संसद में मार्शल लॉ लगाया गया, ऐसा लगा हम पाकिस्तान के बॉर्डर पर हैं: संजय राउत
नई दिल्ली, 2 अगस्त: बुधवार को खत्म हुआ संसद का मानसून सत्र काफी हंगामेदार रहा है। पेगासस और दूसरे मु्द्दों पर हंगामे के चलते काफी कम बहस हुई। बुधवार को संसद में मार्शल भी बुलाए गए थे। इसको लेकर विपक्ष ने केंद्र सरकार को घेरा है। गुरुवार को कांग्रेस सांसद राहुल गांधी की अगुवाई में विपक्ष की करीब 15 पार्टियों ने संसद से विजय चौक तक मार्च निकाला है। इस दौरान शिवसेना के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने कहा कि जिस तरह से मार्शलों ने राज्यसभा को घेरा और विपक्षी नेताओं के साथ बदसलूकी हुई, उससे लगता है कि मार्शल लॉ लग गया है। सदन में ऐसा लगा कि हम पाकिस्तान के बॉर्डर पर खड़े हैं।
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राउत ने कहा, विपक्ष को संसद में अपने विचार रखने का मौका नहीं मिला। महिला सांसदों के खिलाफ कल की घटना लोकतंत्र के खिलाफ थी। ऐसा लगा जैसे हम पाकिस्तान सीमा पर खड़े हैं। हमने कल लोकतंत्र की हत्या होते देखी, राज्यसभा में कल जिस तरह से प्राइवेट लोगों ने मार्शल की ड्रेस में आकर हमारे सांसदों पर हमला करने की कोशिश की। ये मार्शल नहीं थे, संसद में मार्शल लॉ लगाया गया था।
राउत ने कहा कि राज्यसभा में विधेयक पारित करने के दौरान जिस तरह मार्शलों को बुलाया गया, वो पहले नहीं देखा गया। ऐसा लगता है कि सरकार हमें डराना चाहती है लेकिन विपक्ष एकजुट है। आज हम मल्लिकार्जुन खड़गे के साथ बैठक करेंगे और तय करेंगे कि आगे क्या करना है। 20 अगस्त को कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी कांग्रेस शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों से भी बात करेंगी। इस बैठक में महाराष्ट्र के सीएम उद्धव ठाकरे भी शामिल होंगे।
राहुल बोले- सांसदों को पीटा गया
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा कि हमे संसद में बोलने नहीं दिया जा रहा। यह लोकतंत्र की हत्या है सत्र के दौरान देश की 60 फीसदी लोगों की आवाज को कुचला गया और उन्हें अपमानित किया गया। यही नहीं राज्यसभा में सांसदों को चोट पहुंचाई गई है। राज्यसभा में पहली बार सांसदों की पिटाई की गई, बाहर से लोगों को बुलाकर सांसदों से मारपीट की गई। कल महिला सांसदों के साथ जो हुआ वह लोकतंत्र के खिलाफ है।
राहुल ने कहा कि हमने सरकार से पेगासस पर बहस करने के लिए कहा लेकिन सरकार ने पेगासस पर बहस करने से मना कर दिया। हमने संसद के बाहर किसानों का मुद्दा उठाया और हम आज मार्च कर रहे हैं क्योंकि हमें संसद के अंदर नहीं बोलने दिया गया। ऐसे में हमारे पास कोई विकल्प नहीं है।












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