Budget2020 से NRI को दोहरा झटका, जानिए क्या है प्रस्ताव ?

नई दिल्ली- अप्रवासी भारतीयों को इस साल के बजट प्रस्ताव सुनकर बहुत बड़ा झटका लग सकता है। सरकार ने इस बार के बजट में उनके लिए दो ऐसे प्रावधान रखे हैं, जिससे उनको बड़ा नुकसान हो सकता है। मसलन, सरकार ने उन्हें एनआरआई दर्जा हासिल करने के लिए विदेश में रहने की मियाद भी बढ़ा दी है और उन्हें इनकम टैक्स के दायरे में ला दिया है। यह दोनों ही व्यवस्थाएं ऐसी हैं, जिससे अब तक टैक्स से आजाद रहने वाले हजारों एनआरआई को भी अब देश में इनकम टैक्स चुकाना पड़ेगा।

बजट से NRI को दोहरा झटका

बजट से NRI को दोहरा झटका

बजट प्रस्ताव के मुताबिक अब कोई भारतीय तभी एनआरआई माने जाएंगे, जब वह साल में 2040 दिन देश से बाहर रहें। पहले यह सीमा सिर्फ 182 दिनों की थी। दूसरे शब्दों में अब किसी भारतीय नागरिक को तभी एनआरआई का दर्जा मिलेगा, जब वह साल में 120 या उससे ज्यादा दिन तक भारत में न रहे। सीएनबीसी टीवी18 के मुताबिक रेवेन्यू सचिव अजय भूषण पांडे ने कहा है, 'अब एक अप्रवासी बनने के लिए 240 दिनों तक देश के बाहर रहना होगा। ' लेकिन, दूसरा बदलाव अप्रवासी भारतीयों को लिए तो और भी बड़ा झटका है। अब किसी अप्रवासी भारतीय को जिसे दूसरे देशों में टैक्स नहीं लगता, उन्हें भारत में आयकर का भुगतान करना होगा। राजस्व सचिव ने बताया, 'अगर कोई भारतीय नागरिक दुनिया के किसी देश का निवासी नहीं, उसे भारतीय निवासी माना जाएगा और दुनिया भर में उसकी आमदनी पर टैक्स लगेगा।'

दुबई भूल जाएं, भारत आकर टैक्स चुकाएं!

दुबई भूल जाएं, भारत आकर टैक्स चुकाएं!

अप्रवासी भारतीयों को लेकर बजट प्रावधानों में हुए इस बदलाव के बारे में ध्रुव एडवाइजर्स के दिनेश कनाबार ने कहा है, 'टैक्स बचाने के लिए विदेशों में रहने वाले भारतीयों के लिए यह बहुत ही बड़ा नुकसान है। ' उनके मुताबिक कई भारतीय कुछ देशों में इसलिए रहते हैं, क्योंकि वहां आयकर काफी कम है या बिल्कुल ही नहीं है, जैसे कि दुबई में। लेकिन, अब उन्हें भारत में आयकर देना होगा, अगर वह उसके दायरे में आते हैं। जाहिर है कि अब टैक्स बचाने के चक्कर में टैक्स के लिए स्वर्ग माने जाने वाले देशों में समय गुजारने वाले भारतीयों को कोई फायदा नहीं मिलने वाला है।

बजट में आयकर में क्या हुआ बदलाव?

बजट में आयकर में क्या हुआ बदलाव?

बता दें कि इस साल के बजट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आयकर के लिए नए स्लैब की घोषणा तो की ही है, साथ ही एक नए टैक्स स्लैब का भी प्रस्ताव रखा है। नए आयकर स्लैब के दायरे में 80सी में मिलने वाली छूटों को इजाजत नहीं दी गई है। इसके तहत होम लोन, बीमा और स्टैंडर्ड डिडक्शन का लाभ नहीं मिल सकेगा। सबसे लंबे बजट भाषण पढ़ते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है, 'नई टैक्स व्यवस्था वैकल्पिक होगी और करदाताओं के पास यह विकल्प होगा कि वह छूट और कटौती वाली पुरानी व्यवस्था में रहें या बिना छूट वाली घटाई गई टैक्स दर को अपनाएं।' हालांकि, नई व्यवस्था में 80सी के तहत मिलने वाली छूट हटाए जाने के प्रावधानों को लेकर अभी भी असमंजस की स्थिति बरकरार है, मसलन अभी तक यह साफ नहीं हो पाया है कि वेतन भोगियों को भविष्य निधि के लिए जिस रकम की अनिवार्य रूप से कटौती होती है, उसमें टैक्स में छूट मिलेगी या नहीं।

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