Pak Outside FATF पर भारत बोला, ग्रे लिस्ट में न रहने पर आतंकी हमले बढ़ने की आशंका !

Pak Outside FATF पर भारत ने कहा है कि पड़ोसी देश पाकिस्तान के ग्रे लिस्ट में न रहने पर आतंकी हमले बढ़ने की आशंका है। pak outside fatf grey list attacks may increase intelligence bureau

Pak Outside FATF पर भारत के खुफिया विभाग ने चिंता जाहिर की है। भारत ने कहा, पाकिस्तान के ग्रे लिस्ट में न रहने पर देश में आतंकी हमले बढ़ने की आशंका है। भारतीय खुफिया अधिकारियों ने शुक्रवार को यूएन काउंटर-टेररिज्म कमेटी (CTC) को बताया कि पाकिस्तान जब 2018 में फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) की "ग्रे लिस्ट" में शामिल हुआ तो भारत में "कठिन लक्ष्यों" पर हमले कम हुए। नतीजतन पाकिस्तानी सरजमीं पर आतंकवादी ठिकानों में 75% गिरावट दर्ज की गई।

Pak Outside FATF

आतंकियों का निशाना बने इजरायल के नागरिक

भारत के खुफिया विभाग के अधिकारियों ने 2008 के मुंबई हमलों में पाकिस्तान स्थित लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) की भूमिबका को CTC के सामने उजागर किया। लश्कर-ए-तैयबा के शीर्ष संचालक साजिद मीर की एक ऑडियो क्लिप भी CTC को सुनाई गई। खबरों के मुताबिक ऑडियो क्लिप में साजिद मीर को हमलावरों को निर्देश देते हुए सुना गया। बता दें कि यहूदी आउटरीच केंद्र- चबाड हाउस पर हुए आतंकी हमले में कई इजरायली नागरिक मारे गए थे।

14 साल पहले मुंबई में आतंकी हमले

खुफिया विभाग के अधिकारियों ने यूएन सीटीसी के सदस्यों को ताज महल पैलेस होटल में आयोजित अनौपचारिक सत्र के दौरान जानकारी दी। बता दें कि नवंबर 2008 में लश्कर-ए-तैयबा के आतंकियों ने भारत की आर्थिक राजधानी मुंबई में कई ठिकानों पर हमले किए थे। लश्कर क मुख्य लक्ष्यों में से एक मुंबई का होटल ताज भी था। इसके अलावा ट्राइडेंट होटल पर भी हमला हुआ था। छत्रपति शिवाजी टर्मिनस को भी निशाना बनाया गया था।

यूएन CTC के सामने साजिद मीर का मुद्दा

एफएटीएफ की पूर्ण बैठक से ठीक पहले, लश्कर के टॉप ऑपरेटर मीर को पाकिस्तानी अधिकारियों ने गिरफ्तार कर लिया था। उसे इस साल की शुरुआत में आतंकी वित्तपोषण का दोषी ठहराया गया था। पाकिस्तान ने मीर के मर जाने का दावा किया है, लेकिन कई वर्षों बाद दो भारतीय खुफिया अधिकारियों में एक ने ब्रीफिंग के दौरान यूएन CTC के सामने साजिद मीर के मुद्दे को उजागर किया। बता दें कि आतंकवाद के वित्तपोषण पर नजर रखने वाले संगठन- FATF ने चार साल से अधिक समय के बाद पाकिस्तान को ग्रे सूची से पिछले सप्ताह बाहर करने का फैसला लिया।

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करीब 4 साल में घटी आतंकी गतिविधियां

सीटीसी के समक्ष प्रस्तुति में, वरिष्ठ खुफिया ब्यूरो अधिकारी सफी रिज़वी ने पाकिस्तान का नाम लिए बिना कहा, परेशानी खड़ा करने वाले क्षेत्र को एफएटीएफ ग्रे लिस्ट में रखना (grey-listing of a troublesome jurisdiction) और जैश-ए-मोहम्मद समेत नौ भारत केंद्रित आतंकवादी संगठनों पर संयुक्त राष्ट्र की ओर से चिह्नित किए जाने के बाद कश्मीर में हार्ड टारगेट पर आतंकी हमलों में कमी आई। खुफिया विभाग के मुताबिक FAFT और UN की कार्रवाई के कारण सीमा पार आतंकी ठिकानों में कमी आई, आतंकी मकसद के लिए खुलेआम धन जुटाने में कमी के अलावा 2018 से 2021 मध्य की अवधि में खुली आतंकी गतिविधियों में गिरावट आई जिससे पाकिस्तान के एफएटीएफ ग्रे लिस्ट में होने का प्रभाव समझा जा सकता है। बता दें कि संयुक्त राष्ट्र ने 2001 में जैश-ए-मोहम्मद और 2005 में लश्कर-ए-तैयबा को आतंकी संगठन के रूप में चिह्नित किया था।

