Parliament winter session: 143 सांसदों का निलंबन, क्या है इसके पीछे की राजनीति?
Parliament winter session: लोकसभा से बुधवार को दो और विपक्षी सांसदों के निलंबन के साथ ही संसद के चालू शीतकालीन सत्र में निलंबित सांसदों की संख्या 143 हो चुकी है। लेकिन, सदन में न तो विपक्षी सांसद अपना आक्रामक रवैया बदलने को तैयार हैं और न ही सरकार उनपर किसी तरह की नरमी दिखाने के मूड में है।
विपक्ष की दलील है कि वह तो सिर्फ संसद की सुरक्षा में हुई चूक पर देश के गृहमंत्री से बयान भर चाहता है। क्योंकि, सभी 6 आरोपियों के खिलाफ आतंकवाद-विरोधी यूएपीए कानून के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।

'एक अकेला' से परेशान हुआ विपक्ष?
राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने एक्स पर डाले गए अपने पोस्ट में आरोप लगाया है कि 'प्रधानमंत्री और उनकी पार्टी देश में 'एक पार्टी का शासन' स्थापित करना चाहते हैं।'
उन्होंने पीएम मोदी का नाम लिए बिना कहा कि 'वे 'एक अकेला' की बात करते हैं। जो लोकतंत्र को तबाह करने जैसा है। विपक्षी सांसदों को निलंबित करके उन्होंने ठीक ऐसा ही किया है....'
इससे पहले खड़गे यह भी आरोप लगा चुके थे कि सरकार सदन से विपक्षी सांसदों का सफाया कर 'क्रूर कानूनों' (तीनों आपराधिक कानून) को बिना बहस किए पारित करवाना चाहती है।
विधानसभा चुनाव नतीजों से हताश हुआ विपक्ष?
जबकि, सत्तापक्ष का आरोप है कि विधानसभा चुनावों में मिली हार को विपक्ष पचा नहीं पा रहा है और इसलिए सदन में तख्तियां लहराकर 'आसन' और देश की 'जनता' का अपमान कर रहा है।
संसदीय कार्यमंत्री प्रह्लाद जोशी का कहना है कि बिजनेस एडवाइजरी कमेटी और सर्वदलीय बैठक में इसपर सहमति बन चुकी है कि सदन में तख्तियां दिखाना और प्रदर्शन करने पर सांसदों का तत्कलाल निलंबन होगा।
उनके मुताबिक, 'वे तख्तियां नहीं लाने पर सहमत हुए थे। वे अपनी हार से हताश हो गए हैं, इसलिए ऐसे कदम उठा रहे हैं। अगर यही बर्ताव रहा तो ये लोग अगली बार (लोकसभा चुनावों के बाद) सदन में वापस नहीं आएंगे।'
बता दें कि विपक्ष के कुछ सांसदों ने सदन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मॉर्फ्ड पिक्चर (बदली हुई तस्वीर) भी दिखाने की कोशिश की थी, जिसका सत्तापक्ष ने बहुत ही जोरदार विरोध किया था।
सरकार ने सभापति का मजाक उड़ाने को बनाया मुद्दा
मंगलवार को विपक्षी सांसदों ने सदन के बाहर उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति जगदीप धनकड़ का भी मजाक (मिमिक्री) उड़ाया था। उसपर प्रह्लाद जोशी ने बुधवार को एक्स पर सदन के अंदर का वीडियो शेयर करते हुए विपक्ष पर निशाना साधा है।
उन्होंने लिखा है, 'कल विपक्ष की ओर से आपके संवैधानिक पद को जो अपमानित किया गया है उसकी हम घोर निंदा करते हैं.... यह कोई पहली बार नहीं है जब विपक्ष ने ऐसा किया है। इससे पहले भी इन्होंने प्रधानमंत्री मोदी जी को कई बार और राष्ट्रपति जी को भी अपमानित किया है....।'
विपक्ष को मीडिया के काम में भी दिख रहा खोट!
उधर उपराष्ट्रपति की मिमिक्री पर कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने सफाई दी है कि मीडिया यह वीडियो तो दिखा रहा है, लेकिन विपक्ष के '150' सांसदों को सदन से बाहर किए जाने पर कोई चर्चा नहीं कर रहा।
क्या है इसके पीछे की राजनीति?
इस तरह से संसद की सुरक्षा में चूक का मुद्दा अब पूरी तरह से राजनीतिक शक्ल अख्तियार कर चुका है। विपक्ष जहां विधानसभा चुनावों के नतीजों के बाद खुद के लिए संसद की सुरक्षा में चूक के बहाने 2024 में होने वाले लोकसभा चुनावों से पहले नई राजनीतिक जमीन तलाशने की कोशिशों में जुटा दिख रहा है।
वहीं सत्ताधारी बीजेपी को लगता है कि जनता में पीएम मोदी की लोकप्रियता जिस तरह से कायम है, उसके बाद विपक्ष की इस तरह की सियासत से उसकी सेहत पर आने वाले चुनावों में कोई फर्क नहीं पड़ने वाला।












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