North Eastern Railway: ट्रेन पकड़ने से पहले कर लें जांच, आज से कैंसिल रहेंगी ये 122 ट्रेनें, देखें पूरी लिस्ट
North Eastern Railway: पूर्वोत्तर रेलवे के मुख्यालय गोरखपुर में रेल यातायात को अधिक सुगम, सुरक्षित और आधुनिक बनाने के उद्देश्य से गोरखपुर जंक्शन यार्ड की रिमाडलिंग (पुनर्निर्माण) की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इस प्रक्रिया के तहत पहले प्री नॉन इंटरलाकिंग और फिर नॉन इंटरलाकिंग कार्य किए जाएंगे।
यह कार्य 12 अप्रैल से लेकर 3 मई 2025 तक चलेगा, और अंत में 3 मई को रेल संरक्षा आयुक्त (CRS) द्वारा निरीक्षण कर कार्य को अंतिम मुहर दी जाएगी।

क्या है नॉन इंटरलाकिंग और इसकी आवश्यकता क्यों?
रेलवे के संचालन में नॉन इंटरलाकिंग उस स्थिति को कहते हैं जब किसी यार्ड में तकनीकी कार्यों जैसे नई पटरी जोड़ना, प्लेटफॉर्म लिंक करना या सिग्नल सिस्टम बदलना होता है, और उस दौरान सिग्नलिंग सिस्टम अस्थायी रूप से निष्क्रिय रहता है। गोरखपुर यार्ड की रिमाडलिंग का मुख्य कारण है डोमिनगढ़-गोरखपुर जंक्शन-गोरखपुर कैंट के बीच तीसरी रेल लाइन का निर्माण, जिससे ट्रेनों का आवागमन अधिक सहज और समयबद्ध हो सकेगा।
रिमाडलिंग का समय विभाजन:
- 12 अप्रैल से 26 अप्रैल: प्री नॉन इंटरलाकिंग कार्य
- 27 अप्रैल से 3 मई: नॉन इंटरलाकिंग कार्य
- 3 मई: CRS निरीक्षण और मंजूरी
North Eastern Railway पर 122 ट्रेनें होंगी प्रभावित
रिमाडलिंग कार्य के कारण रेलवे प्रशासन ने कुल 122 ट्रेनों को प्रभावित करने का निर्णय लिया है। इसमें से कई ट्रेनें निरस्त रहेंगी, कुछ को बीच रास्ते में ही टर्मिनेट कर दिया जाएगा, जबकि अन्य को मार्ग परिवर्तन करके चलाया जाएगा।
रद्द कि गई ये प्रमुख ट्रेनें
- गोरखपुर-बांद्रा टर्मिनस (15067) 16 अप्रैल से 30 अप्रैल
- बांद्रा-गोरखपुर टर्मिनस (15068) 18 अप्रैल से दो मई
- डिब्रूगढ़-अमृतसर-गोरखपुर एक्सप्रेस (15211, 15212) 16 अप्रैल से चार मई
- गोरखपुर-लखनऊ इंटरसिटी (15031, 15032) 16 अप्रैल से पांच मई
- छपरा-नौतनवां इंटरसिटी (15105, 15106) 12 अप्रैल से तीन मई
- लखनऊ-पाटिलीपुत्र एक्सप्रेस (12529, 12530) 12 अप्रैल से तीन मई
- गोरखपुर-पनवेल एक्सप्रेस (15065) 15 अप्रैल से चार मई
- पनवेल-गोरखपुर एक्सप्रेस (15066) 16 अप्रैल से पांच मई
- गोरखपुर-कोलकाता एक्सप्रेस (15048) 13 अप्रैल से चार मई
- कोलकाता-गोरखपुर एक्सप्रेस (15047) 14 अप्रैल से पांच मई
- गोरखपुर-कोलकाता एक्सप्रेस (15050) 16 अप्रैल से तीन मई
- कोलकाता-गोरखपुर एक्सप्रेस (15049) 16 अप्रैल से चार मई
- छपरा-मथुरा एक्सप्रेस (22531, 22532) 16 अप्रैल सेर दो मई
