प्‍याज की कीमतें 120 रुपये के पार, जानिए कब तक कम होंगे दाम ?

बेंगलुरु। प्याज की आसमान छूती कीमतों पर ब्रेक लगने का नाम नहीं ले रहा है। दिल्ली से लेकर कोलकाता,चेन्नै और बेंगलुरु तक खुदरा बाजार में एक किलो प्याज 100 से 125 रुपये तक बिक रही है। ऐसे में हर दिन बढ़ रही प्‍याज के कीमत, लोगों की जेब पर बहुत भारी पड़ रही है। आलम ये है कि सेब और अनार से अधिक दाम अदा करके लोगों के किचन में प्‍याज पहुंच पा रही है। ऐसे में हर किसी के जे़हन में सवाल उठ रहा हैं कि आखिर प्‍याज की किल्लत के पीछे की वजह क्या हैं और कब तक दाम कम होंगे? मोदी सरकार इसके लिए क्या कदम उठा रही है? आइए जानते हैं इन सवालों के जवाब?

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ये सब जानने से पहले ये जान लिजिए कि प्‍याज के उत्पादन में भारत दुनिया में दूसरे नंबर पर है। वहीं चीन पहले नंबर पर है। भारत में सबसे अधिक प्‍याज का उत्पादन महाराष्‍ट्र में होता है और वहीं एशिया की सबसे बड़ी महाराष्‍ट्र के लासलगांव मंडी है। प्‍याज की फसल एक वर्ष में दो बार होती हैं। महाराष्‍ट्र के अलावा ओडिशा, कर्नाटक, गुजरात, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल मध्य प्रदेश में भी इसकी फसल अलग-अलग समय पर होती है। विश्व के करीब 1789 हजार हेक्टर में करीब 25,387 हजार मी. टन प्‍याज की खेती की जाती है। भारत में 287 हजार हेक्टर के क्षेत्रफल में प्‍याज की खेती की जाती है। जिससे करीब ढाई हजार टन का प्‍याज का उत्‍पादन होता है। भारतीय प्‍याज पर केवल बांग्‍लादेश ही नहीं बल्कि नेपाल, पाकिस्तान, श्रीलंका को भी निर्यात की जाती है लेकिन प्‍याज की किल्लत के चलते मोदी सरकार ने प्‍याज के निर्यात पर रोक लगा दी है।

प्‍याज की पैदावार पर मौसम की मार

प्‍याज की पैदावार पर मौसम की मार

देश भर में प्‍याज के दाम बढ़ने का इस बार सबसे बड़ा कारण खराब मौसम हैं। मौसम के कारण ही साल में दो बार आने वाली प्‍याज की फसलों पर ग्रहण लगा दिया। सबसे पहले महाराष्‍ट्र, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में जून जुलाई में सूखा पड़ने के कारण प्‍याज की बुआई नहीं हो सकी या जहां बुआई हुई वहां पानी की कमी के चलते पूरी फसल खराब हो गई। यह समय प्‍याज की फसल के लिए खास होता हैं। इस तरह सूखे के कारण साल की पहली फसल पर पैदावार प्रभावित हुई। इसके बाद दूसरी फसल के समय भारी बारिश के कारण प्‍याज की पूरी फसल चौपट हो गई। ।

ये समय वो था जब वहां के खेतों में प्‍याज की फसल खड़ी थी। तेज बारिश के कारण पूरी फसल बरबाद हो गई। जिसके कारण किसानों का बहुत नुकसान हुआ और किसानों को रुलाने के बाद , प्‍याज के बढ़े दाम आम इंसान को रुला रहे हैं। सितंबर के अंत में हुई बारिश की वजह अरब सागर में उठा चक्रवाती तूफान 'हिका' आया था। इसका असर देश के दूसरे राज्‍यों में भी देखने को मिला था। हिका नामक समुद्री तूफान ने भी प्‍याज की खेती प्याज की करीब 50 फीसदी फसल बर्बाद हो गई है। पिछले साल खरीफ का प्याज उत्पादन करीब 62 लाख टन था। जो इस साल घट कर 34 लाख टन रह गया है। वहीं संसद में केंद्रीय उपभोक्ता मंत्री रामविलास पासवान ने कहा कि इस साल बारिश और बाढ़ के चलते प्याज की पैदावार में 26 फीसदी तक गिरावट आई है। उन्होंने यह भी कहा कि 65,000 टन प्याज का बफर स्टॉक था, जिसमें 50 फीसदी प्याज सड़ गया है।

