संसद में धक्का-मुक्की की जांच को लेकर समिति गठित करने के पक्ष में नहीं विपक्ष, वेंकैया नायडू को लिखा खत
नई दिल्ली, 10 सितंबर। संसद के मानसून सत्र के दौरान राज्यसभा में विपक्ष के जोरदार हंगामे और सुरक्षाकर्मियों से कथित धक्का-मुक्की का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। इस मामले को लेकर तैयार की जाने वाली जांच समिति का हिस्सा बनने से अब कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने इनकार कर दिया है। इस जांच समिती को राज्यसभा के सभापति एम वेंकैया नायडू 11 अगस्त को सदन में सामान्य बीमा व्यवसाय संशोधन विधेयक के पारित होने के दौरान हुई घटनाओं की जांच के लिए गठित करना चाहते हैं।
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राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने गुरुवार को नायडू को पत्र लिखकर कहा कि ऐसा लगता है कि समिति का गठन सांसदों को चुप कराने के लिए 'डराने' के लिए किया गया है। सूत्रों के मुताबिक कि तृणमूल कांग्रेस, सीपीएम, भाकपा, राजद, शिवसेना, राकांपा और आम आदमी पार्टी सहित सभी प्रमुख विपक्षी दलों ने जांच समिति में हिस्सा नहीं लेने का फैसला किया है। संसद में हुए हंगामे के बाद विपक्षी दलों ने आरोप लगाया था कि सदन में बाहरी सुरक्षाकर्मियों को लाया गया था वो मार्शल नहीं थे, उन्हें विधेयक के पारित होने के दौरान महिला सदस्यों सहित सांसदों को पीटने के लिए ऊपरी सदन में लाया गया था।
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जांच समिति को लेकर कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा, मैंने उनसे (राज्यसभा अध्यक्ष) से अनुरोध किया कि 11 अगस्त को राज्यसभा में हंगामे की जांच के लिए जांच समिति गठित करने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि मामला पहले ही खत्म हो चुका है और सत्र समाप्त हो गया है। एक बार मामला बंद हो जाने के बाद उसे दोबारा नहीं खोलना चाहिए। समिति गठित करना और मामले की जांच करना वांछनीय नहीं है। हम दृढ़ हैं कि अभी इसकी आवश्यकता नहीं है। मैंने इस मामले के बारे में अन्य विपक्षी दलों के नेताओं को भी सूचित किया है। कई लोगों ने समिति के गठन से किया इनकार।












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