CAA के समर्थन वाले अभियान में लोगों ने भाजपा कार्यकर्ताओं से कहा वापस जाओ, NRC के विरोध में लगाए नारे

बेंगलुरू। कर्नाटक के बेंगलुरू में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कार्यकर्ताओं को उस वक्त शर्मिंदगी का सामना करना पड़ा जब लोगों ने उन्हें वापस जाने को कह दिया। दरअसल भाजपा के कार्यकर्ता नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के समर्थन में चलाए जा रहे अभियान के तहत स्थानीय लोगों के पास आए थे। तभी इन लोगों ने ना केवल कार्यकर्ताओं से वापस जाने को कहा बल्कि एनआरसी (राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर) के विरोध में भी नारे लगाए।

'दस्तावेज नहीं दिखाएंगे'

'दस्तावेज नहीं दिखाएंगे'

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, राजधानी बेंगलुरू के वसंत नगर इलाके के लोगों ने इतना तक कहा कि जब एनआरसी लागू होने के बाद अधिकारी उनके पास आएंगे, तब वह अपने दस्तावेज नहीं दिखाएंगे। बता दें नागरिकता संशोधन कानून यानी सीएए बीते साल दिसंबर माह में आया था। इस कानून के तहत तीन देशों अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश से उत्पीड़न का शिकार होकर भारत आने वाले छह गैर मुस्लिम समुदाय के लोग यहां छह साल रहने के बाद भारतीय नागरिकता हासिल कर सकते हैं।

'किसी भी अधिकार को नहीं छीनता'

'किसी भी अधिकार को नहीं छीनता'

इससे पहले रविवार को मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा ने बेंगलुरू में सीएए के समर्थन में अभियान लॉन्च किया था। तब उन्होंने कहा था, 'सीएए शीत सत्र में प्रमुख राजनीतिक पार्टियों के संशोधित बिल को समर्थन देने के बाद आया था। ये उन हिंदू अल्पसंख्यकों को समर्थन देने के लिए लाया गया जिन्हें बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान में उत्पीड़न का सामना करना पड़ रहा है। ये कानून भारतीयों के किसी भी अधिकार को नहीं छीनता है।' उन्होंने कांग्रेस पर लोगों को गुमराह करने का आरोप भी लगाया था।

'सीएए के समर्थन में रैलियां'

'सीएए के समर्थन में रैलियां'

येदियुरप्पा ने कहा था, 'किसी की नागरिकता जाने का कोई सवाल ही खड़ा नहीं होता।' बता दें भाजपा सीएए से संबंधित जानकारी देने के लिए लोगों को घर घर जाकर इसके बारे में बता रही है। इस अभियान के तहत सीएए के समर्थन में रैलियां निकाली जा रही हैं और सोशल मीडिया का भी सहारा लिया जा रहा है। इस कानून के आने के बाद से बेंगलुरू समेत देश के कई हिस्सों में जमकर विरोध प्रदर्शन हुए थे। सरकार ने विपक्षी पार्टियों पर लोगों को गुमराह करने का आरोप लगाया है। जबकि विपक्षी पार्टियों का कहना है कि सरकार ने संशोधित कानून में मुस्लिमों को शामिल ना कर उनके साथ भेदभाव किया है।

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