Parliament Winter Session: 'कश्मीरी पंडित नहीं छोड़ते अगर...', जम्मू-कश्मीर बिल पर शाह ने कांग्रेस को घेरा
संसद के शीतकालीन सत्र में बुधवार को जम्मू-कश्मीर बिल पर जमकर चर्चा हुई। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा संसद में पेश किए गए जम्मू-कश्मीर से जुड़े दो विधेयकों का उद्देश्य 70 सालों से ज्यादा समय से अपने अधिकारों से वंचित लोगों को न्याय प्रदान करना है। जम्मू-कश्मीर आरक्षण (संशोधन) विधेयक और जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक पर बहस के दौरान शाह ने पार्टी का नाम लिए बिना कांग्रेस पर हमला किया।
शाह ने कांग्रेस पार्टी का नाम लिए बिना कहा कि अगर वोट बैंक की राजनीति पर विचार किए बिना, आतंकवाद से निपटा जाता तो कश्मीरी पंडितों का पलायन रोका जा सकता था। विधेयकों का बचाव करते हुए उन्होंने कहा कि दोनों विधेयक उन लोगों को प्रतिनिधित्व प्रदान करेंगे, जिन्हें आतंकवाद के कारण कश्मीर छोड़ना पड़ा।

एक कश्मीरी को विधानसभा में नामांकित किया जाएगा
अमित शाह ने सदन को बताया कि कश्मीर विधानसभा में एक सीट पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर से विस्थापित लोगों के लिए आरक्षित की जाएगी। उन्होंने कहा कि दो विधेयकों में से एक में कश्मीरी प्रवासी समुदाय से दो लोगों को विधानसभा में नामांकित किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि जब वे (कश्मीरी पंडित) विस्थापित हुए, तो उन्हें अपने देश में शरणार्थी के रूप में रहने के लिए मजबूर होना पड़ा। लगभग 46,631 परिवार अपने ही देश में विस्थापित हो गए। यह विधेयक उन्हें अधिकार दिलाने के लिए है, यह विधेयक उन्हें प्रतिनिधित्व देने के लिए है।
'कश्मीरी पंडितों के पलायन कराने वाले इंग्लैंड में छुट्टियां मना थे'
उन्होंने कहा कि अगर वोट-बैंक की राजनीति पर विचार किए बिना आतंकवाद से शुरुआत में ही निपटा गया होता, तो कश्मीरी पंडितों को घाटी नहीं छोड़नी पड़ती। शाह ने कहा कि 1980 के दशक के बाद (जम्मू-कश्मीर में) आतंकवाद का युग था और यह एक भयावह दृश्य था। जो लोग इस भूमि को अपना देश मानकर रहते थे, उन्हें बाहर निकाल दिया गया और किसी ने उनकी परवाह नहीं की, न ही रोकने की कोशिश की गई। वास्तव में, जो लोग इसे रोकने के लिए जिम्मेदार थे, वे इंग्लैंड में छुट्टियों का आनंद ले रहे थे।












Click it and Unblock the Notifications