फर्जी फ्रीडम फाइटर्स को ताउम्र मिलती रहेगी पेंशन: सुप्रीम कोर्ट
महाराष्ट्र में मिले थे कई फर्जी फ्रीडम फाइटर्स। 2005 में सुप्रीम कोर्ट ने मामले में दिए थे सख्त आदेश।
नई दिल्ली। फर्जी सर्टिफिकेट बनाकर सरकारी पेंशन स्कीम का लाभ उठाने के मामले में एक तरफ सुप्रीम कोर्ट ने जांच के आदेश दिए थे। जांच के बाद फर्जी पेंशनधारियों की पेंशन बंद कर दी गई। उसके बाद अब कोर्ट ने मानवीय आधार पर ऐसे मामले में फंसे बुजुर्ग पेंशनधारियों को पेंशन देना जारी रखने का फैसला दिया है।

2005 में सुप्रीम कोर्ट ने जांच के लिए बनाया कमीशन
महाराष्ट्र के बीड जिले में बड़ी संख्या में ऐसे पेंशनधारियों के मामले सामने आए थे जिसमें पता चला था कि कई लोग फर्जी सर्टिफिकेट बनाकर फ्रीडम फाइटर्स को मिलने वाले पेंशन का लाभ उठा रहे थे। सुप्रीम कोर्ट ने 2005 के अगस्त में इस केस की जांच का जिम्मा जस्टिस ए बी पालकर कमीशन को सौंपा था।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि जो भी भारत के स्वतंत्रता संग्राम में भाग लेने का झूठा दावा कर रहे थे, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। कोर्ट ने ऐसे लोगों को देशद्रोही की संज्ञा दी थी।
कमीशन की रिपोर्ट के आधार पर पेंशन बंद
सुप्रीम कोर्ट ने पालकर कमीशन से कहा कि ऐसे 354 केस की जांच कर वह रिपोर्ट महाराष्ट्र सरकार को सौंप दे। पालकर कमीशन ने जांच के बाद 354 में से 298 मामले को फर्जी पाया जिसमें फ्रीडम फाइटर होने का दावा किया गया था।
फर्जी फ्रीडम फाइटर्स का मामला हाई कोर्ट में
पालकर कमीशन की रिपोर्ट के आधार पर महाराष्ट्र सरकार ने फर्जी पाए गए मामलों में पेंशन देना बंद कर दिया तो उसके बाद बुजुर्ग पेंशनधारियों ने इसके खिलाफ बॉम्बे हाई कोर्ट में अर्जी डालकर कहा कि वो सीनियर सिटीजंस हैं और इस उम्र में अगर उनको पेंशन के लाभ से वंचित किया जाएगा तो वह अपना जीवन नहीं चला पाएंगे।
चूंकि सुप्रीम कोर्ट ने 2005 में इस मामले में सख्त निर्देश दिए थे, इसलिए हाई कोर्ट ने भी फर्जी पेंशनधारियों की अर्जी खारिज कर दी। इसके बाद उन पेंशनधारियों ने सुप्रीम कोर्ट से इस मामले में अपील की।
सुप्रीम कोर्ट ने मानवीय आधार पर दिया फैसला
जस्टिस कुरियन जोसफ और जस्टिस आर एफ नरीमन की बेंच ने मामले में फैसला देते हुए कहा है कि अगर पेंशन बंद किया जाएगा तो पीड़ित भूखमरी के शिकार हो सकते हैं। इस मामले में बेंच के सामने समस्या आई कि अगर कानूनी तौर पर सही निर्णय लिया जाता है तो इससे याचिकाकर्ता भूखमरी के कगार पर पहुंच सकते हैं।
इसलिए बेंच ने 2013 में इसी तरह के एक मामले में सुप्रीम कोर्ट के दिए फैसले को नजीर बनाते हुए कहा, 'हमारे विचार में बुढ़ापे की इस अवस्था में अगर इस लाभ से उनको वंचित किया जाएगा तो उनके लिए जिंदा रहना मुश्किल हो जाएगा।' इस परिस्थिति को मद्देनजर रखते हुए सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने हाई कोर्ट के फैसले को पलट दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि फर्जी फ्रीडम फाइटर्स की मौत के साथ ही उनको मिलने वाली पेंशन बंद कर दी जाएगी।












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