Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

पाकिस्तान की युवती, जिसके अंदर धड़कता है भारतीय दिल! इंडिया वापस आने का वादा करके गई कराची

पाकिस्तान की युवती आयाशा जो फैशन डिजाइनर का सपना संजोए हुए है, लेकिन उस वक्त उसकी दुनिया ही हिल गई जब पता चला कि पाकिस्तान उसका बेहतर इलाज नहीं हो सकता। आयशा पहली जब भारत आई थी तो उसकी उम्र 12 वर्ष थी। सात साल उसे एक भार फिर भारत का रुख करना पड़ा। लेकिन अब आयशा की एक बड़ी टेंशन दूर हुई है, जिसके लिए उसने भारत सरकार और यहां के डॉक्टरों को धन्यवाद दिया है।

अविभाजित भारत यानी हिंदुस्तान का दूसरा हिस्सा पाकिस्तान आजादी के सात दशक बाद भी कई मायनों में पिछड़ा है। हालांकि ये देश आतंकियों को पनाह देने, उन्हें आतंक फैलाने के लिए ट्रेनिंग, गोला बारूद देने में सबसे आगे है। ये बात यूं ही नहीं कही जा रही, इसके पीछे आए दिन हमारे सामने एक ना एक तथ्य सामने आते हैं। हाल में आयाशा का पाकिस्तान में इलाज ना हो पाना और इसके लिए उसे भारत आना इसका एक हालिया उदाहरण है।

Pakistan girl Ayesha Heart Transplant

दरअसल, 19 वर्षीय आयशा जब 12 वर्ष की थी तभी उसे एक ऐसी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या हुई, जिससे पूरा परिवार सदमे में आ गया। आयशा को कार्डियक अरेस्ट आने के बाद परिजानों ने इलाज के लिए पैसे और पाकिस्तान में हृदय चिकित्सा के अभाव के चलते 2019 में भारत की यात्रा की। आयशा चेन्नई पहुंची जहां, उनका उचित इलाज किया गया। लेकिन समस्या समाप्त नहीं हुई और वर्ष 2023 में आयशा को लेकर उनके परिजन फिर चेन्नई पहुंचे।

इस बार यहां डॉक्टरों ने आयशा को हार्ट ट्रांसप्लान्ट का सुझाव दिया। लेकिन उनके पास इतने पैसे नहीं थे के वे कोई बड़े खर्चे वाला इलाज करवा पाएं। ऐसे में चेन्नई में एमजीएम हेल्थकेयर में हार्ट ट्रांसप्लांट विभाग प्रमुख डॉ. केआर बालाकृष्णन आगे आए और उन्होंने आयशा के लिए मदद की पेशकस की। उन्होंने चेन्नई स्थित हेल्थकेयर ट्रस्ट, ऐश्वर्याम के सहयोग से इलाज की व्यवस्था हुई।

जिसके बाद 31 जनवरी, 2024 को एक हृदय को हवाई मार्ग से दिल्ली से चेन्नई लाया गया और आयशा की जीवनरक्षक प्रत्यारोपण सर्जरी (Life Saving Transplant Surgery) की गई।

इंस्टीट्यूट ऑफ हार्ट एंड लंग ट्रांसप्लांट एंड मैकेनिकल सर्कुलेटरी सपोर्ट के अध्यक्ष डॉ. केआर बालाकृष्णन ने आयशा की सर्जरी सफल होने के बाद कहा, "यह बच्ची पहली बार 2019 में हमारे पास आई थी। उसके दिल ने काम करना लगभग बंद कर दिया था। बाद हमें सीपीआर करना पड़ा और एक कृत्रिम हृदय पंप लगाना पड़ा था, ठीक होने पर वो पाकिस्तान वापस चली गई, फिर वह फिर से बीमार हो गई, और उसे बार- बार अस्पताल ले जाना पड़ा।"

डॉ. केआर बालाकृष्णन ने कहा, कि पाकिस्तान में हार्ट सर्जरी आसान नहीं है, क्योंकि आवश्यक उपकरण की उपलब्धता सुनिश्चित नहीं है। इसके अलावा दूसरा कारण आयशा के पास पैसे का अभाव होना भी था। डॉक्टर ने बताया कि आयशा के साथ उनकी सिर्फ मां थी, जिसकी आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी। ऐसे में ऐश्वर्याम ट्रस्ट के अलावा कुछ अन्य लोग उनकी मदद के लिए आगे आए।

वहीं इंस्टीट्यूट ऑफ हार्ट एंड लंग ट्रांसप्लांट एंड मैकेनिकल सर्कुलेटरी सपोर्ट के सह-निदेशक डॉ. सुरेश राव ने कहा, " आयशा पाकिस्तान से हैं और उनके पास कोई संसाधन नहीं था। जब उन्होंने संपर्क किया, तो डॉ. बाला इतने उदार थे कि उन्होंने उन्हें यहां आने के लिए कहा। डॉ. बाला ने ही आयशा के इलाज के लिए पैसे जुटाए, क्योंकि मरीज के परिजनों के पास पैसा नहीं था।"

मैं खुश हूं कि बेटी के अंदर भारतीय दिल धड़क रहा: आयशा की मां
भारत में इलाज होने के बाद आयाशा ने डॉक्टर और भारत सरकार को धन्यवाद कहा। उन्होंने दोबारा भारत लौटने की इच्छा जताई और कहा, "मैं बहुत खुश हूं कि मेरा ट्रांसप्लांट हो गया है। मैं भारत सरकार को धन्यवाद देती हूं। मैं एक बार फिर भारत आऊंगी। डॉक्टरों को मैं दिल से धन्यवाद देती हूं।" वहीं आयशा की मां सनोबर ने बेटी के ट्रांसप्लांट पर खुशी जताई। उन्होंने कहा, "...जब मेरी बिटिया 15 साल की थी, जब उसे अरेस्ट आया था। उसकी कार्डियो एम्पथी की सर्जरी हुई। बाद में डॉक्टरों ने कहा कि आयशा ट्रांसप्लांट के बाद ही जिंदा रह सकती हैं। मैं खुश हूं कि एक पाकिस्तानी लड़की के अंदर एक भारतीय दिल धड़क रहा है।"

More From
Prev
Next
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+