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पाकिस्तान की जिहाद यूनिवर्सिटी जहां पढ़ने वाले बनते हैं तालिबान के बड़े कमांडर, इमरान सरकार करती है मदद

इस्लामाबाद। किसी शैक्षणिक संस्थान की पहचान वहां से पढ़कर निकलने वाले छात्रों से होती है। कोई संस्थान इस बात से बड़ा बनता है कि वहां से पढ़ने वाले छात्रों ने समाज, सरकार या फिर निजी तौर पर क्या उपलब्धियां अर्जित की हैं लेकिन पाकिस्तान का एक शैक्षणिक संस्थान ऐसा है जिसकी पहचान आतंकवादी संगठनों के लिए जिहादी तैयार करने की वजह से है। इस संस्थान से पढ़कर निकलने वाले कई छात्र तालिबान जैसे खूंखार आतंकी संगठनों में कमांडर और सरगना रह चुके हैं। एक खूंखार आतंकी संगठन ने तो अपना नाम ही इस मदरसे के नाम पर रख लिया। ये संस्थान पाकिस्तान का दारुल उलूम हक्कानिया मदरसा है।

पढ़ाई के बाद जिहाद के लिए जाते हैं छात्र

पढ़ाई के बाद जिहाद के लिए जाते हैं छात्र

पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वाह के पेशावर से 60 किमी दूर अकोरा खटक स्थित दारुल उलूम हक्कानिया नेटवर्क से जुड़े लोग तालिबान में अपने नेताओं का नाम गर्व से लेते हैं। इस मदरसे ने एक पूरी लिस्ट तैयार कर रखी है जिसमें ये जानकारी है कि उनके यहां से पढ़कर गया कौन सा छात्र आतंकी संगठन तालिबान में किस पद पर काम कर रहा है। तालिबान की सबसे खूंखार शाखा हक्कानी नेटवर्क का नाम इसी हक्कानिया मदरसे के नाम पर रखा गया है। हक्कानी नेटवर्क के प्रमुख रहे मौलाना जलालुद्दीन हक्कानी जैसे आतंकी इसी मदरसे से तैयार होकर निकले हैं।

इस मदरसे में 4 हजार छात्र पढ़ाई कर रहे हैं जिन्हें जिहादी विचारधारा की ट्रेनिंग दी जाती है। ये मदरसा पूरी तरह आवासीय है। यहां पर पढ़ने वाले छात्र यहीं रहते हैं और उनकी शिक्षा से लेकर रहने, खाने तक सब कुछ मुफ्त है। इनमें अधिकांश पाकिस्तानी और अफगान से भागकर आए शरणार्थी हैं। हालांकि कुछ छात्र दूसरे देशों के भी यहां आते हैं लेकिन उनकी संख्या ज्यादा नहीं है। पढ़ाई के बाद यहां छात्रों को जिहाद के लिए लड़ने अफगानिस्तान में भेजा जाता है।

तालिबान की स्थापना में ये मदरसा अहम

तालिबान की स्थापना में ये मदरसा अहम

हक्कानिया मदरसे के प्रमुख रहे समी-उल हक खुद को गर्व से तालिबान के संस्थापक और प्रमुख मुल्ला उमर का गुरु बताते थे। तालिबान के जनक नाम से पूरी दुनिया में जाने गए समी-उल-हक बताते थे कि कैसे वो मुल्ला उमर को सलाह दिया करते थे। यही नहीं उन्होंने हजारों छात्रों को तालिबान की तरफ से जिहाद के लिए लड़ने अफगानिस्तान में भेजा था। ये 1990 का दशक था जब तालिबान अफगानिस्तान में सोवियत सेनाओं के खिलाफ लड़ रहा था। इसे उस समय अमेरिका की खुफिया एजेंसियां तालिबान का समर्थन कर रही थीं।

इस मदरसे से निकलने वाले सिर्फ अफगानिस्तान ही नहीं बल्कि पाकिस्तान में भी कई आतंकवादी घटनाओं में शामिल रहे हैं। पाकिस्तान की पूर्व प्रधानमंत्री की हत्या में भी इस मदरसे का नाम सामने आया था। बेनजीर की हत्या के समय आत्मघाती हमलावर भी इसी मदरसे का छात्र रह चुका था। इस मदरसे के बारे में कहा जाता है कि यहां से पढ़ने वालों को तालिबान में बड़ा पद मिलता है। इसके कई पूर्व छात्र वर्तमान में तालिबान और अमेरिका के बीच चल रही शांति वार्ता में बातचीत कर रहे हैं।

पूरी दुनिया कहती है आतंक की फैक्ट्री

पूरी दुनिया कहती है आतंक की फैक्ट्री

इस मदरसे को पाकिस्तान की जिहाद यूनिवर्सिटी कहा जाता है जहां से पढ़कर चरमपंथी निकलते हैं। पूरी दुनिया इसे आतंक की फैक्ट्री भले कहती हो लेकिन यहां से जुड़े लोग इसे गर्व के रूप में देखते हैं। यहां के शिक्षक गर्व से बताते हैं कि कैसे उनके छात्रों ने सोवियत यूनियन को तोड़ने में अहम भूमिका निभाई और अब उन्होंने अमेरिका को अफगानिस्तान से भागने पर मजबूर कर दिया है।

अफगानिस्तान सरकार खुलकर इस मदरसे की आलोचना करती रही है। अफगानिस्तान के राष्ट्रपति के प्रवक्ता देश में फैल रही हिंसा के लिए हक्कानिया जैसे मदरसों को जिम्मेदार ठहराते हैं और पाकिस्तान सरकार से इस पर प्रतिबंध लगाने की मांग करते रहे हैं। वहीं आतंकी गतिविधियों में लिप्तता के आरोपों से मदरसे से जुड़े लोग इनकार करते हैं लेकिन विदेशी शक्तियों के खिलाफ लड़ने को सही बताते हैं। अफगानिस्तान के नेताओं का कहना है कि पाकिस्तान सरकार ऐसे मदरसे को मदद करके ये साबित कर रही है कि वो अफगानिस्तान में हिंसा फैलाने का समर्थन करती है।

करोड़ों की मदद दे चुकी इमरान की पार्टी वाली सरकार

करोड़ों की मदद दे चुकी इमरान की पार्टी वाली सरकार

अफगान सरकार के आरोपों ऐसे ही बेबुनियाद नहीं है। इस मदरसे को पाकिस्तान के सत्ता प्रतिष्ठान से जमकर मदद मिलती रही है। इनमें पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी "पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ" सबसे आगे है। खैबर पख्तूनख्वाह में सत्ताधारी पीटीआई की सरकार अब तक करोड़ों की मदद इस मदरसे को दे चुकी है। 2018 में इस मदरसे को 27.70 करोड़ पाकिस्तानी रुपये की मदद की थी। इसके पहले इसी पार्टी की सरकार ने 30 करोड़ रुपये की मदद इस मदरसे को दी थी। पीटीआई का कहना है कि वह इस मदरसे और यहां पढ़ने वालों को मुख्यधारा में लाने के लिए ये बजट दे रही है। हालांकि अभी तक इस पर कोई असर नहीं पड़ा है।

चूंकि अब आतंकवाद का जिन्न पाकिस्तान में भी तबाही मचा रहा है तो पाकिस्तान इस्टैबलिशमेंट के लिए भी ये चिंता का विषय है। पाकिस्तान में ऐसे मदरसे पाकिस्तानी सेना के लिए भी परेशान करने वाली स्थिति उत्पन्न करते रहे हैं।


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