UN और FATF की कार्रवाई के अलावा भारत की स्ट्राइक

यूएन सीटीसी के समक्ष भारत के खुफिया विभाग ने विशेष रूप से पाकिस्तान की एफएटीएफ सूची का उल्लेख कर कहा कि इसके कारण भारत को "सापेक्ष शांति की खिड़की" (window of relative peace) मिली। आईबी ऑफिसर रिज़वी ने कहा, एफएटीएफ पिछले 10 वर्षों में, यूएन से चिह्नित आतंकी समूहों पर कार्रवाई के लिए बहुत ही प्रभावी उपकरण रहा है। उन्होंने बताया कि खुफिया विभाग के नेतृत्व वाले आतंकवाद-रोधी अभियान भी चलाए गए। इनमें 2019 के पुलवामा हमले के बाद बालाकोट हवाई हमले और कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटाना शामिल है। ऐसे एक्शन की मदद से पाकिस्तान में आतंकी ढांचे को एक मुश्किल क्षेत्र में धकेला गया। खुफिया विभाग ने कहा, कार्रवाई के श्रेय में FATF ग्रे लिस्टिंग का बड़ा हिस्सा है।

FATF के एक्शन का असर, आतंकी ठिकानों में 75% कमी

उन्होंने कहा, 2018 के मध्य में, सीमा पार 600 आतंकी ठिकाने थे। FATF ग्रे लिस्टिंग के दौरान आतंकी ठिकानों में 75% कमी आई। ये सबसे महत्वपूर्ण सफलता है। इसके कारण आतंकवाद विरोधी समुदाय को इस बात पर गहराई से विचार करना चाहिए कि आतंकी संगठनों को चिह्नित करना कितना प्रभावी हैं।

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आतंकी ठिकानों में 50% की वृद्धि हुई

इंटेलिजेंस अधिकारियों ने चिंता व्यक्त की और कहा, पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट से हटाने से पहले ही भारत में आतंकवादी गतिविधियों में वृद्धि हुई है। रिज़वी ने कहा, जिस क्षण वार्ता शुरू हुई और ये बात सामने आई कि पाकिस्तान की ग्रे लिस्टिंग समाप्त होने वाली है, चीजें वापस हाथ से फिसलने लगीं। आतंकी ठिकानों में 50% की वृद्धि हुई है। कश्मीर समेत अन्य कठिन लक्ष्यों पर और अधिक हमलों की आशंका बढ़ गई है। परेशानी बहुत अधिक बढ़ने के आसार हैं। हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक हार्ड टारगेट से IB अधिकारियों का मतलब कश्मीर में अच्छी तरह संरक्षित सरकारी प्रतिष्ठान और सैन्य शिविरों से था।

भारत को अशांत करने की ट्रेनिंग पाक में मिली

यूएन सीटीसी और खुफिया विभाग के अधिकारियों की बातचीत से पहले, आतंकवाद पर एक प्रस्तुति में, गृह मंत्रालय में संयुक्त सचिव, पंकज ठाकुर ने कहा कि मुंबई में आतंकी हमला करने वाले दहशतगर्दों को जून-अगस्त 2008 में मुजफ्फराबाद में प्रशिक्षित किया गया था। उन्हें लश्कर प्रमुख हाफिज सईद और ऑपरेशन कमांडर जकीउर रहमान लखवी ने आतंकी कृत्य करने के लिए उकसाया था।

आईएसआई अधिकारी प्रमुख साजिशकर्ता

हमलावरों को दो महीने तक लाहौर के पास मुरीदके (Muridke) में बंधक बनाने की ट्रेनिंग दी गई थी। सितंबर 2008 में, उन्होंने जीपीएस-आधारित नेविगेशन सहित समुद्री प्रशिक्षण भी प्राप्त किया। जब उन्होंने मुंबई में घुसपैठ की, तो हमलावर वीओआईपी (VoIP) फोन के जरिए लश्कर-ए-तैयबा के अपने आकाओं के लगातार संपर्क में रहे। प्रमुख साजिशकर्ताओं में एक आईएसआई अधिकारी की पहचान मेजर इकबाल के रूप में हुई।

लश्कर ऑपरेटर को बैन करने का प्रस्ताव

पंकज ठाकुर ने यूएन सीटीसी के अधिकारियों को लश्कर-ए-तैयबा के ऑपरेटिव साजिद मीर का ऑडियो सुनाया। इसमें मुंबई में ठिकानों पर हमले के संबंध में चबाड हाउस में मौजूद आतंकवादियों को निर्देश देते हुए सुना जा सकता है। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में मीर को प्रतिबंधित करने का प्रस्ताव अभी भी लंबित है।

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