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अब किसी 'निर्भया' को इंसाफ के लिए नहीं करना होगा लंबा इंतजार, केंद्र ने SC से की ये अपील

नई दिल्ली- केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से फांसी की सजा के मामलों में सजा मुकर्रर होने के बाद उसकी तामील के लिए एक समय-सीमा निर्धारित करने की मांग की है। सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से ये भी गुजारिश की है कि अगर किसी मामले में एक से ज्यादा गुनहगार हों और किसी एक दोषी ने अपनी सभी वैद्यानिक उपचारों का इस्तेमाल कर लिया हो तो फिर उसे उसके साथी दोषियों के लिए फांसी पर लटकाने का इंतजार नहीं किया जाए, बल्कि निर्धारित समय के भीतर उसकी सजा तामील करने की व्यवस्था हो। माना जा रहा है कि 2012 के निर्भया कांड के दोषियों की ओर से हो रही चालबाजियों के मद्देनजर केंद्र सरकार ने सीधे सुप्रीम कोर्ट से ही कोई हल निकालने की मांग कर दी है। अब अगर सुप्रीम कोर्ट ने सरकार की बातों पर गौर फरमा लिया तो आगे से कोई भी 'निर्भया' को इंसाफ के लिए सजा मुकर्रर होने के बाद भी उसकी तामील के लिए लंबा इंतजार नहीं करना होगा।

'फांसी की सजा पाए दोषियों को 7 दिन में लटकाया जाए'

'फांसी की सजा पाए दोषियों को 7 दिन में लटकाया जाए'

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से फांसी की सजा के मामलों में रिव्यू पिटिशन खारिज होने के बाद क्यूरेटिव पिटिशन दायर करने के लिए एक समय-सीमा तय करने की गुजारिश की है। बुधवार को केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से अपील की है कि 'अगर दोषी दया याचिका दायर करना चाहता है तो सक्षम अदालत से डेथ वारंट जारी होने के सात दिन के भीतर ही ये करने की बाध्यता हो।' माना जा रहा है कि निर्भया के गुनहगारों की ओर से हाल में कानूनी पेचीदगियों का इस्तेमाल कर सजा को लटकाए रखने की कोशिशों के मद्देनजर इस तरह की गुजारिश की गई है। गृह मंत्रालय की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दायर अर्जी में कहा गया है कि, 'देश की सभी सक्षम अदालतों, राज्य सरकारों, जेल अधिकारियों को निर्देशित किया जाए कि किसी भी दोषी की दया याचिका खारिज होने के 7 दिनों के भीतर डेथ वारंट जारी किया जाए और उसके 7 दिनों के भीतर उसकी सजा की तामील कर दी जाए, चाहे साथी-दोषियों की रिव्यू पिटिशन/क्यूरेटिव पिटिशन/मर्सी पिटिशिन किसी भी चरण में हो।'

अभी सभी दोषियों को एक साथ लटकाने का है प्रावधान

अभी सभी दोषियों को एक साथ लटकाने का है प्रावधान

गौरतलब है कि निर्भया के चारों दोषियों मुकेश सिंह, विनय शर्मा, अक्षय सिंह और पवन गुप्ता की फांसी के लिए पहले 22 फरवरी को सुबह 7 बजे फांसी देने के लिए तय समय एक बार टाली जा चुकी है। दिल्ली की एक अदालत ने निर्भया के गुनहगारों को फांसी पर लटकाने की नई तारीख अब 1 फरवरी को मुकर्रर की है। लेकिन, दोषियों के वकील अभी भी कानूनी खामियों का इस्तेमाल करके इसे और टालने की कोशिशों में जुटे हुए हैं। गौरतलब है कि इस केस में मुकेश सिंह की दया याचिका राष्ट्रपति के पास से भी खारिज हो चुकी है, लेकिन मौजूदा नियमों के तहत उसे तभी फांसी पर लटकाया जा सकता है, जब बाकी दोषियों को भी लटकाने का कानूनी रास्ता साफ हो जाएगा। इस केस में गुनहगारों की ओर से अपनाए जा रहे हथकंडों की वजह से निर्भया के माता-पिता भी बेसब्र हो रहे हैं और उनकी ओर से भी इस संबंध में अदालत से एक गाइडलाइन बनाने की मांग की गई थी। एक दोषी तो तब खुद को वारदात के वक्त नाबालिग होने की बात साबित करने के लिए कोर्ट तब पहुंचा, जब डेथ वारंट जारी हो चुका था।

7 साल से इंसाफ का इंतजार

7 साल से इंसाफ का इंतजार

बता दें कि 16 दिसंबर, 2012 की रात 23 साल की पैरामेडिकल की स्टूडेंट निर्भया के साथ 6 लोगों ने चलती बस में गैंगरेप किया था और उसके शरीर के साथ क्रूरता की सारी हदें पार कर दी थीं। निर्भया को इन दरिदों ने उस जघन्य वारदात के बाद उसके मित्र के साथ चलती बस से ही दक्षिणी दिल्ली में सड़क किनारे फेंक दिया था। इस घटना को लेकर दिल्ली समेत पूरे देश में जन-आक्रोश उमड़ पड़ा। बाद में निर्भया ने सिंगापुर के एक अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। इस केस के 6 में से एक आरोपी ने ट्रायल के दौरान ही जेल में ही खुदकुशी कर ली थी। जबकि, छठा आरोपी नाबालिग होने की वजह से बाल सुधार गृह में मामूली समय गुजार कर बरी हो चुका है। अब निर्भया के माता-पिता समेत पूरा देश उन बचे हुए चारों गुनहगारों को फांसी मिलने का इंतजार कर रहा है।

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