संसदीय कमेटी की फेसबुक को दो टूक, कहा- वर्चुअली नहीं फिजिकली होना होगा पेश

नई दिल्ली, जून 19: सूचना प्रौद्योगिकी की संसदीय स्थायी कमेटी ने सोशल मीडिया कंपनी फेसबुक के वर्चुअल मीटिंग के आग्रह को ठुकरा दिया है। कांग्रेस सांसद शशि थरूर की अध्यक्षता वाली संसदीय स्थायी समिति ने फेसबुक के अधिकारियों को नागरिकों के अधिकारों को बनाए रखने और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के दुरुपयोग को रोकने के लिए फेसबुक की नीतियों की जांच करते समय 'व्यक्तिगत रूप से' पेश होने होने के निर्देश दिए हैं।

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पैनल ने शुक्रवार को ट्विटर के अधिकारियों से सोशल मीडिया बिचौलियों के लिए नए नियमों को पूरी तरह से लागू नहीं करने, अन्य मुद्दों के अलावा 90 मिनट से अधिक समय तक पूछताछ की। यह अब इस तरह की इन-पर्सन मीटिंग के लिए गूगल, यूट्यूब और अन्य सोशल मीाडिया की बड़ी कंपनियों को भी बुलाएगा। इधर फेसबुक कोरोना वायरस का हवाला देते हुए व्यक्तिगत रूप से पेश होने के लिए तैयार नहीं है, जिसकी वजह से फेसबुक के अधिकारियों ने वर्चुअली मीटिंग में आने का फैसला किया है।

वहीं फेसबुक के इस जवाब के बाद संसदीय कमेटी ने भी अब सख्त रुख अपनाया है। कमेटी के सभी सदस्यों को स्पष्ट करते हुए बताया है कि कोई भी बैठक ऑनलाइन यानी वर्चुअली नहीं की जा सकती है। फेसबुक के अधिकारियों को व्यक्तिगथ रूप से मौजूद रहना होगा। एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक थरूर ने अब इस पर जोर दिया है संसदीय नियम ऑनलाइन बैठकों पर रोक लगाते हैं।

इसके अलावा थरूर ने कहा है कि यदि आवश्यक हो तो उन्हें टीकाकरण की व्यवस्था कर सकते हैं। साथ ही कहा कि समिति उन अधिकारियों का वैक्सीनेशन करवाएगी और आने के लिए उचित मोहलत भी देगी। थरूर ने फेसबुक के उन अधिकारियों की भी लिस्ट मांगी, जिन्हें कंपनी समिति के सामने भेजना चाहती है। पैनल ने पूछा कि फेसबुक ने नए आईटी नियमों के अनुसार भारत में पूर्णकालिक मुख्य अनुपालन अधिकारी की नियुक्ति क्यों नहीं की है।

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