने जब देश में कई जगहों पर छापेमारी की थी, तो उसे कई प्रतिबंधित दस्तावेज, सामग्री आदि मिले थे। साथ ही ये सबूत भी मिले थे कि PFI देश विरोधी गतिविधियों में शामिल है। इसके बाद केंद्र ने उस पर 5 साल का प्रतिबंध लगा दिया। जिस पर सभी राज्य अपने यहां PFI के दफ्तरों को सील करवा रहे हैं। अगर इस संगठन के नाम पर अब कोई एक्टिविटी होती है, तो उसे गैरकानूनी माना जाएगा। एनआईए का आरोप है कि प्रतिबंधित संगठन ने विदेशों से काफी फंडिंग जुटाई और उसका इस्तेमाल अशांति फैलाने के लिए किया। इसकी भी जांच की जा रही है।
केरल पुलिस का अधिकारी निलंबित
वहीं केरल में पीएफआई की सक्रियता ज्यादा थी। वहां पर एक पुलिस अधिकारी को सस्पेंड किया गया है। आरोप के मुताबिक अधिकारी का संबंध प्रतिबंधित संगठन से था, इस वजह से पुलिस हेडक्वार्टर ने उस पर कार्रवाई की। साथ ही इस मामले की जांच की जा रही है।












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