दोषपूर्ण जांच के लिए अदालतों पर दोष नहीं मढ़ा जा सकता: CJI रमन्ना
दोषपूर्ण जांच के लिए अदालतों पर दोष नहीं मढ़ सकते: CJI रमन्ना
नई दिल्ली, 27 नवंबर: भारत के मुख्य न्यायाधीश एनवी रमन्ना ने कहा है कि हमारे देश में अदालतों को लेकर लोगों के बीच कई ऐसी बातें प्रचलित हैं, जिनमें कोई सच्चाई नहीं है। शनिवार को दिल्ली में एक कार्यक्रम में बोलते हुए उन्होंने कहा कि लोगों को लगता है कि अदालतें सजाए दिए बिना अपराधियों को छोड़ सकती हैं। लोगों के बीच ये जागरुकता होनी जरूरी है कि किसी मामले की रिपोर्ट फिर जांच और उसके बाद भी लंबी प्रक्रिया है। उसमें जो भी होता है, उसमें सिर्फ कोर्ट की जिम्मेदारी नहीं होती है। अगर जांच ठीक से नहीं हुई तो इसके लिए अदालत को दोषी नहीं ठहरा सकते हैं।

चीफ जस्टिस रमन्ना ने कहा, अदालतों को लेकर लोगों में कई पूर्वाग्रह और भ्रांतियां हैं। हमें इन प्रचलित भ्रांतियों को दूर करने की जरूरत है। उदाहरण के लिए, इस देश में बहुत से लोग मानते हैं कि यह अदालतें ही कानून बनाती हैं। बहुस से लोगों का इस तरह का विश्वास भी है कि अदालतें किसी को छोड़ने में ज्यादा ही उदारवादी हैं। सच्चाई यह है कि सरकारी वकील, अधिवक्ता और तमाम दूसरे पक्षों को न्यायिक प्रक्रिया में सहयोग करना होता है। सहयोग ना करना, प्रोसीजर में चूक या फिर किसी एजेंसी की खराब जांच को लिए अदालतों को दोष नहीं दिया जा सकता है।
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संविधान दिवस पर वकीलों को दिया था संदेश
शुक्रवार(26 नवंबर) को संविधान दिवस के मौके पर चीफ जस्टिस ने कहा था कि संविधान निर्माताओं ने विधायिका और कार्यपालिका के संबंध में जवाबदेही को एक अभिन्न अंग बनाया है। उन्होंने जानबूझकर न्यायपालिका को अलग पायदान पर रखने का फैसला किया। उन्हें उन लोगों की क्षमता पर संविधान को कायम रखने का भरोसा था, जो कोर्ट में जजों के आहदो पर बैठेंगे। आपको (वकीलों को) समाज में संरक्षक होना चाहिए। जरूरतमंद लोगों को अपना हाथ देने में सक्रिय भूमिका निभाएं। जब भी संभव हो मामलों को मुफ्त में उठाएं।












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