OPINION: कृषि क्षेत्र को 24 घंटे बिजली देकर दूसरे राज्यों के लिए नजीर बना तेलंगाना

तेलंगाना देश का एकमात्र ऐसा राज्य है, जहां किसानों को सिंचाई के लिए 24 घंटे बिजली उपलब्ध है। बाकी राज्यों के लिए तेलंगाना आज एक रोल मॉडल बन चुका है। विपक्ष की आलोचनाओं का जवाब निर्बाध बिजली सप्लाई करके दिया जा रहा है। बहुत सारे उथल-पुथल का सामना करने के बाद प्रदेश में कई सारे महत्वपूर्ण फैसले लागू किए गए हैं।

अनेकों समस्याओं का समाधान हुआ है। केसीआर सरकार की कोशिशों के कारण आज पूरे तेलंगाना में लगातार बिजली उपलब्ध है। तेलंगाना में बिजली के क्षेत्र में क्या बदलाव हुआ है उसके लिए 2004 से 2014 और 2014 के बाद अबततक की स्थिति पर नजर डालना होगा।

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तेलंगाना में किसानों को 24 घंटे मुफ्त बिजली
आज यह राज्य देश का पहला ऐसा राज्य है, जहां कृषि क्षेत्र को 24 घंटे बिजली मुहैया कराई जा रही है। बिजली व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए 37,911 करोड़ रुपए खर्च किए गए हैं। आंकड़े बताते हैं कि तेलंगाना में आज 33% बिजली की खपत कृषि क्षेत्र में हो रही है। कृषि क्षेत्र में बिजली का कनेक्शन लाखों में बढ़ा है। सोने पे सुहागा ये कि 2018 से ही तेलंगाना के किसानों को लगातार मुफ्त बिजली मिल रही है। मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव ने 1 जनवरी, 2018 को यह योजना प्रदेश के किसानों के हित को देखते हुए लागू की थी।

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सीएम केसीआर की दूरदृष्टि ने बदली तेलंगाना की तस्वीर
जब तेलंगाना राज्य बना था तो यह बिजली की किल्लत के लिए कुख्यात था। कृषि और उद्योग सभी इसकी मार झेलने को मजबूर थे। कितने ही किसानों की रात के अंधेरे में सांप, बिच्छू और जहरीले कीड़ों के काटने से जान चली गई। सैकड़ों किसानों ने कीटनाशक पीकर अपनी जान दे दी, क्योंकि अपनी आंखों के सामने उनके लिए फसलों को मरते देखना मुमकिन नहीं था। केसीआर ने किसानों की बिजली की समस्या को खुद अनुभव किया था। उन्होंने तय किया कि उनके लिए कुछ तो करना है, चाहे कितनी भी लागत क्यों न आए। उन्हीं का आइडिया है कि किसानों को 24 घंटे बिजली सप्लाई का रास्ता साफ हुआ। आने वाले दिनों की डिमांड को देखते हुए, पुख्ता योजना तैयार करके उसपर अमल किया गया है।

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तकनीकी दिक्कतें सूझबूझ से सुलझायी गईं
राज्य सरकार ने हर खेत तक निर्बाध बिजली सप्लाई के लिए पूरी बिजली व्यवस्था को दुरुस्त किया है। ट्रांसको और डिस्कॉम सिस्टम को बेहतर करने के लिए कुल 37,911 करोड़ रुपए खर्च किए हैं। ट्रांसफॉर्मरों और बिजली कर्मचारियों की संख्या बड़े पैमाने पर बढ़ाई गई है। इसपर बहुत ही ध्यान से अमल किया गया है। सभी जिलों को एक-दूसरे के साथ जोड़ दिया गया है। तकनीकी दिक्कतें भी आईं, लेकिन सबको समय पर और सुचारू तरीके से सुलझाने का काम किया गया।

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33% बिजली की खपत कृषि क्षेत्र में
तेलंगाना की स्थापना के समय राज्य में सौर ऊर्जा से 74 मेगावाट बिजली पैदा की जाती थी, जो बढ़कर 5,117 मेगावाट हो चुकी है। यदाद्रि में 4,000 मेगावाट समेत 8,705 मेगावाट परियोजना पर काम चल रहा है। राज्य सरकार इसके लिए हजारों करोड़ रुपए खर्च कर रही है। राज्य सरकार के अधिकारियों का आकलन है कि प्रदेश में बिजली की जितनी खपत होती है, उनमें से एक-तिहाई यानी 33% खेती के कार्यों के लिए हो रही है।

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कृषि में यासंगी पर सबसे ज्यादा बिजली खर्च हो रही है। तेलंगाना आज जगमगा रहा है। एक दशक पहले का अंधियारा उजाले में तब्दील हुआ है। कृषि और किसानों के कल्याण के लिए जो सोच अपनाई गई है, उसका फल मिला है। यह राज्य देश के लिए एक विकास मॉडल बनकर उभरा है। बदलाव दूर से भी नजर आ रहा है और इससे तेलंगाना राज्य लगातार प्रगति के पथ पर बढ़ता जा रहा है।

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