Parliament Security Breach: घुसपैठियों को लेकर नया खुलासा, पीएम मोदी से जुड़ा पोस्टर लेकर घुसे थे अंदर
लोकसभा सत्र के दौरान सदन में घुसे उपद्रवियों और संसद के बाहर अशांति फैलाने की कोशिश कर रहे आरोपियों को लेकर एक नई जानकारी सामने आई है। अतिरिक्त लोक अभियोजक (एपीपी) ने गुरुवार को दिल्ली की एक अदालत को बताया कि संसद सुरक्षा उल्लंघन के आरोपियों के पास पीएम मोदी के पर्चे थे।
उन पैम्फलेट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को "लापता" बताया गया था। साथ ही उन्हें ढूंढने के लिए स्विस बैंक से इनाम की घोषणा की बात पर्चे में लिखी गई थी। एपीपी अतुल श्रीवास्तव ने अदालत को बताया,"पैम्फलेट में पीएम मोदी को एक घोषित अपराधी की तरह दिखाया गया है।"

दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल द्वारा अदालत में सौंपे गए रिमांड आवेदन में कहा गया है कि आरोपियों ने "सांसदों को डराने" और "देश में अशांति पैदा करने" के लिए हमले की साजिश रची थी।
चारों आरोपियों को 7 दिनों की पुलिस हिरासत में भेजा गया
चारों आरोपियों, मनोरंजन डी, सागर शर्मा, नीलम आजाद और अमोल शिंदे को बुधवार को गिरफ्तार कर लिया गया है। उन सभी पर आतंकवाद विरोधी गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। गुरुवार को उन्हें पटियाला हाउस में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश हरदीप कौर की अदालत में पेश किया गया। जिसके बाद उन्हें 7 दिनों की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया।
साजिश में शामिल पांचवा आरोपी गिरफ्तार
संसद के अंदर और बाहर कलर स्मोक छोड़ने और नारे लगाने वाले चारों लोग गिरफ्तार हो चुके हैं। जांच में पाया गया था कि इस घटना की पूरी प्लानिंग 6 लोगों ने मिल कर की थी। जिसमें से पांचवां आरोपी, जिसकी पहचान ललित झा के रूप में हुई है, गिरफ्तार हो चुका है। जबकि, साजिश में शामिल एक और शख्स की तलाश जारी है।
दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल ने 15 दिनों की रिमांड मांगी
अपने आवेदन में, दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल ने यह भी कहा कि झा ने बड़ी साजिश को छिपाने के लिए और उनके खिलाफ सबूत नष्ट करने के लिए चारों आरोपियों के फोन ले लिए थे। 15 दिन की हिरासत की मांग करते हुए स्पेशल सेल ने कहा कि उन्हें इस घटना के पीछे की बड़ी साजिश का पता लगाने के लिए गहन जांच करने की जरूरत है। इस मामले में अन्य व्यक्तियों की संलिप्तता की जांच करना और आरोपियों से आगे की पूछताछ भी शामिल है।
स्पेशल सेल ने यह भी कहा कि पुलिस आरोपी के वित्तीय लेनदेन का पता लगाने की कोशिश कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि हमले के लिए फंडिंग किसने की थी।
एपीपी श्रीवास्तव ने यह भी बताया कि जिन जूतों में आरोपियों ने कलर स्मोक के डब्बे छिपाए थे, वे जूते लखनऊ से और कलर स्मोक मुंबई से खरीदे गए थे। इसके अलावा, एपीपी ने यह भी कहा कि आरोपियों ने "भगत सिंह फैन क्लब" नामक एक ग्रुप भी बनाया हुआ था। एपीपी के कहा, "हमें आरोपियों को इन जगहों पर ले जाने की जरूरत है। हम यह पता लगाना चाहते हैं कि इसके पीछे कौन लोग हैं, उन्हें क्या और कहां से फंडिंग मिली है।"
"जांच के लिए 3-4 दिन की हिरासत काफी"
आरोपियों का प्रतिनिधित्व कर रहे वकील उमाकांत कटारिया ने अदालत से कहा कि जांच के लिए 3 से 4 दिन की हिरासत काफी है।
आरोपियों के खिलाफ आईपीसी की धारा 153 (दंगा भड़काने के इरादे से जानबूझकर उकसाना) के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी। साथ ही 120-बी (आपराधिक साजिश), 452 (अतिचार), 186 (लोक सेवक को सार्वजनिक कार्यों के निर्वहन में बाधा डालना), 353 (लोक सेवकों को उनके कर्तव्य के निर्वहन से रोकने के लिए हमला या आपराधिक बल), और यूएपीए की धारा 16 और 18 आतंकवाद और आतंकवाद की साजिश से संबंधित धाराएं भी लगाई गई हैं।












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