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सिंधिया के गढ़ में भाजपा से नाराज़ सवर्णों को मनाने की कोशिश करेंगे शाह

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नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के अध्यक्ष अमित शाह 9 अक्टूबर, 2018 को ग्वालियर और गुना जा रहे हैं। मध्य प्रदेश के मालवा क्षेत्र की यात्रा के बाद पार्टी कार्यकर्ताओं के लिए पार्टी अध्यक्ष की ये यात्रा काफी महत्वपूर्ण है क्योंकि मालवा के मुकाबले ग्वालियर-गुना क्षेत्र में बीजेपी के खिलाफ लोगों में ज्यादा नाराजगी है। यही इलाका मध्यप्रदेश में कांग्रेस की चुनाव प्रचार अभियान समिति के प्रमुख ज्योतिरादित्य सिंधिया का भी ज्यादा प्रभाव वाला इलाका है। सिंधिया वर्तमान में गुना से लोकसभा सांसद हैं। ग्वालियर-गुना इलाके में बीजेपी के लिए इस वक्त सबसे बड़ी दिक्कत अगड़ी जातियों में एससी/एसटी एक्ट को लेकर नाराजगी है। अमित शाह की इस यात्रा को भी कार्यकर्ता इसी नजर से देख रहे हैं कि वो इस मामले को कुछ शांत करेंगे और उन्हें इससे निपटने के लिए मार्गदर्शन देंगे। बता दें कि ग्वालियर-चंबल संभाग के इलाके में ही एससी/एसटी एक्ट को लेकर मध्यप्रदेश में सबसे ज्यादा हिंसक प्रदर्शन हुए थे।

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एससी/एसटी एक्ट पर चुनावी मंत्र

एससी/एसटी अधिनियम के मुद्दे पर राज्य में और खासकर ग्वालियर और गुना इलाके में भारी असंतोष है और इसका पार्टी के काम पर असर पड़ा है। चुनाव नजदीक हैं और अब कार्यकर्ता चाहते हैं कि पार्टी इस मामले में स्पष्ट स्टैंड ले और बताए कि अगड़ी जातियों को इस मामले में कैसे समझाया जाए। इसलिए उम्मीद की जा रही है कि पार्टी अध्यक्ष अमित शाह इस मुद्दे पर सीधे पार्टी कार्यकर्ताओं से बात करेंगे। बीजेपी के सूत्रों का कहना है कि पार्टी के कार्यकर्ता न केवल निराश हैं बल्कि उन्हें उन लोगों की भी नाराजगी का सामना करना पड़ रहा है जो कभी बीजेपी के कट्टर समर्थक थे। ऐसे समय में जब चुनाव नजदीक हैं तो ऐसे लोगों से निपटना पार्टी के लिए एक बड़ी चुनौती है और पार्टी कार्यकर्ता अमित शाह से उम्मीद लगाए बैठें हैं कि वो इस बारे में उन्हें कुछ टिप्स देंगे।

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इलाके में सिंधिया का दबदबा

इसके अलावा चुनाव के मद्देनजर भी ग्वालियर और गुना के इलाके में इस बार बीजेपी के लिए चुनौती बड़ी है। ये इलाका ज्योतिरादित्य सिंधिया का गढ़ माना जाता है और इस बार सिंधिया पर कांग्रेस की बड़ी जिम्मेदारी है इसलिए वो कम से कम अपने इलाके में तो पूरा जोर लगाएंगे। अगर पूरे ग्वालियर-चंबल संभाग पर नजर डालें तो श्योपुर, मुरैना, भिंड, ग्वालियर, शिवपुरी, गुना और अशोक नगर जिलों को मिलाकर यहां कुल 31 विधानसभा सीटें हैं। 2013 के चुनावों में इनमें से बीजेपी को 17, कांग्रेस को 12 और बीएसपी को दो सीटें मिली थीं।

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English summary
On his Gwalior visit Amit shah will try to calm down the anger against BJP on SC/ST act
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