ओडिशा: पुरानी पेंशन योजना को बहाल करने के राज्य कर्मचारी हुए एकजुट, दी आंदोलन की चेतावनी
नेशनल मूवमेंट फॉर ओल्ड पेंशन स्कीम (एनएमओपीएस) ओडिशा राज्य समिति के बैनर तले रविवार को महासम्मेलन का आयोजन किया गया। इस सम्मेलन में एसोसिएशन के नेताओं और राज्य के 40 से अधिक सरकारी विभागों के प्रतिनिधियों ने इस सम्मेलन में हिस्सा लिया और राज्य में पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) को फिर से लागू करने के लिए राज्य सरकार को ज्ञापन सौंपा।

राज्य में पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) को लागू करने की मांग को लेकर 250 सरकारी कर्मचारियों और सेवा संघों के लगभग 5,000 से अधिक प्रतिनिधियों ने इस सम्मेलन में हिस्सा लिया। इन कर्मचाररियों ने सरकार को ज्ञापन सौंपने के साथ ही चेतावनी दी कि अगर नवंबर माह तक मांग नहीं पूरी होती है तो राज्य स्तरीय आंदोलन करेंगे।
एनएमओपीएस ओडिशा के सदस्यों ने जानकारी दी कि 2005 के बाद भर्ती हुए लगभग चार लाख राज्य सरकार के कर्मचारी नई पेंशन योजना शुरू होने के बाद पेंशन से वंचित हो गए हैं। एसोसिएशन ने बताया कि केंद्र और राज्य सरकार दोनों ने ओपीएस को खत्म कर दिया है और 2004 और 2005 में नई पेंशन योजना (एनपीएस) लागू की। इन दो वर्षों के बाद तैनात सरकारी कर्मचारियों को उनके रिटायर होने के बाद केवल 600 रुपये से 2,000 रुपये की पेंशन मिल रही है।
एनएमओपीएस ने आरोप लगाया कि जहां सांसद और विधायक वर्षों पहले की तरह ही पुरानी पेंशन का लाभ ले रहे हैं वहीं रिटायर होने के बाद वृद्धाअवस्था में ये सरकारी कर्मचारी पेंशन ना मिलने के कारण दयनीय जीवन बिता रहे हैं।
वहीं पश्चिम बंगाल सरकार अभी भी अपने कर्मचारियों को पुरानी पेंशन दे रही है। इसके अलावा चार अन्य राज्यों राजस्थान, झारखंड, छत्तीसगढ़ और हिमाचल प्रदेश ने नई पेंशन प्रणाली के गंभीर परिणामों को महसूस करने के बाद अपनी पेंशन प्रणाली को एनपीएस से ओपीएस में बदल दिया है।
कर्मचारियों ने यह भी कहा कि नई पेंशन योजना में जीपीएफ और डीए का प्रावधान नहीं है। एसोसशियन और राज्य के नेताओं ने चेतावनी दी है कि अगर सरकार इस पर विचार करने में विफल होती है एनएमओपीएस ओडिशा के तहत राज्य भर के कर्मचारी नवंबर माह में हड़ताल करेंगे और इस हड़ताल से नुकसान होगा उसके लिए पूर्ण रूप से प्रदेश सरकार जिम्मेदार होगी।












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