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Operation Blue Star: 'भिंडरावाले' को प्रणाम करना भज्जी को पड़ा भारी, भड़के लोगों ने लगाई जमकर क्लास

नई दिल्ली, 7 जून। भारत के स्टार स्पिनर कहलाने वाले हरभजन सिंह इस वक्त सोशल मीडिया पर लोगों की नाराजगी का सामना कर रहे हैं, वजह है उनकी एक पोस्ट, जिसके चलते यूजर्स उन्हें ट्रोल कर रहे हैं। दरअसल रविवार को'ऑपरेशन ब्लू स्टार' की 37वीं बरसी थी। इस अवसर पर भज्जी ने इंस्टाग्राम पर स्वर्ण मंदिर के अंदर मारे गए 'जरनैल सिंह भिंडरावाले' को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए नमन किया था, जिसके बाद लोग उन पर भड़क गए और उन्हें ट्रोल करने लगे।

'भिंडरावाले' को प्रणाम करना भज्जी को पड़ा भारी

'भिंडरावाले' को प्रणाम करना भज्जी को पड़ा भारी

बता दें कि भज्जी ने अपनी पोस्ट में लिखा था कि 'सम्मान के साथ जीना धर्म के लिए मरना। 1 जून से छह जून 1984 को सचखंड श्री हरिमंदर साहिब पर शहीद होने वाले सिंह-सिंहनियों की शहादत को कोटि-कोटि प्रणाम।' भज्जी की ये पोस्ट देखते ही लोग बुरी तरह से गुस्सा हो गए और जमकर हरभजन सिंह की खिंचाई करने लगे।

हरभजन सिंह हुए ट्रोल

हरभजन सिंह हुए ट्रोल

हालांकि जबरदस्त ट्रोल होने के बावजूद अभी तक हरभजन सिंह ने इस पर कोई रिएक्शन नहीं दिया है। गौरतलब है कि हरभजन सिंह ने जो पोस्ट शेयर की है, उसमें भिंडरावाला को नीली पगड़ी में दिखाया गया है।

'ऑपरेशन ब्‍लू स्‍टार' की कल 37वीं बरसी थी

'ऑपरेशन ब्‍लू स्‍टार' की कल 37वीं बरसी थी

बता दें कि ऑपरेशन ब्‍लू स्‍टार की कल 37वीं बरसी थी। यही वो दिन है जब गोल्‍डन टेंपल में ऑपरेशन चलाया गया था, जिसे 'ब्‍लू स्‍टार' के नाम से जाना जाता है। तब देश की कमान प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के हाथों में थी और उनके सामने जो शख्‍स चुनौती पेश कर रहा था उसका नाम था 'जरनैल सिंह भिंडरावाला'। हजारों सिख के लिए भिंडरावाला संत था, जिसे बाद में 'आतंकवादी' कहा गया। भिंडरावाला का मकसद था पंजाब को अलग राष्‍ट्र बनाना, जिसे वह 'खालिस्‍तान 'नाम देना चाहता था।

200 आतंकी मारे गए थे

200 आतंकी मारे गए थे

ऑपरेशन ब्‍लू स्‍टार में लगभग 200 आतंकी मारे गए थे, जबकि सेना के 79 जवानों की भी जान चली गई थी। बता दें कि 'ब्लू स्टार' भारतीय इतिहास को वो ऑप्रेशन है, जिसने खत्म होने के बाद देश में नफरत की आग पैदा कर दी थी।

देशभर में सिख विरोधी दंगे शुरू हो गए थे

स्वर्ण मंदिर पर हमले को धर्म पर हमला मान लिया गया था और इस कार्रवाई की कीमत तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को अपनी जान देकर चुकानी पड़ी थी लेकिन नफरत की आग यहीं खत्म नहीं हुई, पूर्व पीएम की हत्या के बाद देशभर में सिख विरोधी दंगे हुए थे जिसमें सिखों की जानमाल का काफी नुकसान हुआ था और कांग्रेस को उसकी बड़ी राजनीतिक कीमत चुकानी पड़ी थी।

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