नरेंद्र मोदी के हर अंदाज पर बाज की नजर रखे है पाक

मोदी लाएंगे बदलाव
एग्जिट पोल के नतीजों पर जहां पाक में खासतौर पर चर्चा हुई तो वहीं अब चुनावी नतीजों को लेकर भी खासी चर्चाएं जारी हैं। पाकिस्तान नरेंद्र मोदी की सितंबर 2013 में हुई पहली रैली से ही लगातार उनसे जुड़ी हर खबर पर नजर रखता आ रहा है।
पाकिस्तान की मीडिया के मुताबिक अगर नरेंद्र मोदी भारत के प्रधानमंत्री बनते हैं तो फिर यह देखना काफी दिलचस्प होगा कि पाक प्रधानमंत्री नवाज शरीफ किस तरह से भारत के नए प्रधानमंत्री पर अपनी प्रतिक्रिया देते हैं।
मशहूर पाकिस्तानी अखबार द ट्रिब्यून के एक ब्लॉग के मुताबिक जब भारत में एक चाय बेचने वाला प्रधानमंत्री बनेगा तो न सिर्फ वहां की राजनीतिक परिस्थितियों बल्कि पाक में भी परिवर्तन आ सकता है।
पाक विशेषज्ञों के मुताबिक इस बात से भी इंकार नहीं किया जा सकता कि नरेंद्र मोदी दक्षिण एशिया के साथ ही दुनिया की राजनीति में बड़ा परिवर्तन वाले नेता साबित होंगे।
मोदी का व्यक्तित्व डालेगा पाक पर असर
पाकिस्तान नरेंद्र मोदी के हर वक्तव्य और उनके हर इशारे पर नजर रख रहा है। द ट्रिब्यून के मुताबिक नरेंद्र मोदी एक बुद्धिमान राजनेता हैं जिनके पास अपने विरोधियों का सही समय पर जवाब देने की अद्भुत क्षमता है।
आरएसएस के साथ जुड़ने के साथ जिस तरह से वह एक लोकप्रिय नेता के तौर पर सामने आएं, वह वाकई लोगों के सामने एक मिसाल हैं। नरेंद्र मोदी ही वह व्यक्ति थे जिन्होंने 80 के दशक के नामी नेताओं जैसे शंकर सिंह वाघेला और केशुभाई पटेल को किनारे कर दिया था।
नवाज शरीफ को पाकिस्तान का एक मुखर व्यक्तित्व वाला नेता माना जाता है। नरेंद्र मोदी जहां भी जाते हैं वर्ष 2002 का इतिहास उनके पीछे होता है।
ट्रिब्यून के मुताबिक मोदी को दंगों के दौरान अहमदाबाद की गुलबर्ग सोसायटी में हुए नरसंहार का भी दोषी लोग मानते हैं। मोदी के खिलाफ अदालतों में कई तरह की इनवेस्टिगेशन जारी हैं। इसके बाद भी किसी को भी उनके खिलाफ कोई सुबूत नहीं मिल सका है।
द ट्रिब्यून के मुताबिक नरेंद्र मोदी की छवि एक हिंदुवादी नेता की है, अगर मोदी अपनी इस छवि को हटाते हैं और मुसलमानों की संवेदनाओं को समझने की कोशिश करते हैं तो शायद पाकिस्तान उनके साथ सामंजस्य बिठा सके।
नवाज शरीफ और नरेंद्र मोदी
अखबार के मुताबिक जिस समय देश में बीजेपी की सरकार थी और अटल बिहारी वाजपेई देश के प्रधानमंत्री थे, उस समय भी नवाज शरीफ बतौर पाक प्रधानमंत्री अपने कार्यकाल के दौर में थे। वाजपेई के दौर में दोनों देशों के
बीच संबंध कुछ बेहतर थे। अगर नरेंद्र मोदी देश के प्रधानमंत्री के तौर पर शपथ लेते हैं तो यह देखना और भी दिलचस्प हो जाएगा कि पाकिस्तान के बहुत ही परिपक्व और शांत दिमाग वाले प्रधानमंत्री नवाज शरीफ भारत के स्वतंत्र विचारों वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ किस तरह से बातवीत को आगे बढ़ाते हैं। दोनों के बीच की प्रतिद्वंदिता भी खासी रोचक होगी।














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