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Beware of Palm Oil: जानिए क्यों खतरनाक है पाम तेल, भूलकर भी ना करें इसका सेवन

Beware of Palm Oil: पाम तेल का इस्तेमाल आपकी सेहत के लिए काफी खतरनाक हो सकता है। जानिए किस तरह से यह तेल आपके अंदर कई तरह की बीमारियों को बढ़ा रहा है।

palm oil

Beware of Palm Oil: भारत में लोग खाने के काफी शौकीन हैं। भारत में खाना पकाने के लिए सबसे ज्यादा इस्तेमाल तेल का होता है, जिसमे सनफ्लॉवर ऑयल, ऑलिव आयल और पाम ऑयल काफी अहम है। लेकिन हम आपको बताना चाहते हैं कि अगर आप इन तीनों ही तेल में से किसी भी तेल का इस्तेमाल कर रहे हैं तो आप अपने अपने स्वास्थ्य के साथ बड़ा खिलवाड़ कर रहे हैं।

2 लाख करोड़ से अधिक का मार्केट
भारत में खाने के तेल का बिजनेस 2 लाख करोड़ रुपए से अधिक का हो चुका है। भारत में तला-भुना खाना काफी ज्यादा खाया जाता है और इसकी खपत बहुत अधिक है। यही वजह है कि भारत में पैकेज्ड फूड की इंडस्ट्री बहुत तेजी से बढ़ रही है। इन पैकेज्ड फूड में इस्तेमाल होने वाले तेल की मांग काफी तेजी से बढ़ रही है।

भारत में चार गुना बढ़ी खपत
पैकेज्ड फूड में सबसे अधिक पाम तेल का इस्तेमाल किया जाता है। यह तेल सबसे सस्ता होता है और आसानी से जितनी इसकी मांग हो उपलब्ध होता है। जिसकी वजह से इसकी बिक्री सबसे अधिक है। भारत में अल्ट्रा प्रोसेस फूड के मार्केट की बात करें तो यह 2024 तक 8 किलोग्राम पर कैपिटा हो जाएगा, जोकि 2005 में सिर्फ 2 किलोग्राम पर कैपिटा थी। यानि 20 साल में इसमे तकरीबन चार गुना का इजाफा होने जा रहा है।

प्रचार के जरिए भ्रमित करने की कोशिश
अल्ट्रा प्रोसेस फूड की बात करें तो इसमे चॉकलेट, बिस्कुल, चिप्स, नमकीन आदि आता है। इसमे कुछ हिस्सा पाम तेल का होता है। जोकि हमारे स्वास्थ्य के लिए काफी खतरनाक है। हालांकि आजकल का युवा स्वास्थ्य को लेकर काफी सजग हुआ है और वह उत्पाद पर दर्ज जानकारी को चेक करता है और इसके बाद ही इसका इस्तेमाल करता है। लेकिन तमाम ब्रांड अपने उत्पाद के प्रचार के तरीकों को पूरी तरह से बदल चुके हैं, यह अब स्वास्थ्य को फोकस रखते हुए अपने उत्पाद का प्रचार करते हैं।

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भ्रामक प्रचार में ना फंसे
फॉर्च्यून सोया हेल्थ तेल, धारा हेल्थ रिफाइंड सनफ्लॉवर तेल, सफोला एक्टिव जैसे तेल की बात करें तो इन सबमे नाम को देखकर ऐसा लगता है कि यह स्वास्थ्य के लिए अच्छे हैं। लेकिन हकीकत यह है कि ये कंपनियां गलत प्रचार के जरिए आपके स्वास्थ्य को हानि पहुंचाने वाला उत्पाद पहुंचा रहे हैं। अगर अडानी विलमर के तेल के डिब्बे पर आपको फॉर्च्यून सोया हेल्थ लिखा दिखेगा, लेकिन इसके पीछे जो जानकारी दर्ज होती है उसमे स्पष्ट तौर पर लिखा होता फॉर्च्यून सोया हेल्थ ब्रांड नाम है, यह इसके सही अर्थ को नहीं प्रदर्शित करता है। भारत में अधिकतर पैकेज्ड फूड में लो कैलोरी का दावा किया जाता है। लेकिन इसके पैकेट को अगर देखें तो इसमे FSSAI के तय मानक 40k कैलोरी प्रति 1000 ग्राम हो सकती है। जबकि इन उत्पाद में इससे इतर कहीं अधिक कैलोरी हीतो है।

