मोदी की कैबिनेट में नहीं मिली शहजादों को जगह

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नयी दिल्ली। देश के प्रधानमंत्री बने नरेन्द्र मोदी ने कभी भी पारिवारिक जीवन का सुख नहीं भोगा। बपचन में शादी हो जाने के बावजूद उन्होंने अपनी पत्नी का त्याग कर संन्यास का जीवन जीया। परिवार को हमेशा अलग रखने वाले नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री के रूप में अपनी केंद्र सरकार में भी परिवारवाद की जड़ों को पनपने नहीं दिया है। उन्होंने पार्टी के किसी दिग्गज नेता के बेटे-बेटी को अपने मंत्रिमंडल में जूनियर मंत्री का जिम्मा भी नहीं दिया है।

न केवल अपने नेताओं के बल्कि गठबंधन के सहयोगी दलों के मामले में भी वे यह फार्मूला लागू करवाने में कामयाब रहे। मोदी ने अपने मंत्रिमंडल में अपने हिसाब से मंत्रियों के विभागों का बेटवारा किया है। मोदी ने अपने दम पर पार्टी में जगह बनाने वाले नेताओं को तो पर्याप्त जगह दी, लेकिन पारिवारिक पृष्ठभूमि के दम पर आगे आए 'युवा' नेताओं को कतई भाव नहीं दिया।

आपको बता दें कि एनडीए की सरकार में कम से कम सात नेता बेटे-बेटियों का दावा उनकी सरकार में मजबूत माना जा रहा था। लोजपा प्रमुख रामविलास पासवान के बेटे चिराग पासवान, मेनका गांधी के बेटे वरुण गांधी, राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के पुत्र दुष्यंत राजे, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह के पुत्र अभिषेक सिंह, कल्याण सिंह के पुत्र राजवीर सिंह, हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल के बेटे अनुराग ठाकुर, यशवंत सिन्हा ने अपने पुत्र जयंत सिन्हा कुछ ऐसे नाम है जिन्हें मंत्रीमंडल में जगह मिलने का दावा मजबूत माना जा रहा था, लेकिन मोदी ने अपने मंत्रिमंडल में परिवारवाद को कोई जगह नहीं दी।

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