- गोरखपुर-देहरादून एक्सप्रेस (15005) 16 अप्रैल से दो मई
- देहरादून-गोरखपुर एक्सप्रेस (15006) 15 अप्रैल से एक मई
- देहरादून-मुजफ्फरपुर एक्सप्रेस (15002) 19 अप्रैल से तीन मई
- मुजफ्फरपुर-देहरादून एक्सप्रेस (15001) 21 अप्रैल से 10 मई
- गोरखपुर-एलटीटी एक्सप्रेस (20103) 19 अप्रैल से दो मई
- एलटीटी-गोरखपुर एक्सप्रेस (20104) 20 अप्रैल से तीन मई
- गोरखपुर-आनंद विहार हमसफर एक्सप्रेस (12571) 20 अप्रैल से तीन मई
- आनंद विहार-गोरखपुर हमसफर एक्सप्रेस (12572) 21 अप्रैल से चार मई
- गोरखपुर-भठिंडा गोरखधाम एक्सप्रेस (12555) 26 अप्रैल से तीन मई
- भठिंडा-गोरखपुर गोरखधाम एक्सप्रेस (12556) 27 अप्रैल से चार मई
- चौरीचौरा एक्सप्रेस (15004) 26 अप्रैल से तीन मई
- चौरीचौरा एक्सप्रेस (15003) 27 अप्रैल से चार मई
- कटिहार-दिल्ली एक्सप्रेस (15705) 28 अप्रैल से एक मई
- दिल्ली-कटिहार एक्सप्रेस (15706) 29 अप्रैल से दो मई
इन ट्रेनों का बदले जाएगा रुट
हावड़ा-काठगोदाम बाघ एक्सप्रेस (13019) 15 अप्रैल से दो मई
- काठगोदाम-हावड़ा बाघ एक्सप्रेस (13020) 15 अप्रैल से दो मई
- सहरसा-नई दिल्ली वैशाली एक्सप्रेस (12553) 26 अप्रैल से दो मई
- नई दिल्ली-सहरसा वैशाली एक्सप्रेस (12554) 26 अप्रैल से दो मई
- कटिहार-अमृतसर आम्रपाली एक्सप्रेस (15707) 12 अप्रैल से तीन मई
- अमृतसर-कटिहार आम्रपाली एक्सप्रेस (15708) 24 अप्रैल से दो मई
- जयनगर-अमृतसर शहीद एक्सप्रेस (14673) 12 अप्रैल से तीन मई
- अमृतसर-जयनगर शहीद एक्सप्रेस (14674) 11 अप्रैल से दो मई
- दरभंगा-नई दिल्ली स्पेशल (15651) 12 अप्रैल से तीन मई
- बांद्रा टर्मिनस-बरौनी एक्सप्रेस (19037) 19 अप्रैल से एक मई
- दरभंगा-नई दिल्ली एक्सप्रेस (12565) 22 अप्रैल से दो मई
जानकारी के मुताबिक इन प्रमुख स्टेशनों के बीच से चलेंगी ये 35 ट्रेनें
- हैदराबाद-गोरखपुर
- गोरखपुर-अहमदाबाद
- गोरखपुर-गोमतीनगर
- एलटीटी-गोरखपुर
- बांद्रा टर्मिनस-गोरखपुर
- नौतनवा-गोरखपुर सहित 35 ट्रेनों को बीच के स्टेशनों से संचालित किया जाएगा।
- अन्य 10 ट्रेनों को एक से चार घंटे तक रि-शेड्यूल किया जाएगा।
बता दें कि डोमिनगढ़ से गोरखपुर कैंट के बीच तीसरी लाइन का निर्माण ट्रेनों की लेटलतीफी को कम करने के उद्देश्य से किया जा रहा है। इससे दो ट्रेनों के एक साथ आने पर भी एक के लिए जगह बनी रहेगी और ट्रेनों का संचालन अधिक निर्बाध हो सकेगा। प्लेटफार्म और नई पटरियों को लिंक करने के बाद रेलगाड़ियाँ तेज और सुरक्षित गति से चल सकेंगी।












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