ओमिक्रॉन वैरिएंट: हल्के लक्षण का होने के बाद भी क्यों खतरनाक है कोरोना का ये नया रूप?
नई दिल्ली, 07 जनवरी: कोरोना वायरस के उत्परिवर्तित नए स्वरुप ओमिक्रॉन वैरिएंट के मामले हर रोज तेजी से बढ़ रहे हैं। कोरोना का ये नया वैरिएंट पिछले वाले डेल्टा वैरिएंट से भी तेजी से फैल रही है लेकिन राहत की बात यह है कि, नए वाले वैरिएंट से संक्रमित लोग अस्पताल में कम भर्ती हो रहे हैं, और मौतें भी कम हो रही हैं। 5 जनवरी को अमेरिका में रिकॉर्ड 5.85 लाख और और दुनिया भर 18.95 लाख नए संक्रमण दर्ज किए गए। 14 दिनों के हिसाब से क्रमशः लगभग 250% और 165% की बढ़ोत्तरी देखने को मिली है । लेकिन 5 जनवरी को होने वाली मौतों की संख्या अमेरिका में 1,300 और पूरा दुनिया में 6,100 थी। जो 14 दिन पहले की तुलना में लगभग 3% और 9% कम थी।

24 नवंबर को दक्षिण अफ्रीका में पहली बार पहचाने गए ओमिक्रॉन के स्पाइक प्रोटीन में 32 उत्परिवर्तन हुए हैं। इनमें से कई उच्च प्रसारण और प्रतिरक्षा चोरी से जुड़े होने के कारण हुए हैं। ओमिक्रॉन को विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) द्वारा वैरिएंट ऑफ कंसर्न घोषित किया है। अफ्रीका में बीमार लोगों की सुनामी सी आई हुई है। लेकिन अस्पताल में भर्ती होने की दर काफी कम हैं और मौत के आंकड़े में भी गिरावट आई है।
क्या ओमिक्रॉन वास्तव में हल्का है?
जामा नेटवर्क में प्रकाशित दक्षिण अफ्रीका के एक अध्ययन में बताया गया है कि ओमिक्रॉन वेब के दौरान केवल 41.3% कोविड-पॉजिटिव लोगों को अस्पताल में आपात स्थिति में लाया गया है। जबकि डेल्टा लहर के दौरान 68-69% कोरोना संक्रमित मरीजों को अस्पतालों में आपात स्थिति में लाया गया था। यही नहीं ओमिक्रॉन से संक्रमित मरीजों में केवल 17.6 फीसदी लोगों को ऑक्सीजन की आवश्यकता हुई है, जबकि डेल्टा वेब के दौरान ये आंकड़ा 74% था।
बीएमजे में प्रकाशित यूके की स्वास्थ्य सुरक्षा एजेंसी के डेटा विश्लेषण में कहा गया है कि डेल्टा से संक्रमित लोगों की तुलना में ओमिक्रॉन से संक्रमित व्यक्तियों के अस्पताल में भर्ती होने की संभावना 50-70% तक कम है। इंस्टीट्यूट ऑफ जीनोमिक्स एंड इंटीग्रेटिव बायोलॉजी के निदेशक डॉ अनुराग अग्रवाल का कहना है कि, यूके और दक्षिण अफ्रीका के आंकड़ों के आधार पर ओमिक्रॉन की गंभीरता 66-80% कम प्रतीत होती है। "हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी है कि, इसका मतलब यह नहीं है कि ओमिक्रॉन हानिरहित है। लोग अभी भी आईसीयू में भर्ती हो रहे हैं।
भारत का अब तक का अनुभव क्या रहा है?
भारत में10 दिन पहले केवल 6,358 मामलों की तुलना में गुरुवार (पिछले 24 घंटों) में लगभग 91,000 नए मामले दर्ज किए हैं। देश भर के डॉक्टरों का कहना है कि देश में भले ही मामले तेजी से बढ़ रहे हों लेकिन लगभग सभी रोगी हल्के लक्षणों के साथ आ रहे हैं। कोरोना संक्रमित लोगों को मध्यम बुखार, गले में खराश, सिर दर्द, बदन दर्द और थकान जैसे लक्षण हैं। कुछ रोगियों को दस्त, मतली और चक्कर जैसी परेशानियां हो रही हैं। डेल्टा की तरह इस नए वैरिएंट से लोग निमोनिया के शिकार नहीं हो रहे हैं। जिस कारण से ऑक्सीजन और वेंटिलेटर की कम आवश्यकता पड़ रही है।
क्या इसका मतलब यह है कि हमें ओमिक्रॉन के बारे में चिंता करने की ज़रूरत नहीं है?
ऐसा नहीं है। अधिकांश व्यक्तियों में ओमिक्रॉन कम गंभीर बीमारी का कारण हो सकता है, लेकिन इसकी बहुत अधिक प्रसार के कारण, अस्पतालों में मरीजों की बाढ़ आ सकती है। जो स्थिति को बिगाड़ सकती है। डेल्टा की तुलना में ओमिक्रॉन कम से कम 1.5-2 गुना अधिक संचरणीय है, जिसके परिणामस्वरूप बहुत ही कम समय में दुनिया भर में बहुत बड़ी संख्या में इससे संक्रमण हुए हैं। यह उन लोगों को भी संक्रमित करने में डेल्टा से 2-3 गुना अधिक सक्षम है। जो वैक्सीन के दोनों डोज ले चुके हैं।












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