खुफिया एजेंसियों ने पहले ही किया था अलर्ट, पहले से थे उनके पास इनपुट, फिर कैसे हो गया पहलगाम में ये हमला?
Pahalgam Attack: जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में मंगलवार (22 अप्रैल) को आतंकवादियों ने पर्यटकों पर बंदूक से हमला किया। हमले में 26 पर्यटकों की मौत हुई है। आतंकियों ने लोगों को उनका धर्म पूछकर गोली मारी है। पीएम मोदी इसे आतंकवादी हमला बताया है और कहा है कि हमले के जिम्मदारों को बख्शा नहीं जाएगा। ऐसे में खबर आ रही है कि खुफिया एजेंसियों के पास पहले से जम्मू-कश्मीर में किसी बड़े हमले के इनपुट थे। उनको इस बात की आशंकाएं थी कि घाटी में कुछ बड़ा होने वाला है।
10 मार्च 2025 को केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन ने जम्मू में एक हाई लेवल सुरक्षा समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। एक महीने से भी कम समय बाद 6 अप्रैल 2025 को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने श्रीनगर में बड़े बैठक की अध्यक्षता की। जम्मू-कश्मीर के दो क्षेत्रों में लगातार बैठकें खुफिया एजेंसियों की चेतावनी के बीच हुईं थी। खुफिया एजेंसियों ने अलर्ट किया था कि पाकिस्तान "जम्मू-कश्मीर में भीषण गर्मी" की तैयारी कर रहा है। "जम्मू-कश्मीर में भीषण गर्मी" से मतलब किसी हमले की तैयारी है। ऐसे में जब पहलगाम में पर्यटकों की चीखें गूंजी तो एजेंसियों की सबसे बड़ी आशंका सच साबित हुई।

जम्मू-कश्मीर में 70 विदेशी आतंकवादी फिलहाल हैं एक्टिव
शुरुआती जांच से पता चलता है कि कम से कम चार आतंकवादियों ने पहलगाम हमले को अंजाम दिया है। उनमें से तीन विदेशी आतंकवादी हो सकते हैं। खुफिया एजेंसी के अधिकारियों ने कहा कि स्थानीय आतंकवादी गाइड के रूप में काम कर सकता है।
केंद्रीय बलों द्वारा रखे गए आंकड़ों के मुताबिक जम्मू-कश्मीर में फिलहाल 70 विदेशी आतंकवादी एक्टिव हैं। डीजीपी नलिन प्रभात द्वारा मार्च में हीरानगर में एक ऑपरेशन का नेतृत्व करने के बाद अंतरराष्ट्रीय सीमा पर हाल ही में घुसपैठ की कोशिशों को विफल कर दिया गया था।
लेकिन एजेंसियों को शक है कि कई विदेशी आतंकवादी अपने आकाओं से सही आदेश पाने के लिए घुसपैठ के बाद छिपे हुए हो सकते हैं।
एक सूत्र ने कहा, "बर्फ पिघलने के साथ, पहाड़ी रास्ते खुल गए हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि पहलगाम में आतंकवादी पर्यटकों पर हमला करने के लिए बैसरन के मैदानों तक पहुंचने के लिए पहाड़ियों से नीचे उतरे। आतंकवादियों को भागने से रोकने के लिए घेराबंदी और तलाशी अभियान शुरू किया गया है। एनआईए की टीम मौके पर जाने के लिए तैयार है। एनआईए उन ओवरग्राउंड वर्करों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर सकती है, जिन्होंने संभवत विदेशी आतंकवादियों की मदद की थी।''
रेजिस्टेंस फ्रंट ने ली पहलगाम हमले की जिम्मेदारी
रेजिस्टेंस फ्रंट ने पहलगाम में हुए हमले की जिम्मेदारी ली है, जिसमें 26 लोग मारे गए और कई अन्य घायल हो गए। एजेंसियों का मानना है कि टीआरएफ लश्कर-ए-तैयबा का मुखौटा है।
घटनास्थल पर एम4 गोलियां मिली हैं। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबित आतंकियों ने एके-47 और अन्य सैन्य-ग्रेड स्वचालित हथियारों का इस्तेमाल किया गया था।
कई जीवित बचे लोगों ने कहा कि उनके प्रियजनों को दूर से गोली मारी गई। एजेंसियां इस बात की जांच कर रही हैं कि क्या आतंकवादियों को स्नाइपर जैसी ट्रेनिंग दी गई थी।
पहलगाम हमले ने स्थानीय लोगों को वर्ष 2000 की याद दिला दी है, जब बिल क्लिंटन की यात्रा के दौरान दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग के चतसिंगपोरा में 34 सिखों की पहचान की गई थी और उन्हें मार दिया गया था। पहलगाम हमला ऐसे समय हुआ है जब अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस भारत दौरे पर हैं।
हालांकि, खुफिया एजेंसियां पहलगाम हमले को अमरनाथ यात्रा को पटरी से उतारने के उपाय के तौर पर खारिज नहीं कर रही हैं। चंदनवाड़ी मार्ग से यात्रा पहलगाम से होकर जाती है। इससे पहले आतंकियों ने सोनमर्ग सुरंग को निशाना बनाया था, जो बालटाल मार्ग पर पड़ती है।












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