सपा-बसपा महागठबंधन से दूरी के बाद अब इस रणनीति से चुनाव मैदान में उतरेगी कांग्रेस
नई दिल्ली। कांग्रेस देश के तीन महत्वपूर्ण राज्यों मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में विधानसभा चुनाव जीतने के बावजूद उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी द्वारा गठित गठबंधन में जगह बनाने में विफल रही है। ऐसे में अब कांग्रेस के पास अकेले लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए अलावा कोई और रास्ता फिलहाल नहीं है। कांग्रेस के प्रति समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी का रवैया एक बड़ा झटका है।

पार्टी ने बदले हुए रणनीति के साथ लोकसभा चुनाव की तैयारी शुरू कर दी है। सूत्रों की माने तो पार्टी अब मुख्य रूप से ऐसी सीटों पर ध्यान केंद्रित कर रही है, जहां उसने कम से कम एक लाख या उससे अधिक वोट मिले थे। हालांकि, पार्टी यूपी की सभी 80 लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ने का दावा करेगी। सपा और बसपा के फैसले से कांग्रेस नेतृत्व थोड़ा निराश था। पार्टी नेताओं ने यह बात स्वीकार की है कि हाल ही पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव के तुरंत बात सपा-बसपा ने साफ संकेत दिए थे। जिसके बाद पार्टी उन सीटों और संभावित उम्मीदवारों की पहचान में जुट ई है।
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लेकिन ये बात भी सच है कि पार्टी आखिरी दम तक गठबंधन का हिस्सा बनने की कोशिश करती रही। लेकिन दिक्कत यह थी गठबंधन में जाने पर सपा-बसपा कांग्रेस को 5-6 सीट से ज्यादा देने के लिए राजी नहीं थे जबकि कांग्रेस एक दर्जन से कम सीटों के लिए तैयार नहीं थी। इसके बाद भी सपा-बसपा ने राहुल गांधी और सोनिया गांधी के खिलाफ मैदान में नहीं उतर कर दोस्ती का द्वार खुला रखा है। कांग्रेस अध्यक्ष ने यह कहकर सपा-बसपा पर दबाव बनाने की कोशिश की कि राज्य में कांग्रेस की अनदेखी करना गठबंधन के लिए मुश्किल है।
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