विदेशों से खरीदी जा रही प्‍याज, अब कम होगे दाम

विदेशों से खरीदी जा रही प्‍याज, अब कम होगे दाम

बता दें केंद्र सरकार की ओर से लगातार उठाए जा रहे कदमों के बावजूद प्याज की कीमत थमने का नाम नहीं ले रही है। आंध्र प्रदेश से प्‍याज की आवक से कुछ राहत मिलने की उम्‍मीद जताई जा रही है। इसके अलावा भारत अन्‍य देशों से प्‍याज का आयात कर रहा है। साथ ही सरकार ने प्‍‍‍‍‍याज के बफर स्‍टॉक को भी खोल दिया है। सरकार प्‍याज की कीमतों को बढ़ाने के लिए कालाबाजारी करने वालों पर भी नकेल कस रही है। बांग्‍लादेश को प्‍याज निर्यात पर पहले ही फरवरी तक प्रतिबंध लगा दिया गया है।

इतना ही नहीं, सरकार कीमतों को थामने के लिए MMTC को 300 करोड़ रुपये देने जा रही है। इस पैसे से सरकारी कंपनी एमएमटीसी विदेशों से प्याज खरीदेगी। अगले महीने आएगी विदेशों से प्याज- सरकार मिस्र, तुर्की, हॉलैंड व दूसरें देशों से प्याज मंगाने की कोशिश कर रही है। सरकारी कंपनी एमएमटीसी ने मिस्र से प्याज खरीदने के लिए समझौते किए हैं। मिस्र से 6090 टन प्याज की खेप दिसंबर महीने देश में आने वाली है। इसके अलावा कारोबारियों ने अफगानिस्तान से प्याज मंगाया है। माना जा रहा दिसंबर माह में प्‍याज के दामों में कमी आ सकती है।

 प्‍याज और राजनीति

प्‍याज और राजनीति

रोचक बात ये हैं कि जो प्‍याज के बढ़े दाम आपके आंसू निकाल रहे हैं उस प्‍याज पर राजनीति पहली बार नहीं हो रही है। 1980 में पहली बार इस पर राजनीति हुई थी। इसके बाद 1998, 2010, 2013 और 2015 में भी प्‍याज को लेकर राजनीति हुई थी। एक बार तो प्‍याज के बढ़े दामों के कारण दिल्ली में भाजपा की सरकार तक गिर चुकी है। 1998 में दिल्‍ली विधानसभा का चुनाव में प्‍याज के दाम मुख्‍य मुद्दों में शामिल थी। शीला दीक्षित के नेतृत्‍व लड़े गए इस चुनाव में कांग्रेस ने भाजपा को महज 14 सीटों पर समेट दिया था जबकि 53 सीटों पर जीत हासिल की थी। अब कुछ ही दिनों में दिल्ली विधानसभा के चुनाव आने वाले हैं एक बार फिर प्‍याज के बढ़े दामों को लेकर राजनीति तेज हो गई हैं। प्‍याज के बढ़े दामों के पीछे विपक्ष केन्‍द्र सरकार को घेर रहा है।

एक तरु जहां दिल्ली के मुख्‍यमंत्री अरविंद केजरीवाल दिल्ली में सस्‍ती कीमतों पर प्‍याज उपलब्ध करवाने के लिए कई स्‍थानों पर सेंटर तक खुलवा दिए। वहीं बिहार, झारखंड में बिस्कोमान नेफेड के सहयोग से 35 रुपये किलो प्याज दे रहा है। बिस्कोमान प्रति व्यक्ति 2 किलो प्याज 35 रुपये प्रति किलो के हिसाब से दे रहा है। लेकिन इस प्याज को बांटने के लिए आए अधिकारी हेलमेट पहने देखे जा रहे हैं। दरअसल इसके पीछे कारण ये है कि सस्ती प्याज पाने के चक्कर में कथित तौर पर कहीं-कहीं भीड़ उग्र हो जा रही है और अधिकारियों को निशाना बना रही है। प्याज बांटने आए बिस्कोमान के अधिकारी ने बयान दिया कि ''कुछ जगहों पर पथराव और भगदड़ जैसी घटनाएं हुई हैं. ऐसे में हमारे पास यही विकल्प है। हमें कोई सुरक्षा नहीं दी गई है


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