Odisha FDI Inflow: पिछले 5 वर्षों में विदेशी निवेश में ओडिशा सबसे निचले स्तर पर, आंकड़ों में जानिए
Odisha FDI Inflow: भारत की अर्थव्यवस्था में सुधार के चलते देश में विदेशी निवेश को बढ़ावा मिल रहा है। इस बीच ओडिशा में विदेश निवेश को लेकर राष्ट्रीय निवेश प्रोत्साहन एजेंसी इन्वेस्ट इंडिया की जारी जारी आंकड़ें चिंता में डालने वाले हैं। डेटा के मुताबिक, अक्टूबर 2019 से सितंबर 2023 तक ओडिशा में एफडीआई प्रवाह बड़े राज्यों में सबसे कम था। यानी प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) के मामले में ओडिशा निचले स्थान पर है। पिछले पांच वर्षों में ओडिशा में कुल एफडीआई इनफ्लो मात्र 165.54 मिलियन अमेरिकी डॉलर यानी 1,377 करोड़ रुपये ही दर्ज किया गया।

इन्वेस्ट इंडिया से उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, अक्टूबर 2019 से सितंबर 2023 तक ओडिशा में एफडीआई प्रवाह बड़े राज्यों में सबसे कम था। हालांकि राज्य सरकार ने तीन मेक-इन-ओडिशा सम्मेलन आयोजित किया था।
सबसे अधिक एफडीआई इक्विटी इनफ्लो वाले टॉप पांच राज्य में महाराष्ट्र, कर्नाटक, गुजरात, दिल्ली और तमिलनाडु शामिल हैं। महाराष्ट्र 61.92 बिलियन अमेरिकी डॉलर के साथ चार्ट में शीर्ष पर है, उसके बाद कर्नाटक 47.3 बिलियन अमेरिकी डॉलर, गुजरात 34.16 बिलियन अमेरिकी डॉलर, दिल्ली 28.3 बिलियन अमेरिकी डॉलर और तमिलनाडु 9.85 बिलियन अमेरिकी डॉलर के साथ है। ओडिशा के पड़ोसी राज्य झारखंड ने 2.66 बिलियन अमेरिकी डॉलर, तेलंगाना ने 5.92 बिलियन अमेरिकी डॉलर, पश्चिम बंगाल ने 1.51 बिलियन अमेरिकी डॉलर और आंध्र प्रदेश ने 872.62 मिलियन अमेरिकी डॉलर का निवेष हासिल किया।
कोविड महामारी के दौरान (2021-22) ओडिशा में एफडीआई इनफ्लो चार गुना से अधिक बढ़ा था, जो अगले वित्तीय वर्ष (2022-23) में घटकर लगभग एक तिहाई रह गया। राज्य को 2019-20 (अक्टूबर 2019 से) में 13.05 मिलियन अमेरिकी डॉलर, 2020-21 में 19.76 मिलियन अमेरिकी डॉलर, 2021-22 में 95.33 मिलियन अमेरिकी डॉलर, 2022-23 में 31.63 मिलियन अमेरिकी डॉलर और सितंबर 2023 तक 5.78 मिलियन अमेरिकी डॉलर का एफडीआई दर्ज किया गया।
उद्योग विभाग के एक अधिकारी के मुताबिक ओडिशा में एफडीआई इनफ्लो विदेशी निवेशकों के निवेश के अलावा प्राकृतिक संसाधनों की उपलब्धता, बाजार का आकार, बुनियादी ढांचे समेत अन्य प्रमुख कारकों पर भी निर्भर करता है।
पिछले पांच वर्षों में ओडिशा को 165.54 मिलियन अमेरिकी डॉलर मिले हैं। देखिए आंकड़े-
2019-20 में 13.05 मिलियन अमेरिकी डॉलर (अक्टूबर 2019 से)
2020-21 में 19.76 मिलियन अमेरिकी डॉलर
2021-22 में 95.33 मिलियन अमेरिकी डॉलर
2022-23 में 31.63 मिलियन अमेरिकी डॉलर
सितंबर 2023 तक 5.78 मिलियन अमेरिकी डॉलर
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