One Nation One Election पर केंद्र ने पहले ही किया फैसला, ओवैसी ने क्यों किया ऐसा दावा?

एआईएमआईएम के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने रविवार को दावा किया है कि वन नेशन वन इलेक्शन को लेकर केंद्र सरकार ने जो कमेटी गठित की है, वह सिर्फ औपचारिकता भर है, दरअसल केंद्र ने इसपर फैसला पहले ही कर लिया है।

हैदराबाद के सांसद ने यह भी कहा कि यह विचार देश में बहुदलीय संसदीय लोकतंत्र और संघवाद के लिए आपदा साबित होगा। गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने देश में एक साथ सारे चुनाव के विचार पर सुझाव देने के लिए पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अगुवाई में एक उच्च-स्तरीय कमेटी बनाई है।

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'सरकार ने पहले ही यह करने का फैसला कर लिया है'
ओवैसी ने X (पहले ट्विटर) पर किए गए अपने पोस्ट में लिखा है, 'यह नोटिफिकेशन वन नेशन वन इलेक्शन पर विचार के लिए समिति नियुक्त करने का है। स्पष्ट है कि यह सिर्फ एक औपचारिकता है और सरकार ने पहले ही यह करने का फैसला कर लिया है। वन नेशन वन इलेक्शन बहुदलीय संसदीय लोकतंत्र और संघवाद के लिए एक तबाही होगी।'

पीएम मोदी पर निशाना
एआईएमआईएम के नेता ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने आने वाले राज्य चुनावों को देखते हुए एलपीजी के दाम घटाए हैं और वह एक ऐसा माहौल बनाना चाहते हैं कि अगर वह चुनाव जीत जाते हैं तो अगले पांच साल तक बिना किसी जवाबदेही के जन-विरोधी नीतियां लाते रहेंगे।

राष्ट्रपति के उच्च पद का दर्जा कम किया-ओवैसी
एक के बाद एक कई ट्वीट में से एक में उन्होंने सवाल किया है, 'मोदी सरकार ने एक पूर्व राष्ट्रपति को सरकार की एक समिति का प्रमुख नियुक्त करके भारत के राष्ट्रपति के उच्च पद का दर्जा कम किया है। राज्यसभा के पूर्व नेता विपक्ष को क्यों शामिल किया गया है?' ओवैसी का दावा है कि समिति के बाकी सदस्य स्पष्ट तौर पर सरकार के समर्थन वाला नजरिया रखते हैं, जो कि उनके कथित टिप्पणियों से मालूम पड़ता है।

'यह एक दिखावे की प्रक्रिया है'
एआईएमआईएम नेता के मुताबिक यह प्रस्ताव ही संविधान और संघवाद के मूल भावना के खिलाफ है। उनका दावा है कि समिति को जो कार्य करने की जिम्मेदारी मिली है, वह ' मतदाताओं की इच्छा के खिलाफ है और लोगों की आवाज को हरा देगा और यह एक दिखावे की प्रक्रिया है।'

इस समिति में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह, लोकसभा में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी, राज्यसभा के पूर्व नेता विपक्ष गुलाम नबी आजाद, जाने-माने वकील हरीश साल्वे, पूर्व सीवीसी संजय कोठारी, वित्त आयोग के पूर्व अध्यक्ष एनके सिंह और लोकसभा के पूर्व महासचिव सुभाष सी कश्यप शामिल हैं। हालांकि, कांग्रेस सांसद अधीर रंजन चौधरी ने इस समिति में शामिल होने से मना किया है।

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