पेरिस हमला: ISIS ऐसे भर्ती कर रहा है भारतीय मुसलमानों को
बेंगलुरु। दुनिया के सबसे खतरनाक आतंकी संगठन आईएसआईएस में करीब 23 भारतीय हैं। यह तो वो संख्या है जो कागजों पर है, वास्तव में यह संख्या इससे कहीं अधिक है। और वे सभी खुफिया विभाग के रडार पर हैं। पेरिस में हुए आतंकी हमले के बाद इस रडार की तरंगे और भी तीव्र कर दी गई हैं, क्योंकि देश पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है।

इंटेलीजेंस ब्यूरो के एक अधिकारी ने वनइंडिया से खास बातचीत में बताया कि 23 से ज्यादा भारतीय आईएसआईएस का हिस्सा हैं। सभी लड़ाकों के रूप में काम नहीं कर रहे हैं, कोई नर्स है तो कोई आतंकियों के लिये भोजन पकाता है, कोई हथियारों को संभालने का तो कोई सप्लाई करने का काम करता है। काम कोई भी हो, कुल मिलाकर देखा जाये तो इन सभी की सोच आईएसआईएस की विचारधारा से मेल खा गई है। बड़ी खबर यह है कि आईएसआईएस अपने साथ तमाम और भारतीय मुसलमानों को जोड़ने की फिराक में है।
भारत को सबसे बड़ा खतरा किससे
इस काम की जिम्मेदारी अंसार-उल-तॉहीद संगठन पर है। यह संगठन इंडियन मुजाहिदीन से निकल कर बना है और यह आईएसआईएस के लिये रिक्रूटमेंट एजेंसी के रूप में कार्य करता है।
अंसार-उल-तॉहीद का सरगना भटकल सुल्तान है और शफी अरमार सेकेंड हेड है। ये दोनों आईएसआईएस के सुप्रीम कमांडर अबु बकर अल-बगदादी के बेहद करीब हैं। हालांकि हाल ही में खबर आयी थी कि सुल्तान की मौत हो गई, लेकिन अब तक इसकी पुष्टि नहीं हुई है। हां यह जरूर है कि इस वक्त संगठन की कमान शफी के हाथों में है।
आतंकी संगठन अंसार-उल-तॉहीद की पहुंच भारत में बहुत तगड़ी है। ये भारतीय मुसलमानों को अपने साथ जोड़ने का काम कर रही है। वो भारतीय मुसलमान जो भारत में या मिडिल ईस्ट में रहते हैं। खास बात यह है कि ये नौकरी का लालच, प्यार मोहब्बत के जाल, आदि में फंसा कर भारतीय मुसलमानों को आतंकी बनाने का काम करते हैं। इनकी खास पहुंच महाराष्ट्र, तमिलनाडु, केरल और तेलंगाना में है।
ऐसे में अगर यह संगठन अपने मनसूबों में सफल हुआ, तो भारत पर बड़ा आतंकी हमला हो सकता है। यही कारण है कि खुफिया विभाग इस संगठन पर खास नजर बनाये हुए है। पेरिस में हमले के बाद भारतीय खुफिया विभाग और भी ज्यादा अलर्ट हो गया है। कोई भी व्यक्ति जो दूर-दूर तक आईएसआईएस से जुड़ा है उस पर खास नजर रखी जा रही है। इस काम में भारत कई अन्य देशों की भी मदद ले रहा है। कोई भी भारतीय जो आईएसआईएस से जुड़ा है उस पर वैश्विक स्तर पर नजर रखी जा रही है। मिडिल ईस्ट और यूरोपीय देशों में यह अभ्यास काफी कठिन काम है।












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