'चिंता मत करो, मजबूत रहो', पहलगाम में आतंकियों का शिकार बने बेंगलुरु इंजीनियर के ये थे अंतिम शब्द
Pahalgam Terror Attack: जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग जिले के पहलगाम में मंगलवार, 22 अप्रैल को आतंकवादियों ने जिस तरह दर्दनाक तरीके से पर्यटकों को अपना निशाना बनाया उससे हर किसी का खून खौल रहा है। इस हमले में अब तक 25 से अधिक पर्यटकों के मारे जाने और 20 से ज्यादा लोगों के घायल होने की खबर है। इसकी जिम्मेदारी लश्कर-ए-तैयबा के द रेजिस्टेंस फ्रंट 'TRF' ने ली।
पहलगाम में हुए आतंकी हमले में बेंगलुरु निवासी टेक्निशियन भरत भूषण की निर्मम हत्या कर दी गई। इस हमले में उनकी पत्नी डॉक्टर सुजाता और तीन वर्षीय बेटा भी मौजूद थे।

Pahalgam Attack: तीन साल के बच्चे के सामने पिता की हत्या
निर्मम दहशतगर्दों नें सुजाता के सामने ही उनके पति को गोली मार दी जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। इस दौरान सुजाता के साथ उनका तीन साल का मासूम बेटा भी था मौत को सामने देख कर उन्होंने आतंकियों के सामने गिड़गिड़ाने लगी और कहा कि, 'प्लीज मेरे बेटे को मत मारों..वो बहुत छोटा है।'
भरत भूषण, जो एक डायग्नोस्टिक टेक्नीशियन थे, 18 अप्रैल को अपनी पत्नी डॉक्टर सुजाता (जनरल फिजिशियन) और बेटे के साथ श्रीनगर पहुंचे थे। 22 अप्रैल को वे बाइसारन घास के मैदानों की सैर पर थे, जब यह आतंकी हमला हुआ। उनकी पत्नी डॉ. सुजाता ने न्यूज 18 से बातचीत में बताया कि वे एक टेंट के पास कश्मीरी पारंपरिक पोशाक देख रही थीं, तभी एक आतंकी वहां आया और गोलीबारी शुरू कर दी।
आतंकी ने कहा, "तुम यहां कैसे खुश हो सकते हो जब हमारे बच्चे मारे जा रहे हैं? क्या तुम खबरें नहीं पढ़ते?" इसके बाद उसने एक और पर्यटक को गोली मारी और फिर भरत भूषण की ओर बंदूक तानी। जब भरत ने अपना नाम बताया - "मेरा नाम भरत है" - तो आतंकी ने उन्हें पास से तीन गोलियां सिर में मारीं। डॉ. सुजाता के अनुसार, भरत के आखिरी शब्द थे - "डरना मत, हिम्मत रखो।"
डॉ. सुजाता ने बताया, "मैंने उनके गिरते ही उनका वॉलेट उठाया, फोन और बैग लेकर बेटे के साथ वहां से भागी। मुझे पता था कि सिर में गोली लगने के बाद वो नहीं बचेंगे। रास्ते में कई शव पड़े थे। मैंने एक घोड़ा पकड़ा और बेटे को लेकर उस पर चढ़ गई। इसके बाद CRPF ने हमारी मदद की।"
Pahalgam Terror Attack: गुरुवार को किया अंतिम संस्कार
भरत भूषण का पार्थिव शरीर विशेष विमान से बेंगलुरु लाया गया, जो गुरुवार तड़के करीब 3:45 बजे पहुंचा। इसके बाद उन्हें पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। डॉ. सुजाता ने बताया कि हमले के बाद जब वे सुरक्षा घेरे में श्रीनगर की ओर जा रही थीं, तो उन्हें अपने बेटे को हर पल सांत्वना देनी पड़ी, जो इस पूरी त्रासदी का गवाह बना।
भरत की सास ने भी मीडिया से बात करते हुए बताया कि आतंकियों ने पहले यह पूछा कि क्या आप हिंदू हैं, और पुष्टि होने पर पुरुषों को गोली मार दी। उन्होंने कहा कि उन आतंकियों ने महिलाओं और बच्चों को नहीं मारा, लेकिन पुरुषों को सिर में गोली मारी और तब तक मारते रहे जब तक वो गिर न जाएं।












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