बडगाम: पत्थरबाजी में 60 सुरक्षाकर्मी घायल, आज रेल सेवा बंद
मंगलवार को जम्मू कश्मीर के बडगाम में आतंकियों के मुठभेड़ के दौरान भी विरोध प्रदर्शन और सुरक्षाबलों पर बरसाए गए पत्थर। लेकिन सेना ने एक आतंकी को खत्म करने में सफलता हासिल की।
बडगाम। मंगलवार को बडगाम में सुरक्षाबलों पर उस समय आतंकियों ने फायरिंग शुरू कर दी जब वह एक सर्च ऑपरेशन में बिजी थे। लेकिन शाम होते-होते सेना ने एक आतंकी को मार गिराया। खास बात थी कि एक बार फिर से सेना और सुरक्षाबलों पर ऑपरेशन के दौरान पत्थर बरसाए जा रहे थे जिसमें 60 जवान और पुलिसकर्मी घायल हो गए।घाटी में कानून और व्यवस्था की खराब हालत को देखते हुए बुधवार को रेल सेवा बंद रखने का फैसला लिया गया है। घाटी में बुधवार को ट्रेनें नहीं चलेंगी।

सेना पर बरसाए जा रहे थे पत्थर
सेंट्रल कश्मीर के बडगाम में जो मुठभेड़ हुई है उसमें सीआरपीएफ के 40 जवान और 20 पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। यह जानकारी सीआरपीएफ के डीआईजी संजय कुमार नेदी। सुरक्षाबलों पर लगातार पत्थर बरसाए जा रहे थे और ऐसे में उन्होंने एक्शन। मंगलवार को तड़के सुरक्षाबलों ने छादूरा के दुरबुघ इलाके को घेर लिया और सर्च ऑपरेशन लॉन्च किया। एक पुलिस ऑफिसर की ओर से जानकारी दी गई कि इलाके में आतंकियों के होने की सूचना मिली थी। सर्च ऑपरेशन मुठभेड़ में बदल गया जब आतंकियों ने सुरक्षाबलों पर फायरिंग शुरू कर दी।

सुरक्षाबल जब गोलीबारी का सामना कर रहे थे उसी समय भारी संख्या में प्रदर्शनकारी वहां पर इकट्ठा हो गए और उन्होंने पत्थर बरसाने शुरू कर दिए। इस बीच जब सुरक्षाबलें की ओर से कार्रवाई की गई और इसमें एक व्यक्ति के गर्दन में गोली लग गई। इस व्यक्ति को श्रीनगर के हॉस्पिटल ले जाया गया और यहां पर उसकी मौत हो गई। प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिए सुरक्षाबलों को पैलेट गन और टियर गैस का सहारा लेना पड़ा।

सीआरपीएफ ने की स्थानीय लोगों से अपील
सीआरपीएफ के डीआईएजी संजय कुमार ने इस मुठभेड़ के बारे में बताया कि इसका सामना करना बेहद मुश्किलों भरा रहा क्योंकि स्थानीय लोगों ने ज्यादा समस्याएं खड़ी कर दीं। डीआईजी ने कहा कि सुरक्षाकर्मियों को दो मोर्चों पर मुकाबला करना पड़ा, एक तरफ आतंकी थे तो दूसरी तरफ स्थानीय लोग। स्थानीय लोगों ने काफी हंगामा किया, पत्थर फेंकते रहे, गालियां देते रहे। उनकी वजह से 40 जवान और 20 पुलिसकर्मी घायल हो गए। सीआरपीएफ ने कश्मीर घाटी के स्थानीय लोगों से आतंकियों के खिलाफ ऑपरेशन में बाधा न पहुंचाने की अपील की है।

पहले भी था ऐसा ही नजारा
इससे पहले इसी तरह का नजारा साउथ कश्मीर के त्राल में देखने को मिला था। यहां पर नौ मार्च को 15 घंटे तक चला एनकाउंटर खत्म हुआ। इस एनकाउंटर में हिजबुल मुजाहिद्दीन के आतंकी आकिब मौलवी को सुरक्षाबलों ने मार गिराया।
आकिब के जनाजे के समय नजारा बिल्कुल वैसा ही था जैसा पिछले वर्ष बुरहान वानी के मारे जाने के बाद था। मौलवी के जनाजे के लिए त्राल को पूरी तरह से बंद कर दिया गया था। कश्मीर की आजादी के नारे लग रहे थे और बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर इकट्ठा थे। आकिब का साथ उस्मा भी इस एनकाउंटर में मारा गया है। आकिब की मौत के बाद उसके शव को त्राल के हाइना ले जाया गया था। सुरक्षाबलों को इंटेलीजेंसी इनपुट मिला था कि इलाके में कुछ आतंकी छिपे हुए हैं। एनकाउंटर को कई बार बीच में रोकना पड़ा क्योंकि स्थानीय लोगों की ओर से जमकर पत्थरबाजी हो रही।












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