लॉकडाउन 2.0 में शेष बचे हैं सिर्फ 4 दिन, जानिए क्या भारत अब अपनाएगा हांगकांग मॉडल?
नई दिल्ली। Covid19 वायरस के खिलाफ लड़ाई के लिए भारत में विस्तारित राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन 2.0 आगामी 3 मई को समाप्त हो रही है। जैसे सरकार से संकेत मिल रहे हैं उससे साफ है कि भारत में क्रमबद्ध तरीके से लॉकडाउन को हटा दिया जाएगा।संभव है कि गैर-सक्रिय Covid -19 मामलों वाले जिलों में लोगों के दैनिक जीवन और व्यापार के संचालन पर कम प्रतिबंध होंगे जबकि अन्य जिलों में अधिक प्रतिबंध होंगे।

हालांकि हॉटस्पॉट वाले इलाकों में आगे भी कड़े लॉकडाउन की पूरी संभावना व्यक्त की गई है। भारत में लॉकडाउन हटाने की दिशा में आगे बढ़ने की संभावना को लेकर विशेषज्ञों और आम जनता के बीच गहन बहस हो चुकी है, जिनमें हांगकांग मॉडल समेत कई अन्य मॉडलों पर चर्चा की जा रही है।

हालांकि यह चर्चा केवल भारत तक ही सीमित नहीं है। यूरोप और अमेरिका भी लॉकडाउन से बाहर आने के संभावित तरीकों पर बहस कर रहे हैं। इनमें हांगकांग मॉडल दुनिया भर में विशेष रूप से ध्यान आकर्षित कर रहा है, क्योंकि अप्रैल के मध्य में द लैंसेट में इसकी प्रभावकारिता का विश्लेषण प्रकाशित किया गया था।

गौरतलब है हांगकांग वह पहला देश हैं, जहां सबसे पहले चीन से नोवल कोरोनावायरस का संक्रमण पहुंचा था, जहां गत 23 जनवरी को मामले का पता चला था। गत 2 मार्च को हांगकांग ने अपना 100 वां मामला दर्ज किया और लगभग उसी समय भारत ने नोवल कोरोनोवायरस मामलों की एक नई लहर उठनी शुरू हो गई थी। जाहिर तौर पर जनवरी-अंत में भारत में पहला केरल राज्य में दर्ज हुआ था, जो वुहान से लौटे तीन छात्रों में पाया गया था।

हांगकांग ने 4 मौतों के साथ संक्रमण को 1,038 तक सीमित कर दिया
करीब 75 लाख की आबादी वाले हांगकांग (लगभग बेंगलुरु की आबादी के बराबर और अहमदाबाद, जयपुर या इंदौर की तुलना में थोड़ा अधिक) ने केवल चार मौतों के साथ कोरोनोवायरस संक्रमणों की संख्या को 1,038 तक सीमित कर दिया है और बड़ी बात यह है कि भारत या चीन की तरह हांगकांग ने कभी राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन में नहीं गया बल्कि हांगकांग ने नोवल कोरोनावायरस संक्रमण की गहन निगरानी की नीति अपनाई।

जानिए, कोरोनावायरस से निपटने के लिए क्या है हांगकांग मॉडल?
हांगकांग मॉडल कोरोनोवायरस रोगियों के लक्षित ट्रेसिंग, संपर्कों के प्रभावी आइसोलेशन और जनता द्वारा सावधानीपूर्वक व्यवहार किए जाने वाले सोशल डिस्टेंसिंग का एक संयोजन है। चूंकि लोगों का सहयोग हांगकांग में सर्वोच्च था, जो प्रशासन को व्यवसायों को लगभग सामान्य रूप से चलाने की अनुमति देता था।

हांगकांग में 99 फीसदी लोगों ने सार्वजनिक रूप से मास्क पहने थे
द लांसेट में प्रकाशित अध्ययन में पाया गया कि हांगकांग में 99 फीसदी लोगों ने सार्वजनिक रूप से मास्क पहने थे और 85 फीसदी ने कहा कि उन्होंने मार्च की शुरुआत में खुद को भीड़ से बचा लिया था।

हांगकांग ने बहुत पहले ही मास्क व सोशल डिस्टेंसिंग को अपना लिया था
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि जिस समय हांगकांग के लोगों ने संक्रमण से बचाव के लिए मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग को अपना लिया था, उस समय तक यहां तक कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) समेत वैश्विक स्वास्थ्य विशेषज्ञों और एजेंसियां भी कह रहीं थी कि स्वस्थ लोगों को सुरक्षात्मक मास्क पहनने की आवश्यकता नहीं है, लेकिन हांगकांग में अधिकारियों ने लोगों को सार्वजनिक रूप से मास्क पहनने के लिए प्रोत्साहित किया और उस छोटे से देश में आम लोगों ने सलाह को गंभीरता से लिया।

हांगकांग प्रशासन ने गंभीर रोकथाम उपायों को लागू करने से परहेज किया
इस मॉडल ने हांगकांग प्रशासन को गंभीर रोकथाम उपायों को लागू करने से बचने की अनुमति दी, जो कही न कहीं चीनी उदाहरण से प्रेरित थी। चूंकि यह वायरस चीन में उभरा था और उसका टोटल लॉकडाउन नए Covid-19 क्षेत्रों के लिए सबसे अच्छी रणनीति थी।

वर्तमान में कठोर लॉकडाउन के साथ भारत ने 31,000 से अधिक मामले
गत 2 मार्च को भारत के पास Covid -19 के पांच मामले थे और वर्तमान में दुनिया में सबसे कठोर लॉकडाउन के साथ भारत ने 31,000 से अधिक मामले दर्ज किए हैं, जहां अभी 22,000 से अधिक सक्रिय मामले हैं और मौत के आंकड़े 1,000 पार कर चुके हैं।

भारत ने प्रसार को रोकने के लिए चीन द्वारा लॉकडाउन का अनुसरण किया
भारत ने नोवल कोरोनावायरस के प्रसार को रोकने के लिए चीन द्वारा लॉकडाउन लागू करने के उदाहरण का अनुसरण किया। हालांकि भारत ने लोगों के लिए अधिक यात्रा रियायतों की अनुमति दी और अब जब भारत कोरोनोवायरस लॉकडाउन से बाहर निकलने के तरीकों की खोज कर रहा है, तो क्या सरकार अब हांगकांग मॉडल को अपनाएगी?

भारत में आने वाले महीनों में बगैर मास्क के सोशल गेदरिंग संभव नहीं
अब यह स्पष्ट है कि Covid -19 के बाद की अवधि में नया सामान्य सार्वजनिक और सोशल-फिजिकल डिस्टेंसिंग कम से कम आने वाले महीनों के लिए बगैर मास्क के नहीं हो सकता है और देश की अर्थव्यवस्था और लोगों को और लंबे समय तक बंद नहीं किया जा सकता है।












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