एनआरआई को फुर्सत कहां भारत में वोट देने की
नई दिल्ली( विवेक शुक्ला) हालांकि अनिवासी भारतीयों यानी एनआरआई को भारत में होने वाले विभिन्न चुनावों में वोट देने का अधिकार मिलने जा रहा है, पर बड़ा सवाल यह है कि क्या इनकी वोट देने में कोई दिलचस्पी है?

एनआरआई मामलों के जानकार राजीव गुप्ता कहते हैं कि ये लोग भारत से बाहर रहते हुए इस बात की कतई परवाह नहीं करते कि उऩके अपने वतन में क्या हो रहा है। इस रोशनी में इस बात की संभावना बहुत नहीं है कि वोट देने का अधिकार मिलने के बाद भी ये वोट देंगे लोकसभा या विधान सभा चुनावों में ।
चुनाव आयोग की सिफारिश
बताते चलें कि केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि अनिवासी भारतीयों (एनआरआई) को डाक मतपत्र का इस्तेमाल कर वोट करने का अधिकार दिए जाने की चुनाव आयोग की सिफ़ारिश उन्हें मंज़ूर है।
कानून में संशोधन
सरकार की स्थिति को एडिशनल सोलिसिटर जनरल पीएल नरसिम्हा ने स्पष्ट किया और कहा कि मौजूदा क़ानून में कुछ संशोधन किए जाने हैं जिसपर क़ानून मंत्रालय काम कर रहा है। चुनाव आयोग की सिफ़रिश को ध्यान में रखते हुए ये संशोधन किए जा रहे हैं।
फुर्सत कहां है
ब्रिटेन में बस गए होटल पेशेवर सुह्द एस ने कहा कि वे और उऩके जैसे दूसरे एनआरआई अपने काम-धँधों में इतने बिजी रहते हैं कि इऩ्हें वक्त नहीं मिलता कि वे कुछ सोचें। देश से बाहर जाने के बाद देश से संबंध सिर्फ इतना रह जाता है कि सिर्फ अपने घरवालों की खोज-खबर ले ली जाती है।
पिछले साल नवंबर की 14 तारीख़ को सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से चुनाव आयोग के सुझाव पर अपना पक्ष स्पष्ट करने के लिए कहा था।जिसमें एनआरआई को ई-बैलेट या प्रॉक्सी वोटिंग के ज़रिए भारत में वोट करने के अधिकार की बात कही गई थी।
कितने एनआरआई देंगे वोट
जानकारों का कहना है आमतौर पर मतदान 55-60 फीसद तक तो देश के अंदर होता है। यानी कि 40 फीसद लोग तो देश में ही वोट नहीं देते। इन हालातों में यह उम्मीद करना कि एनआरआई देश में वोट देंगे।












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