गीता को ‘राष्ट्रीय ग्रंथ’ के तौर पर थोपना सही नहीं: थरूर
नयी दिल्ली। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के भगवद् गीता को ‘राष्ट्रीय ग्रंथ' घोषित करने के प्रस्ताव पर विरोधी स्वर उठना है। कांग्रेस समेत तमाम विरोधी पार्टियां इसके खिलाफ खड़े हो गए हैं। कांग्रेस नेता शशि थरूर ने सुषमा स्वराज पर सवाल खड़ा करते हुए कहा है कि विभिन्न धर्मों में विश्वास रखने वाले देश में आखिर कैसे किसी पवित्र ग्रंथ को अन्य ग्रंधों से ‘अधिक पवित्र ग्रंथ' बताया जा सकता है।

थरूर ने संसद के बाहर संवाददाताओं से बात करते हुए कहा कि मैं भी एक हिंदू हूं लेकिन हमारे धर्म में केवल एक पवित्र पुस्तक नहीं हैं बल्कि कई पुस्तकें हैं। थरुर ने कहा कि यदि आप गीता को लेते हैं तो वेदों का क्या होगा, उपनिषदों का क्या होगा? थरुर ने कहा कि हम केवल यह नहीं कह सकते कि कोई पुस्तक किसी अन्य से अधिक पवित्र है।
थरुर ने कहा कि मेरा विचार है कि सरकार का इस तरह की बातें करना सही नहीं है। गौरतलब है कि सुषमा स्वराज को गीता को ‘राष्ट्रीय ग्रंथ' घोषित करने की बात कही थी जिससे विवाद पैदा हो गया है।












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