पाम तेल में हैक्सेन का इस्तेमाल
रिफाइंड तेल की बात करें तो इसे प्रोसेस करने के लिए कई तरह के नुकसानदायक केमिकल का इस्तेमाल किया जाता है। इसमे हैक्सीन (Hexane) नाम का केमिकल इस्तेमाल किया जाता है। अगर हैक्सीन का इस्तेमाल आप करते हैं तो इशसे आपको मिचली आना, सिर दर्द होना, चक्कर आने जैसी दिक्कत हो सकती है। लंबे समय तक इसका इस्तेमाल करने से आपको मोटापा, आंख से दिखाई देने मे समस्या, सिर दर्द की समस्या हो सकती है।

हैस्केन बढ़ा सकता है आपकी मुश्किल
हैक्सेन का इस्तेमाल रिफाइड तेल को प्रोसेस करने में इसलिए इस्तेमाल किया जाता है ताकि बीज से अधिक तेल निकाला जा सके। हालांकि प्रोसेस के दौरान हैक्सेन को निकालने की कोशिश की जाती है, लेकिन फिर भी इसका एक हिस्सा तेल में रह जाता है। एक लीटर रिफाइंड तेल में 0.8 एमएल तक हैक्सेन पाया जाता है। जिसे लगातार इस्तेमाल करने से आपका स्वास्थ्य काफी खराब हो सकता है।

तकरीबन हर उत्पाद में पाम तेल
पॉम तेल का इस्तेमाल तमाम कॉस्मेटिक उत्पाद, दवाओं, शैंपू, साबुन, चॉकलेट, ब्रेड, नमकीन आदि में किया जाता है। भारत में तकरीबन 25 मिलियन टन पॉम तेल की खपत की जाती है। ऐसे में भारत मलेशिया और इंडोनेशिया से पाम तेल का आयात करता है। पाम तेल का इस्तेमाल भारत के हर कोने में किया जाता है, इसकी बड़ी वजह है कि यह काफी सस्ता होता है। भारत दुनिया का सबसे बड़ा पाम तेल का आयातक देश है।

बाहर के खाने से बचें
स्वास्थ्य एक्सपर्ट का कहना है कि पाम तेल के इस्तेमाल से दिल की कई बीमारियां होती है, कोलेस्ट्रॉल का खतरा बढ़ता है, दिला का दौरा पड़ने का खतरा होता है। यहां तक कि इससे कैंसर भी हो सकता है। बाहर के तकरीबन हर खाने के उत्पाद में पाम तेल पाया जाता है, यही वजह कि आपको सलाह दी जाती है कि आप घर का बना खाना खाएं और बाहर का खाना खाने से बचें। 150 देशों में 3 बिलियन लोग पाम तेल से बने उत्पाद का इस्तेमाल करते हैं। एक आदमी औसत रूप से एक वर्ष में 8 किलोग्राम पाम तेल का इस्तेमाल करता है।

पाम तेल से कैंसर, कॉलेस्ट्रॉल का खतरा
पाम तेल में सैच्युरेटेड फैटी एसिड और फॉर्मेटिक एसिड अधिक मात्रा में पाया जाता है। यह दोनों ही एसिड काफी हानिकारक होते हैं, यह आपके ब्लड का कॉलेस्ट्राल बढ़ाने का काम करते हैं, दिल की बीमारी का खतरा बढ़ाते हैं। सिंगापुर में पाम तेल से लोगों की स्वास्थ्य इतना बिगड़ा कि सरकार को इसकी जगह सोयाबीन तेल का इस्तेमाल करने की लोगों को सलाह दी। विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट का कहना है कि मलेशिया में पाम तेल के इस्तेमाल की कमी से 15 फीसदी दिल की बीमारी के मरीजों की संख्या कम हुई।

पाम तेल से ट्यूमर का खतरा
यूरोपियन फूड सिक्योरिटी असोसिएश का कहना है कि जब इस तेल को गर्म करके इस्तेमाल किया जाता है तो पाम तेल से कैंसर हो सकता है। पाम तेल को गर्म करने से ग्लासिडाइल फैटी एसिड (GE) का निर्माण होता है। इसका इस्तेमाल करने से लोगों के शरीर में ग्लाइसोडोल का निर्माण होता है। ग्लाइसोडोल का प्रयोग जब चूहों और बिल्लियों पर किया गया तो उनके भीतर ट्यूमर पाया गया।

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