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'ऑपरेशन ब्लू स्टार' गलती थी, इंदिरा गांधी को जान देकर कीमत चुकानी पड़ी', ये बयान देकर बुरे फंसे पी चिदंबरम

पंजाब के अमृतसर में 50 साल पहले कांग्रेस शासनकाल में लिया गया फैसले पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम ने ऐसा बयान दिया है, जिससे राजनीति गरमा गई है। ये फैसला ऑपरेशन ब्लू स्‍टार को लेकर था जिसके तहत तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने स्वर्ण मंदिर के अंदर छिपे उग्रवादियों के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की अनुमति दी थी।

दरअसल, पी. चिदंबरम ने 1984 के 'ऑपरेशन ब्लू स्टार' को पंजाब के स्वर्ण मंदिर पर नियंत्रण पाने का "गलत तरीका" बताया है। उन्होंने कहा तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने उस निर्णय की "भारी कीमत" चुकाई थी। पी चिदंबरम के इस बयान के वो बुरी तरह घिर गए है। इस बयान पर जहां कांग्रेसी नाराज हो गए हैं वहीं भाजपा को कांग्रेस को घेरने का बड़ा मौका मिल गया है।

P chidambaram

चिदंबरम बोले-गांधी ने उस गलती के लिए अपनी जान गंवाई

दरअसल, कासोल में एक साहित्यिक कार्यक्रम के दौरान चिदंबरम ने कहा, "किसी भी सैन्य अधिकारी का अनादर नहीं, लेकिन स्वर्ण मंदिर को पुनः प्राप्त करने का वह गलत तरीका था। कुछ साल बाद, हमने इसे पुनः प्राप्त करने का सही तरीका दिखाया - सेना को बाहर रखकर। ब्लू स्टार गलत तरीका था, और मैं मानता हूँ कि गांधी ने उस गलती के लिए अपनी जान गंवाई।"

जून 1984 में अमृतसर के स्वर्ण मंदिर से आतंकवादियों को बाहर निकालने के लिए चलाए गए सेना के अभियान के बारे में बोलते हुए, चिदंबरम ने स्पष्ट किया कि यह निर्णय केवल इंदिरा गांधी का नहीं था। पूर्व वित्त मंत्री ने कहा, "यह सेना, पुलिस, खुफिया और सिविल सेवा का सामूहिक निर्णय था। आप इसका दोष केवल श्रीमती गांधी पर नहीं डाल सकते।"

चिदंबरम के इस बयान से राशिद अल्वी हुए नाराज

चिदंबरम के इस बयान पर कांग्रेसी भड़क उठे हैं, वरिष्ठ कांग्रेस नेता राशिद अल्वी ने कहा, "ऑपरेशन ब्लू स्टार सही था या गलत, यह एक बहस का विषय है। लेकिन 50 साल बाद, पी. चिदंबरम को कांग्रेस को निशाना बनाने की क्या मजबूरी है? यह कहकर कि इंदिरा गांधी ने गलत कदम उठाया, वह वही कर रहे हैं जो भाजपा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करते हैं।"

उन्होंने आगे कहा, "उनके बार-बार के हमलों से कई सवाल खड़े होते हैं। उनके खिलाफ कई आपराधिक मामले अभी भी लंबित हैं, और मुझे आश्चर्य है कि क्या वह किसी दबाव में हैं।" कांग्रेस के एक सूत्र ने भी चिदंबरम की टिप्पणियों की निंदा करते हुए कहा, "एक वरिष्ठ नेता जिसे पार्टी ने सब कुछ दिया है, उसे जिम्मेदारी से बोलना चाहिए। ऐसे बयान जो पार्टी को नुकसान पहुंचाते हैं, सही नहीं हैं।"

भाजपा ने किया पलटवार

केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने चिदंबरम पर तीखा हमला बोलते हुए कहा है कि चिदंबरम कांग्रेस की गलतियों को बहुत देर से मान रहे हैं। रिजिजू ने याद दिलाया कि चिदंबरम ने पहले स्वीकार किया था कि मुंबई आतंकी हमले के बाद भारत, अमेरिका और अन्य विदेशी शक्तियों के दबाव के कारण पाकिस्तान पर जवाबी कार्रवाई नहीं कर सका था। अब उन्होंने ऑपरेशन ब्लू स्टार को भी गलत ठहराया है।

चिदंबरम जी बहुत देर से कांग्रेस की भूलों को मान रहे हैं

वहीं रिजिजू ने X पर लिखा, "चिदंबरम जी बहुत देर से कांग्रेस की भूलों को मान रहे हैं! पहले उन्होंने बताया कि मुंबई में पाकिस्तानी आतंकी हमलों का जवाब भारत अमेरिका और विदेशी शक्तियों के दबाव की वजह से नहीं दे सका। अब उन्होंने माना है कि स्वर्ण मंदिर में ऑपरेशन ब्लू स्टार भी गलत था।"

पवन खेड़ा बोले- हमने पाकिस्तान को FATF की ब्लैक लिस्ट में डलवाया

पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम के बयान पर कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने प्र‍ि‍तिक्रिया देते हुए कहा "26/11 के बाद सरकार ने जो भी कदम उठाए, उसने पाकिस्तान को पूरी दुनिया से अलग कर दिया। हमने पाकिस्तान को FATF (फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स) की ब्लैक लिस्ट में डलवाया...हमने न्याय दिलाया...पहलगाम के बाद उन्हें क्या हासिल हुआ? आसिफ मुनीर ने अमेरिका के साथ लंच किया...हमने उस समय पाकिस्तान को अछूत बना दिया था..."

क्‍या था ऑपरेशन ब्लू स्टार?

ऑपरेशन ब्लू स्टार 1 जून से 8 जून, 1984 तक चला था, जब प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की सरकार ने कट्टरपंथी उपदेशक जरनैल सिंह भिंडरांवाले के नेतृत्व में पंजाब में अलगाववादी विद्रोह को कुचलने का फैसला किया था। यह सैन्य अभियान भिंडरांवाले और उसके अनुयायियों को हटाने के लिए शुरू किया गया था, जिन्होंने अकाल तख्त और स्वर्ण मंदिर परिसर के अन्य हिस्सों में खुद को मजबूत कर लिया था।

इस ऑपरेशन में टैंकों और भारी तोपखाने का इस्तेमाल किया गया, जिसके परिणामस्वरूप सैकड़ों लोगों की मौत हुई, जिनमें आतंकवादी, सैनिक और नागरिक शामिल थे। इस हमले से सिख समुदाय को गहरा आघात पहुंचा, जिससे व्यापक आक्रोश फैल गया। इस ऑपरेशन के बाद के परिणाम तत्काल और गंभीर थे। 31 अक्टूबर, 1984 को, स्वर्ण मंदिर पर हमले के प्रतिशोध में इंदिरा गांधी की उनके सिख अंगरक्षकों द्वारा हत्या कर दी गई, जिससे पूरे भारत में सिख विरोधी दंगे भड़क उठे।

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